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Allahabad High Court Order : नाबालिग को उसकी इच्छा के खिलाफ संरक्षण वाले घरों में नहीं रखा जा सकता
Thu, 28 Jul 2022 10:46 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 28 Jul 2022 10:46 PM IST
सार
मामले में पीड़ित की मां ने अपनी लापता बेटी के संबंध में आईपीसी की धारा 363 और 366 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पीड़िता को कासगंज के रेलवे स्टेशन से बरामद किया गया और उसे बाल कल्याण समिति कासगंज के समक्ष पेश किया गया था।
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Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी नाबालिग को उसकी इच्छा के खिलाफ किसी व्यक्ति या संरक्षण वाले घरों में नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने यहां तक कहा कि माता-पिता भी उसकी इच्छा के विरुद्ध हिरासत में रखने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं। जब तक कि इसके लिए कोई अन्य कारण न हो। कोर्ट ने मामले में नाबालिग पीड़िता को उसकी इच्छा पर उसकी मां के संरक्षण में देने का आदेश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने नाबालिग व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
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मामले में पीड़ित की मां ने अपनी लापता बेटी के संबंध में आईपीसी की धारा 363 और 366 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पीड़िता को कासगंज के रेलवे स्टेशन से बरामद किया गया और उसे बाल कल्याण समिति कासगंज के समक्ष पेश किया गया था। उसने अपने बयान में अपनी मां के साथ जाने की इच्छा जाहिर की लेकिन बाल कल्याण समिति कासगंज ने पीड़िता को उसकी मां को देने की बजाय राजकीय बालिका गृह भेज दिया।
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मां ने बाल कल्याण समिति के इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर चुनौती दी उसने कोर्ट से अपनी बेटी को उसके पास देने की मांग की। कोर्ट ने मामले में विचार करते हुए पूर्व के दिए आदेशों पर गौर किया और पाया कि नाबालिग को उसकी इच्छा के विरुद्ध या उसके पिता की इच्छा पर एक सुरक्षात्मक गृह में हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने रचना और अन्य बनाम स्टेट ऑफ यूपी केस का हवाला दिया।
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