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हाईकोर्ट ने कहा- रिटायर होने वाले कर्मचारी का जन्मतिथि विवाद न सुनना अनुचित 

Wed, 10 Jun 2020 11:57 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 10 Jun 2020 11:57 PM IST
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allahabad high court news: the doors of justice can never be closed
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी की जन्मतिथि को लेकर उत्पन्न विवाद पर सुनवाई न करना अनुचित है। सेवा के अंतिम पड़ाव में जन्मतिथि सुधार की मांग में दाखिल याचिका सुनने से इंकार कर न्याय के दरवाजे बंद नही किए जा सकते हैं।

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कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया है और याची को जन्मतिथि सुधार की मांग उचित फोरम में उठाए की छूट दी है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने बदायूं के रणवीर की विशेष अपील पर दिया है। 

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 याची 25 जनवरी 87 को बेलदार पद पर नियुक्त हुआ था।

नवंबर 2011 में उसकी सेवा नियमित कर दी गई। इसी समय सेवा पंजिका में जन्मतिथि दर्ज की गई। याची का कहना है कि उसकी जन्मतिथि 19 जनवरी 65 है। गलती से सेवा पुस्तिका में 19 जनवरी 60 दर्ज है। जन्मतिथि सुधार की मांग में याचिका दायर की गई है।

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एकलपीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि सेवा के अंतिम दिनों में जन्मतिथि सुधारने का आदेश नहीं दिया जा सकता, जिसे विशेष अपील में चुनौती दी गई थी। याची का कहना था कि सीएमओ बदायूं की रिपोर्ट एवं पैन कार्ड उसके कथन की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने कहा कि याची 2011 में नियमित हुआ है, इसलिए जन्मतिथि को चुनौती देने में देरी नहीं की है। खंडपीठ ने अपील मंजूर कर ली है।

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