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Allahabad High Court : शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने के संबंध में राज्य सरकार से जवाब तलब

Tue, 07 Jan 2025 03:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 07 Jan 2025 03:52 PM IST
सार

याची के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि 2023 में शिक्षामित्रों को समान कार्य के समान वेतन की मांग करते हुए एक याचिका दाखिल की गई थी। न्यायालय ने शिक्षामित्रों के मानदेय को न्यूनतम मानते हुए राज्य को समिति का गठन कर एक सम्मान जनक मानदेय निर्धारित करने का निर्देश दिया था।

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Allahabad High Court: Reply sought from the state government regarding increasing the honorarium of Shikshamit
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों का मानदेय बढा़ने के संबंध में पूर्व में दिए गए आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार की ओर से लिए गए निर्णय की जानकारी मांगी है। स्थायी वकील की प्रार्थना पर सुनवाई स्थगित करते हुए 27 जनवरी 2025 की तिथि नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय की अदालत ने वाराणसी के विवेकानंद की अवमानना याचिका पर दिया।

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याची के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि 2023 में शिक्षामित्रों को समान कार्य के समान वेतन की मांग करते हुए एक याचिका दाखिल की गई थी। न्यायालय ने शिक्षामित्रों के मानदेय को न्यूनतम मानते हुए राज्य को समिति का गठन कर एक सम्मान जनक मानदेय निर्धारित करने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन न करने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई है।

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राज्य के वकील ने न्यायालय में कहा कि न्यायालय के 12 जनवरी 2024 के पारित आदेश के अनुपालन में शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को 9 अगस्त 24 को सौंप दी है। वित्तीय बोझ को देखते हुए वित्त विभाग को रिपोर्ट भेजी गई है। अगली 18 दिसंबर होगी।

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स्थायी वकील के अनुरोध पर, मामले को एक दिन के लिए स्थगित कर दिया जाता है ताकि स्थायी वकील रिट कोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में उपयुक्त प्राधिकारी/राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के संबंध में नए निर्देश प्राप्त कर सकें।

।देने संबंधी मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर राज्य के वकील ने न्यायालय को बताया कि लगभग एक लाख पचास हजार शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि का मामला है। अत्यधिक वित्तीय बोझ का मामला है। इसलिए वित्त विभाग को सहमति के लिए रिपोर्ट भेजी गई है।

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