तन तो काशी हो गया मन हो गया प्रयाग
पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता की ओर से सोमवार को गंगा संस्कृति यात्रा के तहत शृंग्वेरपुर धाम में कवि सम्मेलन सहित अन्य प्रस्तुतियों से शाम सजी। जुटे रचनाकारों ने शब्द-शब्द गंगा की महिमा बखानी, गीत गाए और गंगा की निर्मलता के लिए प्रार्थना की।
बतौर अध्यक्ष वरिष्ठ शायर बुद्धिसेन शर्मा ने सुनाया, ‘रही सदा से विश्व में भारत भूमि अनन्य, गंगा ने आकर किया इसे और भी धन्य’सुनाया तो सुपरिचित गीतकार यश मालवीय की रचना, गंगा के तट पर जगा ऐसा जीवनराग, तन तो काशी हो गया मन हो गया प्रयाग’ भी खूब सराही गई।
संचालक डॉ.श्लेष गौतम ने ‘गंगा जीवनदायिनी गंगा अमृतधार, गंगा गुण की खान है महिमा अपरंपार’, राजेश कुमार ने ‘गंगा ना कर पाएगी भागीरथ को माफ, हम सब गर ना कर सके गंगा जी को साफ’, जयकृष्ण राय तुषार ने ये गंगा है यही दुनिया को फिर से रोशनी देगी, सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। इसी क्रम में अशोक स्नेही, विजयानंद, अनुराग अनुभव, विनोद शुक्ल, रामाशीष यादव, गंगा त्रिपाठी ने भी रचनाएं पढ़ी। वहीं सुरभि सिंह और टीम ने सुंदरकांड पर आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर लुभाया। धन्यवाद ज्ञापन केंद्र के अधिकारी कुणाल घोष ने किया।