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पूर्व सांसद उमाकांत यादव की जमानत मंजूर
Wed, 27 May 2020 07:18 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 27 May 2020 07:18 PM IST
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उमाकांत यादव
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद उमाकांत यादव की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। उमाकांत के खिलाफ जौनपुर के जीआरपी शाहगंज थाने में हत्या, हत्या का प्रयास करने, मारपीट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। इस मुकदमे का विचारण स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए इलाहाबाद में चल रहा है। मुकदमे में हाजिर न होने पर स्पेशल कोर्ट ने उमाकांत की जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद से वह नैनी जेल में बंद हैं।
स्पेशल कोर्ट से जमानत अर्जी नामंजूर होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर जमानत की मांग की थी। 1995 में दर्ज इस मुकदमे में हाईकोर्ट ने उमाकांत को 1997 में जमानत दे दी थी। इसके बाद 23 वर्षों तक वह जमानत पर रहे। इस दौरान मुकदमे में गवाही और साक्ष्य दर्ज हो चुके हैं। अभियुक्त का बयान दर्ज किए जाने के स्तर पर उमाकांत कई तारीखों पर अदालत नहीं पहुंचे, जिस पर कोर्ट ने उनको मिली जमानत रद्द कर दी थी।
13 मार्च 2020 को उनको फिर से जमानत देने की अर्जी खारिज कर दी गई। जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने कहा कि अभियुक्त 23 वर्षों तक जमानत पर रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता है कि मुकदमे का ट्रायल कब पूरा होगा। इन परिस्थितियों में कोर्ट ने जमानत का आधार पाते हुए जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने उन पर जमानत पर रहने के नियमों का पालन करने की शर्त भी लगाई है।
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स्पेशल कोर्ट से जमानत अर्जी नामंजूर होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर जमानत की मांग की थी। 1995 में दर्ज इस मुकदमे में हाईकोर्ट ने उमाकांत को 1997 में जमानत दे दी थी। इसके बाद 23 वर्षों तक वह जमानत पर रहे। इस दौरान मुकदमे में गवाही और साक्ष्य दर्ज हो चुके हैं। अभियुक्त का बयान दर्ज किए जाने के स्तर पर उमाकांत कई तारीखों पर अदालत नहीं पहुंचे, जिस पर कोर्ट ने उनको मिली जमानत रद्द कर दी थी।
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13 मार्च 2020 को उनको फिर से जमानत देने की अर्जी खारिज कर दी गई। जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने कहा कि अभियुक्त 23 वर्षों तक जमानत पर रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता है कि मुकदमे का ट्रायल कब पूरा होगा। इन परिस्थितियों में कोर्ट ने जमानत का आधार पाते हुए जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने उन पर जमानत पर रहने के नियमों का पालन करने की शर्त भी लगाई है।
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