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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court's decision - Foreign citizens of Indian origin have the right to move freely in India.

Prayagraj : इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला- भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को है बेरोकटोक भारत में आने जाने का हक

Sun, 21 Jan 2024 07:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 21 Jan 2024 07:09 AM IST
सार

इन्हें ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड जारी करने से सिर्फ इसलिए इन्कार नहीं किया जा सकता कि उनके पास भारत में बना जन्म प्रमाणपत्र नहीं है। कोर्ट ने याची अमेरिकी महिला को ओआईसी कार्ड जारी करने का आदेश दिया है।

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Allahabad High Court's decision - Foreign citizens of Indian origin have the right to move freely in India.
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि भारतीय मूल के उन विदेशी नागरिकों को भारत में बेरोकटोक आने-जाने का हक है, जो 1961 के हेग कन्वेंशन में शामिल थे। इन्हें ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड जारी करने से सिर्फ इसलिए इन्कार नहीं किया जा सकता कि उनके पास भारत में बना जन्म प्रमाणपत्र नहीं है। कोर्ट ने याची अमेरिकी महिला को ओआईसी कार्ड जारी करने का आदेश दिया है।

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न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने अमेरिकी नागरिक नरोमत्ती देवी गणपत की याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। अमेरिका में जन्मीं नरोमत्ती देवी का दावा है कि उनके पूर्वज बिश्नाथ, गणेश और जानकी भारतीय मूल के थे।
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अमेरिका के गुयाना स्थित नेशनल आर्काइव की ओर से जारी प्रमाणपत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनके परदादा गणेश जौनपुर जिले की मड़ियाहूं तहसील के गांव सारिगांव के रहने वाले थे, जबकि परदादी जानकी प्रयागराज की हंडिया तहसील की निवासी थीं। 10 अक्तूबर 1882 में ये लोग अमेरिका के गुयाना में बस गए। वह रिश्तेदारों से मिलने के लिए बतौर यात्री अक्सर भारत आती हैं।
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इसी बीच वर्ष 2018 में मुंबई निवासी भाविन दिनेश ढोलकिया से उन्होंने मंदिर में विवाह कर लिया। पंजीकरण भी करा लिया। विदेशी यात्री होने के कारण उनके वीजा की वैधता खत्म होने लगी तो उन्होंने विदेश मंत्रालय में ओसीआई कार्ड के लिए आवेदन किया। विदेश मंत्रालय ने गुयाना के नेशनल आर्काइव की ओर से जारी जन्म प्रमाण पत्र मानने से इन्कार करते हुए किसी भारतीय नगर पालिका से जारी प्रमाण पत्र की मांग की।

याची के अधिवक्ता विनीत कुमार सिंह ने दलील दी कि याची के परदादा और परदादी भारतीय मूल के हैं, जो जौनपुर और प्रयागराज के रहने वाले थे। नेशनल आर्काइव से जारी प्रमाणपत्र इसकी तस्दीक करता है। विदेश मंत्रालय का इसे मानने से इन्कार किया जाना न सिर्फ नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 7(ए) का उल्लंघन है, बल्कि 1961 में हुए हेग कन्वेंशन में हुए समझौते के भी विरुद्ध है।


कोर्ट ने याची को ओसीआई कार्ड हासिल करने का हकदार माना। कहा, याची ने दस्तावेजों से सिद्ध किया है कि उसके परदादा 1882 में गुयाना गए थे। उसके दावे और प्रमाणपत्रों को मानने से इन्कार नहीं किया जा सकता, क्योंकि हेग कन्वेंशन में हुए करार में भारत भी सदस्य है। यही नहीं, नागरिकता अधिनियम 1955 में भी जन्म प्रमाण पत्र दाखिल किए जाने की कोई अनिवार्य शर्त उल्लेखित नहीं है।

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