{"_id":"683e5ff497705e661a01bdf0","slug":"allahabad-high-court-seeks-response-on-proposed-demolition-for-bankebihari-corridor-2025-06-03","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: हाईकोर्ट ने बांकेबिहारी कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर मांगा जवाब, प्रभावित होंगे पुरातन मठ-मंदिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: हाईकोर्ट ने बांकेबिहारी कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर मांगा जवाब, प्रभावित होंगे पुरातन मठ-मंदिर
Tue, 03 Jun 2025 09:36 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 03 Jun 2025 09:36 AM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांकेबिहारी कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर जवाब मांगा है। याची ने धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को नुकसान न पहुंचाने की मांग की है।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के आसपास की कुंज गलियों और अन्य मंदिरों को गिराए जाने की प्रस्तावित योजना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की अदालत ने मथुरा के पंकज की जनहित याचिका पर दिया है।
याची की ओर से दलील दी गई कि कुंज गलियां सिर्फ रास्ते नहीं, बल्कि बांके बिहारी की लीलाओं से जुड़ी ऐतिहासिक और पवित्र स्थली हैं। इन्हें नष्ट करना वैष्णव भक्ति परंपरा की जीवित धरोहर को खत्म करना होगा। ये गलियां भक्तों के लिए उतनी ही पूज्य हैं, जितना स्वयं मंदिर।
बांके बिहारी कॉरिडोर योजना वृंदावन की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचा सकती है। याची ने मांग किया है कि सरकार को पारंपरिक गलियों और मंदिरों को संरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए, ताकि वृंदावन का मूल स्वरूप बना रहे। अब इस मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से तीन जुलाई तक जवाब तलब किया है।
विज्ञापन
कॉरिडोर से प्रभावित होंगे 50 से अधिक पुरातन मठ-मंदिर
कॉरिडोर निर्माण से 50 से अधिक पुरातन मठ-मंदिर व कुंजभवन प्रभावित होंगे। बांकेबिहारीजी मंदिर के आसपास के ये मंदिर-देवालय वर्षों पुराने हैं। इन सभी प्राचीन स्थलों की अपनी-अपनी स्वतंत्र पूजा पद्धतियां हैं, जिनके सेवायतजन आज तक इसका पालन कर रहे हैं।
विज्ञापन
याची की ओर से दलील दी गई कि कुंज गलियां सिर्फ रास्ते नहीं, बल्कि बांके बिहारी की लीलाओं से जुड़ी ऐतिहासिक और पवित्र स्थली हैं। इन्हें नष्ट करना वैष्णव भक्ति परंपरा की जीवित धरोहर को खत्म करना होगा। ये गलियां भक्तों के लिए उतनी ही पूज्य हैं, जितना स्वयं मंदिर।
विज्ञापन
बांके बिहारी कॉरिडोर योजना वृंदावन की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचा सकती है। याची ने मांग किया है कि सरकार को पारंपरिक गलियों और मंदिरों को संरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए, ताकि वृंदावन का मूल स्वरूप बना रहे। अब इस मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से तीन जुलाई तक जवाब तलब किया है।
विज्ञापन
कॉरिडोर से प्रभावित होंगे 50 से अधिक पुरातन मठ-मंदिर
कॉरिडोर निर्माण से 50 से अधिक पुरातन मठ-मंदिर व कुंजभवन प्रभावित होंगे। बांकेबिहारीजी मंदिर के आसपास के ये मंदिर-देवालय वर्षों पुराने हैं। इन सभी प्राचीन स्थलों की अपनी-अपनी स्वतंत्र पूजा पद्धतियां हैं, जिनके सेवायतजन आज तक इसका पालन कर रहे हैं।
ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए उन्होंने सभी की सहमति से नया मंदिर विकसित करने का सुझाव दिया है। इनमें विश्वनाथ कुंज, पुरदिलपुर वाला मंदिर, मुल्तान बिहारी मंदिर, नवल बिहारी मंदिर, छैलबिहारी मंदिर, गोपालबिहारी मंदिर समेत अनेक देवालय व मंदिर हैं।
अफसर बोले-कॉरिडोर का निर्माण भविष्य की मांग
प्रस्तावित श्रीबांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर और ट्रस्ट बनने की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही सेवायतों का विरोध जारी है। सोमवार को कॉरिडोर निर्माण पर अधिकारियों के सामूहिक मंथन का सेवायतों ने थाली बजाकर विरोध किया। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि किसी को शिकायत है तो वह लिखित में बता सकता है।
प्रस्तावित श्रीबांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर और ट्रस्ट बनने की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही सेवायतों का विरोध जारी है। सोमवार को कॉरिडोर निर्माण पर अधिकारियों के सामूहिक मंथन का सेवायतों ने थाली बजाकर विरोध किया। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि किसी को शिकायत है तो वह लिखित में बता सकता है।
साथ ही कहा है कि भविष्य की मांग पर ही कॉरिडोर निर्माण की योजना बनाई है। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार ने बताया कि सभी फैसले शासन स्तर पर वृंदावन की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लिए गए हैं।
समर्थन में आए लोग
ट्रस्ट बनने की अधिसूचना जारी होने के बाद से अधिकारी सेवायतों की नब्ज टटोलने में लगे हैं। एक सप्ताह से अधिकारी वृंदावन की गलियों के चक्कर काट रहे हैं। हर बार निराशा हाथ लगी, लेकिन सोमवार को सामूहिक बैठक में कुछ लोगों ने समर्थन दिया है। इसके अलावा व्यापारी समेत साधु-संत व सेवायत समाज छोड़कर वृंदावनवासी कॉरिडोर निर्माण के इच्छुक हैं।
ट्रस्ट बनने की अधिसूचना जारी होने के बाद से अधिकारी सेवायतों की नब्ज टटोलने में लगे हैं। एक सप्ताह से अधिकारी वृंदावन की गलियों के चक्कर काट रहे हैं। हर बार निराशा हाथ लगी, लेकिन सोमवार को सामूहिक बैठक में कुछ लोगों ने समर्थन दिया है। इसके अलावा व्यापारी समेत साधु-संत व सेवायत समाज छोड़कर वृंदावनवासी कॉरिडोर निर्माण के इच्छुक हैं।