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महंत नरेंद्र गिरि: हरिद्वार कुंभ मेले में ही पहली बार बने महात्मा, वर्ष 2004 में मिली मठ बाघंबरी गद्दी की महंताई
Tue, 21 Sep 2021 08:46 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 21 Sep 2021 08:46 AM IST
सार
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सोमवार को संदिग्ध हालत में फांसी पर लटके मिले। बांघबरी मठ स्थित एक कमरे में उनका शव फंदे पर लटका मिला। मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें अपमान से आहत होकर कदम उठाने समेत अन्य बातें लिखी हैं।
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नरेंद्र गिरि (फाइल फोटो)।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मूलरूप से प्रयागराज के ही हंडिया के रहने वाले तकरीबन साठ वर्षीय महंत नरेंद्र गिरि का बीस वर्ष की उम्र में एक साधु के तौर पर पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी से नाता जुड़ा था। वह हरिद्वार के कुंभ मेले में ही पहली बार महात्मा और फिर अखाड़े की परंपरा के अनुसार नागा संन्यासी बने। इसके बाद वह बतौर सेवादार राजस्थान के खीरम स्थित अखाड़े के आश्रम में रहे।
वर्ष 1998 में हरिद्वार में ही वह अखाड़े के अष्टकौशल में कारबारी यानी उप महंत के रूप चुने गए। फिर वर्ष 2001 में वह अष्टकौशल के श्रीमहंत बने। मठ बाघंबरी गद्दी के महंत भगवान गिरि के नहीं रहने पर उन्हें उनका उत्तराधिकारी घोषित करते हुए वर्ष 2004 में मठ का महंत बनाया गया।
वर्ष 2015 में उज्जैन कुंभ के दौरान अखाड़े की ओर से पहले उन्हें सचिव बनाया गया और फिर उज्जैन कुंभ में ही वह अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बने।
निरंजनी अखाड़े के हरिद्वार के सचिव महंत रविंद्रपुरी के मुताबिक अखाड़े के चार सचिवों में से महंत नरेंद्र गिरि अखाड़े के प्रयागराज के सचिव थे। प्रयागराज के दूसरे सचिव महंत ओंकार गिरि हैं। वहीं निरंजनी अखाड़े के हरिद्वार के दूसरे सचिव महंत रामरतन गिरि हैं।
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वर्ष 1998 में हरिद्वार में ही वह अखाड़े के अष्टकौशल में कारबारी यानी उप महंत के रूप चुने गए। फिर वर्ष 2001 में वह अष्टकौशल के श्रीमहंत बने। मठ बाघंबरी गद्दी के महंत भगवान गिरि के नहीं रहने पर उन्हें उनका उत्तराधिकारी घोषित करते हुए वर्ष 2004 में मठ का महंत बनाया गया।
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वर्ष 2015 में उज्जैन कुंभ के दौरान अखाड़े की ओर से पहले उन्हें सचिव बनाया गया और फिर उज्जैन कुंभ में ही वह अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बने।
निरंजनी अखाड़े के हरिद्वार के सचिव महंत रविंद्रपुरी के मुताबिक अखाड़े के चार सचिवों में से महंत नरेंद्र गिरि अखाड़े के प्रयागराज के सचिव थे। प्रयागराज के दूसरे सचिव महंत ओंकार गिरि हैं। वहीं निरंजनी अखाड़े के हरिद्वार के दूसरे सचिव महंत रामरतन गिरि हैं।
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निरंजनी अखाड़े का है लेटे हुए हनुमान मंदिर
त्रिवेणी बांध स्थित लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के मठ बाघंबरी गद्दी के ही क्षेत्राधिकार के तहत है। ऐसे में मठ बाघंबरी गद्दी का महंत बनने के साथ ही नरेंद्र गिरि लेटे हुए हनुमान मंदिर के भी महंत थे।