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इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी: नेताओं के चुनाव लड़ने का अधिकार आम आदमी की आजीविका जितना ही अहम, सजा पर रोक लगाई
Tue, 20 Oct 2026 06:34 AM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 20 Oct 2026 06:34 AM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राजनेताओं के चुनाव लड़ने का अधिकार आम आदमी की आजीविका के अधिकार से कम नहीं है। दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने से मतदाताओं का हित भी प्रभावित हो सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राजनेताओं के चुनाव लड़ने का अधिकार आम आदमी की आजीविका के अधिकार से कम नहीं है। दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने से मतदाताओं का हित भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अपील पर अंतिम फैसला आने तक अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए ताकि वह स्वतंत्र जीवन जी सके।
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इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने 17 जनवरी 2017 में वाराणसी के चर्चित व्यापारी नेता प्रमोद कुमार निगम हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी। मामले में वाराणसी के ट्रायल कोर्ट ने 15 अप्रैल 2025 को नंदलाल राय को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने तीन पन्नों के आदेश में सुप्रीम कोर्ट के अफजल अंसारी मामले के फैसले का हवाला दिया।
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जनप्रतिनिधियों का अपने क्षेत्र के लोगों के प्रति विशेष दायित्व
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जनप्रतिनिधियों का अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के प्रति विशेष दायित्व होता है। दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने से उनके चुनाव लड़ने का अवसर खत्म हो सकता है। इसी आधार पर अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाना उचित है, ताकि अपील पर अंतिम निर्णय आने तक वह चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित न हो।
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काम का बोझ बताकर रिमांड देने पर सख्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्य फैसले में कहा कि काम के बोझ का हवाला देकर रिमांड मजिस्ट्रेट आननफानन में आरोपी को हिरासत में नहीं भेज सकते। यह न सिर्फ लापरवाही, बल्कि आरोपी के मौलिक अधिकारों का हनन भी है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने साइबर धोखाधड़ी में कुशीनगर निवासी अरविंद पांडे की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया है।