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हाईकोर्ट इलाहाबाद : बेटी को बंदी बनाने की पिता के खिलाफ मां की याचिका खारिज
Mon, 12 Jun 2023 05:33 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 12 Jun 2023 05:33 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मां की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को पिता ने बंदी बनाकर रखा है। मां ने कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर बेटी को पिता के कब्जे से मुक्त कराने की गुहार लगाई थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मां की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को पिता ने बंदी बनाकर रखा है। मां ने कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर बेटी को पिता के कब्जे से मुक्त कराने की गुहार लगाई थी। इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में बच्चों का सर्वोत्तम संरक्षक सिर्फ पारिवारिक न्यायालय ही तय कर सकता है। यह मामला गाजियाबाद का है।
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यह आदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने दिया। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने कहा कि समान अनुतोष के लिए वाद पारिवारिक न्यायालय में लंबित रहने के दौरान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय में पोषणीय नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के विस्तृत विश्लेषण के यह तय नहीं किया जा सकता कि बच्चे का भविष्य किसके हाथ में बेहतर होगा।
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यह तय करना पारिवारिक न्यायालय का क्षेत्राधिकार है। पिता के साथ रह रही नाबालिग बेटी की कस्टडी प्राप्त करने के लिए मां की ओर से पिता के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई थी। याची मां के अधिवक्ता मनीष कुमार त्रिपाठी का कहना था कि मां नाबालिग बेटी की प्राकृतिक संरक्षक है, इसलिए उसे नाबालिग बेटी की कस्टडी प्राप्त करने का अधिकार है।
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अपर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम 1890 के अंतर्गत समान अनुतोष के लिए वाद पारिवारिक न्यायालय के समक्ष लंबित है। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने वैकल्पिक उपचार के अंतर्गत सामान अनुतोष के लिए दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि नाबालिग का संरक्षण उसी के हाथ में दिया जा सकता है जो बच्चे के लिए सर्वोत्तम कल्याणकारी हो। यह तय करने के लिए पारिवारिक न्यायालय का गठन किया गया है।