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Allahabad High Court :  चिटहेरा भूमि घोटाले में उत्तराखंड के पूर्व सीएम के रिश्तेदारों सहित पांच को राहत

Fri, 27 May 2022 02:48 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 27 May 2022 02:48 AM IST
सार

अग्रिम जमानत पाने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के समधी अनिल राम और समधन साधना राम के साथ तीन अन्य आरोपी शामिल हैं। अनिलराम और साधना राम की अर्जी कोर्ट ने बुधवार को स्वीकार कर ली थी, जबकि बृहस्पतिवार को राहत पाने वालों में उत्तराखंड कैडर के आईएएस व सीएम पुष्कर सिंह धामी की सचिव मीनाक्षी सुंदरम के पिता एम भास्करन, उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त नौकरशाह केएम संत और उत्तराखंड कैडर में आईपीएस बृजेश स्वरूप की मां सरस्वती देवी शामिल हैं।

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Allahabad High Court: Relief to five including relatives of former Uttarakhand CM in Chithera land scam
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गौतमबुद्ध नगर जिले के चिटहेरा गांव में हुए अरबों रुपये के भूमि घोटाले के पांच आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत दे दी है। कोर्ट ने पांच आरोपियों की अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें एक लाख के निजी मुचलके पर अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि हाईकोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने अनिल राम व अन्य सहित चार अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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अग्रिम जमानत पाने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के समधी अनिल राम और समधन साधना राम के साथ तीन अन्य आरोपी शामिल हैं। अनिलराम और साधना राम की अर्जी कोर्ट ने बुधवार को स्वीकार कर ली थी, जबकि बृहस्पतिवार को राहत पाने वालों में उत्तराखंड कैडर के आईएएस व सीएम पुष्कर सिंह धामी की सचिव मीनाक्षी सुंदरम के पिता एम भास्करन, उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त नौकरशाह केएम संत और उत्तराखंड कैडर में आईपीएस बृजेश स्वरूप की मां सरस्वती देवी शामिल हैं।

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आरोपियों ने कहा - घोटाले से उनका कोई सरोकार नहीं


केएम संत उत्तराखंड के आईएएस बृजेश संत के पिता हैं। बृजेश संत अभी देहरादून में मसूरी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं। इन लोगों ने अदालत को बताया कि उनका इस भूमि घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है। चिटहेरा गांव में उनकी कंपनी ने जमीन खरीदी थी। इस जमीन पर पट्टों को लेकर पहले अपर जिलाधिकारी और फिर अपर आयुक्त के न्यायालय से फैसले आए थे। उनका पूरे घोटाले से कोई सरोकार नहीं है।


अदालत से कहा, उन सबका मामले में सह आरोपी और भूमाफिया यशपाल तोमर से कोई संबंध नहीं है। बताया कि सभी वरिष्ठ नागरिक हैं और कई बीमारियों से ग्रसित भी हैं। लिहाजा मामले में अग्रिम जमानत दी जाए। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अग्रिम जमानत पर छोड़ने का आदेश दे दिया।
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