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Allahabad highcourt: पूर्व प्रधान और पंचायत सचिव के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक, सरकार से जवाब तलब
Wed, 25 May 2022 12:04 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 25 May 2022 12:04 AM IST
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court demo
- फोटो : सोशल मीडिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानिया, गाजीपुर के अंधियारा की पूर्व ग्राम प्रधान रीनू यादव व पंचायत सचिव राम जनम सिंह के खिलाफ सुहवल थाने में दर्ज एफ आईआर के तहत उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही मामले में राज्य सरकार से छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने एडीओ जमनिया जय प्रकाश पांडेय को भी नोटिस जारी किया है।
मामले में याचियों पर शौचालय निर्माण में दो लाख, 26 हजार, 623 रुपये के गबन का आरोप है। कोर्ट ने याची को विवेचना में सहयोग करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ ने रीनू यादव व अन्य की याचिका पर दिया है।
याची का तर्क है कि वह 2015 से 2020 तक ग्राम प्रधान रही। 16 अगस्त 19 को शौचालय निर्माण में अनियमितता की जिलाधिकारी को शिकायत की गई। जिसकी जांच हुई। आरोप साबित नहीं हुआ। याची के पिता मदन सिंह यादव को समाजवादी पार्टी ने एमएलसी का टिकट दे दिया। बीजेपी वालों ने नाम वापसी का दबाव बनाया किंतु न मानने पर याची को फंसाने के लिए दो अप्रैल 22 को चार अधिकारियों की जांच बैठाई गई।
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पांच अप्रैल को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा गया। इंतजार किए बगैर दूसरे दिन जांच रिपोर्ट दे दी गई और एडीओ ने छह अप्रैल 22 को एफ आईआर दर्ज करा दी। कोर्ट ने हड़बड़ी में की गई कार्रवाई को विचारणीय माना और नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। ब्यूरो
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मामले में याचियों पर शौचालय निर्माण में दो लाख, 26 हजार, 623 रुपये के गबन का आरोप है। कोर्ट ने याची को विवेचना में सहयोग करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ ने रीनू यादव व अन्य की याचिका पर दिया है।
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याची का तर्क है कि वह 2015 से 2020 तक ग्राम प्रधान रही। 16 अगस्त 19 को शौचालय निर्माण में अनियमितता की जिलाधिकारी को शिकायत की गई। जिसकी जांच हुई। आरोप साबित नहीं हुआ। याची के पिता मदन सिंह यादव को समाजवादी पार्टी ने एमएलसी का टिकट दे दिया। बीजेपी वालों ने नाम वापसी का दबाव बनाया किंतु न मानने पर याची को फंसाने के लिए दो अप्रैल 22 को चार अधिकारियों की जांच बैठाई गई।
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पांच अप्रैल को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा गया। इंतजार किए बगैर दूसरे दिन जांच रिपोर्ट दे दी गई और एडीओ ने छह अप्रैल 22 को एफ आईआर दर्ज करा दी। कोर्ट ने हड़बड़ी में की गई कार्रवाई को विचारणीय माना और नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। ब्यूरो