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Allahabad highcourt: इविवि के विधि छात्रों की याचिका खारिज, आज से देनी होगी परीक्षा
Thu, 07 Jul 2022 01:43 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 07 Jul 2022 01:43 AM IST
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हाईकोर्ट।
- फोटो : amar ujala
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सात जुलाई से प्रस्तावित एलएलबी प्रथम एवं चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं निरस्त किए जाने केमामले में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने यह आदेश याचियों की ओर से बहस के लिए जोर न देने पर दिया है। मामले में प्रवीण कुमार व 22 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी। कोर्ट के आदेश आने के बाद बृहस्पतिवार से विधि की परीक्षाएं घोषित कार्यक्रम के अनुसार होंगी।
विधि छात्रों की मांग थी कि ओपन बुक परीक्षा या एसाइनमेंट आधारित मूल्यांकन कराया जाए। इसके पीछे छात्रों का तर्क था कि कोविड-19 के कारण सत्र काफी पिछड़ गया है। बार कौंसिल ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के अनुसार एक सेमेस्टर की कक्षाएं कम से कम 15 सप्ताह की होनी चाहिए, लेकिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में केवल 48 दिन यानी सात हफ्ते तक ही कक्षाएं चलीं।
तर्क दिया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने भले ही सिलेबस में 20 फीसदी की कटौती कर दी, लेकिन इसके अनुपात में जितने दिनों की कक्षाएं होनी चाहिए थीं उतने दिन भी नहीं चलीं। कम से कम 60 दिन की कक्षाएं तो होनी ही चाहिए थीं।
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छात्रों ने इसी को आधार बनाते हुए एलएलबी में एसाइनमेंट आधारित मूल्यांकन या ओपन बुक परीक्षा कराने की मांग की थी, लेकिन बुधवार को सुनवाई शुरू होते ही याचियों की ओर से मामले में कोई जोर नहीं दिया गया। इस वजह से कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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विधि छात्रों की मांग थी कि ओपन बुक परीक्षा या एसाइनमेंट आधारित मूल्यांकन कराया जाए। इसके पीछे छात्रों का तर्क था कि कोविड-19 के कारण सत्र काफी पिछड़ गया है। बार कौंसिल ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के अनुसार एक सेमेस्टर की कक्षाएं कम से कम 15 सप्ताह की होनी चाहिए, लेकिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में केवल 48 दिन यानी सात हफ्ते तक ही कक्षाएं चलीं।
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तर्क दिया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने भले ही सिलेबस में 20 फीसदी की कटौती कर दी, लेकिन इसके अनुपात में जितने दिनों की कक्षाएं होनी चाहिए थीं उतने दिन भी नहीं चलीं। कम से कम 60 दिन की कक्षाएं तो होनी ही चाहिए थीं।
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छात्रों ने इसी को आधार बनाते हुए एलएलबी में एसाइनमेंट आधारित मूल्यांकन या ओपन बुक परीक्षा कराने की मांग की थी, लेकिन बुधवार को सुनवाई शुरू होते ही याचियों की ओर से मामले में कोई जोर नहीं दिया गया। इस वजह से कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।