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यूपी: हाईकोर्ट ने कहा-माथे पर सिंदूर लगाने का मतलब पत्नी के रूप में स्वीकार करना, दुष्कर्म के आरोपी को राहत देने से इनकार

Tue, 14 Sep 2021 10:31 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 14 Sep 2021 10:31 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि आरोपी का पीड़िता के माथे पर सिंदूर लगाना उसे पत्नी के रुप में स्वीकार कर शादी का वायदा करना है। कोर्ट ने कहा कि याची सीमा सड़क संगठन में कनिष्ठ अभियंता है। उसको पारिवारिक परंपरा की जानकारी होनी चाहिए।

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Allahabad High Court denies relief to sexual assault accused
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि माथे पर सिंदूर लगाना महिला को पत्नी के रूप में स्वीकार करना और उससे शादी का वादा करना है। कोर्ट ने कहा कि सिंदूर दान व सप्तपदी का हिंदू धर्म की परंपरा में विवाह के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। 
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कोर्ट ने सिंदूर लगा शादी का वादा कर दुष्कर्म करने के आरोपी के खिलाफ चार्जशीट व सीजेएम शाहजहांपुर द्वारा जारी सम्मन को रद्द करने से इंकार कर दिया है और याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी का पीड़िता के माथे पर सिंदूर लगाना उसे पत्नी के रुप में स्वीकार कर शादी का वायदा करना है।
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कोर्ट ने कहा कि याची सीमा सड़क संगठन में कनिष्ठ अभियंता है। उसको पारिवारिक परंपरा की जानकारी होनी चाहिए। जिसके अनुसार वह पीड़िता से शादी नहीं कर सकता था। फिर भी उसने शारीरिक संबंध बनाए। दुराशय से संबंध बनाए या नहीं, यह विचारण में तय होगा। इसलिए चार्जशीट रद्द नहीं की जा सकती। 
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यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने विपिन कुमार उर्फ विक्की की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि सहमति से यौन संबंध बनाने पर आपराधिक केस नहीं बनता। पीड़िता याची के प्रेम में खुद ही हरदोई से लखनऊ होटल में आई और संबंध बनाए। 

यह प्रथम दृष्टया शादी का प्रस्ताव था। इसे दुराचार नहीं माना जा सकता। किंतु सिंदूर लगाने को कोर्ट ने शादी के वायदे के रुप में देखते हुए राहत देने से इंकार कर दिया। मामले के अनुसार याची और पीड़िता की फेसबुक पर दोस्ती हुई थी। 

दोनों शादी के लिए राजी हुए। पीड़िता होटल में आई और संबंध बनाए। उनके बीच लगातार फ़ोन पर बातचीत और मैसेज होते थे, जिससे साफ है कि पीड़िता से प्रेम संबंध बनाए थे। कोर्ट ने कहा कि भारतीय हिंदू परंपरा में मांग भराई व सप्तपदी महत्वपूर्ण होती है। 

शिकायत कर्ता भी अभियुक्त के परिवार की है। इसलिए उनको यह पता होना चाहिए था कि हिंदू परंपरा में ऐसे संबंधों में शादी नहीं कर सकते थे। सिंदूर लगाने का तात्पर्य है कि पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया है। ऐसे में चार्जशीट रद्द नहीं की जा सकती।
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