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सीबीआई जांच के दायरे में आएंगे कई पुलिस अफसर

Fri, 29 Jan 2016 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद Updated Fri, 29 Jan 2016 01:17 AM IST
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 शहर पश्चिमी के बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड की सीबीआई जांच के दायरे में कई अफसरों का भी आना तय है। घटना के वक्त यहां तैनात रहे कई अधिकारियों से सीबीआई टीम पूछताछ कर सकती है। तत्कालीन अफसरों पर इल्जाम लगा था कि उन्होंने राजू पाल हत्याकांड में आरोपियों का सहयोग किया और सुबूत भी नष्ट किए। यहां तक कि राजू पाल समेत तीनों मृतकों के शवों को रात में पोस्टमार्टम कराकर भोर में परिजनों की सहमति के बिना दारागंज में गुपचुप ढंग से अंत्येष्टि करा दी। ऐसे में उन पुलिस अफसरों पर सीबीआई का फंदा कस सकता है।
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25 जनवरी 2005 को विधायक राजू पाल की सुलेमसराय मोड़ के पास गोलियां बरसाकर हत्या के वक्त यहां आईजी एसी शर्मा, डीआईजी अखिलेश मेहरोत्रा, एसएसपी सुनील गुप्त, एसपी सिटी राजेश कृष्ण, सीओ सिविल लाइंस शिवबरन सिंह और धूमनगंज के थानाध्यक्ष परशुराम सिंह थे। राजू पाल की पत्नी मौजूदा बसपा विधायक पूजा पाल ने कत्ल में एफआईआर तो अतीक अहमद और उनके छोटे भाई अशरफ के खिलाफ लिखाई थी लेकिन उनका आरोप रहा है कि तत्कालीन पुलिस-प्रशासन की शह पर यह हत्याकांड अंजाम दिया गया था। उनका यह भी आरोप है कि थानेदार से लेकर एसएसपी तक यह जानकारी थी कि राजू पाल की जान पर खतरा बना है। दो बार हमला हो चुका था।
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अशरफ के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी। इतना खतरे के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा भी नहीं मुहैया कराई। तब सपा शासन था इसलिए कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। हत्याकांड के बाद पुलिस अफसरों ने सुबूत नष्ट किए थे। घटनास्थल पर दर्जनों कारतूसों के खोखे मिले थे। मगर ज्यादातर गायब कर दिए। एके-47 समेत दूसरे आधुनिक असलहों से फायरिंग की गई थी लेकिन खोखे केवल राइफलों के जमा किए गए थे। क्षतिग्रस्त गाड़ियों में गोलियों के सुराख बिगाडे़ गए। टेलीफोनिक रेकार्ड गायब किए गए। रात में ही दिवंगत विधायक राजू पाल समेत तीनों मृतकों का पोस्टमार्टम कराया गया फिर भोर में दारागंज गंगा घाट पर अंतिम संस्कार करा दिया गया। राजू पाल की मां रानी पाल तो आखिरी बार बेटे का चेहरा भी नहीं देख सकीं।
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पूजा पाल का आरोप है कि रात में हुए पोस्टमार्टम में भी खेल हुआ था। घटना के वक्त राजेश सिंह करेली थानाध्यक्ष थे जो सबसे कहते कि अतीक उन्हें अपना दूसरा भाई मानते हैं। हमले में एक शूटर भी घायल हुआ था, जिसे राजेश ने उठाकर सुरक्षित कहीं पहुंचा दिया था। बाद में कंट्रोल रूम की लॉगबुक के रेकार्ड से अहम पेज गायब करने में भी एक पुलिस अफसर का नाम चर्चा में आया था। दूसरे दिन हुए बवाल के बाद इस घटना में एसओ, सीओ, एसपी सिटी को निलंबित किया गया लेकिन एसएसपी सुनील गुप्ता और आईजी एसी शर्मा तब भी बने रहे। एसी शर्मा दो साल पहले डीजीपी के पद से रिटायर हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सीबीआई राजू पाल हत्याकांड की नए सिरे से जांच के दौरान तत्कालीन पुलिस अफसरों से निश्चित तौर पर पूछताछ करेगी। छानबीन में ऐसे साक्ष्य मिलते हैं कि पुलिसवालों ने सुबूत जानबूझकर नष्ट किए या उनसे छेड़छाड़ की तो कुछ भी हो सकता है।
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