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इलाहाबाद बैंक के विलय पर मचा घमासान!
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 22 Jul 2017 01:53 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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छोटे तथा घाटे में चल रहे बैंकों के विलय की नीति से इलाहाबाद बैंक का अस्तित्व खतरे में पड़ता दिख रहा है। हालांकि अभी इसकी कहीं से पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इलाहाबाद बैंक को पीएनबी में शामिल कराने की बात कही जा रही है। अलग-अलग एजेंसियों और रिपोर्ट में इसके संकेत मिलने के बाद बैंककर्मियों में घमासान मचा हुआ है और इसके विरोध में उन्हाेंने आंदोलन की रणनीति बनाई है। यदि ऐसा हुआ तो इलाहाबाद बैंक इतिहास बनकर रह जाएगा।
विदेशी बैंकों को देश में आने की छूट मिलने के बाद से ही सरकार की ओर से छोटे बैंकों का विलय का दबाव बनाया जा रहा है। सहयोगी बैंकों का एसबीआई में विलय हो चुका है। बैंकिंग कोर ब्यूरो तथा सरकार की ओर से गठित समिति की संस्तुति पर अब छोटे तथा तथा घाटे में चल रहे अन्य राष्ट्रीकृत बैंकों के मर्जर की भी तैयारी है। एनपीए और कम पूंजी को आधार बनाते हुए केंद्र सरकार बैंकों को दी जाने वाली राशि में कटौती करने जा रही है। इसके अलावा सरकार की ओर से बैंककर्मियों के वेतन तथा अन्य सुविधाओं में कटौती का प्रस्ताव भी रखा गया है। सरकार के इस कदम को बैंकों के मर्जर की तैयारी के रूप में ही देखा जा रहा है। हालांकि, यूनियनों ने सरकार के इस फैसले का तीखा विरोध किया है। घाटे से निकालने तथा वित्तीय सुधार के लिए आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कांफ्रेडेरेशन की ओर से एक प्लान तैयार कर बैंक संघ को भी उपलब्ध कराया गया है लेकिन सरकार इसे मानने के लिए तैयार नहीं है।
हालांकि कहीं से इसकी पुष्टि नहीं होने की वजह से अफसर इस बारे में कुछ बोलने से मना कर रहे हैं लेकिन उनका यह जरूर कहना है कि सरकार ने बैंकों के विलय की तैयारी शुरू कर दी है। उनके अनुसार विलय किए जाने वाले बैंकों की सूची को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। पीएनबी, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन, बैंक ऑफ इंडिया समेत कुछ बड़े बैंक ही बचेंगे। अफसरों के अनुसार इलाहाबाद के अलावा इंडियन बैंक, कारपोरेशन बैंक तथा ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को शामिल किया जाएगा। इस तरह की रिपोर्ट अलग-अलग फोरम पर आने के बाद तथा अन्य मुद्दों को लेकर बैंक कर्मियों ने विरोध शुरू कर दिया है। एक बड़े आंदोलन की भी तैयारी है।
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‘इलाहाबाद बैंक के विलय की बात गलत है। किसी फोरम पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है लेकिन ऐसा हुआ तो हर स्तर पर इसका विरोध किया जाएगा। शहरियों से भी इसमें सहयोग की अपील की जाएगी।’
मदनजी उपाध्याय, इंप्लाइज कोऑर्डिनेशन कमेटी के राष्ट्रीय उप महामंत्री
बैंकों के विलय के किसी प्रस्ताव तथा अन्य मुद्दों को लेकर यूनियनों की तरफ से 22 अगस्त को हड़ताल की घोषणा की गई है। यूनाइटेड फोरम की ओर से घोषित इस आंदोलन में एसबीआई समेत अन्य सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के ऑफिसर्स तथा इंम्लाइज यूनियन शामिल होंगे। पीएनबी ऑफिसर्स एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष अश्वनी तिवारी का कहना है कि बैंकों को घाटे से निकालने के लिए आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कांफ्रेंडेरेशन की ओर से प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इसमें उद्योग घरानों पर बकाया लोन तथा एनपीए की वसूली के लिए प्रभावी प्रावधान किए जाने का प्रस्ताव भी शामिल है लेकिन सरकार इसे नहीं मान रही। इसके विरोध में आंदोलन की रणनीति बनाई गई है। 19 जुलाई 1969 को बैंकों को राष्ट्रीयकृत किया गया था। इसके मद्देनजर 19 जुलाई से भी विरोध की शुरुआत हो चुकी है। उन्हाेंने बताया कि हर सप्ताह अलग-अलग बैंकों के सामने धरना-प्रदर्शन की घोषणा की गई। हड़ताल से एक दिन पहले 21 अगस्त को दिन भर धरना दिया जाएगा। फिर अगले दिन सभी बैंक शाखाओं में तालाबंदी की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके बाद 15 सितंबर को दिल्ली में जंतर-मंतर पर सभा की घोषणा की गई है। देश भर से जुटे अफसर और कर्मचारी वहां से संसद तक मार्च निकालेंगे।
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विदेशी बैंकों को देश में आने की छूट मिलने के बाद से ही सरकार की ओर से छोटे बैंकों का विलय का दबाव बनाया जा रहा है। सहयोगी बैंकों का एसबीआई में विलय हो चुका है। बैंकिंग कोर ब्यूरो तथा सरकार की ओर से गठित समिति की संस्तुति पर अब छोटे तथा तथा घाटे में चल रहे अन्य राष्ट्रीकृत बैंकों के मर्जर की भी तैयारी है। एनपीए और कम पूंजी को आधार बनाते हुए केंद्र सरकार बैंकों को दी जाने वाली राशि में कटौती करने जा रही है। इसके अलावा सरकार की ओर से बैंककर्मियों के वेतन तथा अन्य सुविधाओं में कटौती का प्रस्ताव भी रखा गया है। सरकार के इस कदम को बैंकों के मर्जर की तैयारी के रूप में ही देखा जा रहा है। हालांकि, यूनियनों ने सरकार के इस फैसले का तीखा विरोध किया है। घाटे से निकालने तथा वित्तीय सुधार के लिए आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कांफ्रेडेरेशन की ओर से एक प्लान तैयार कर बैंक संघ को भी उपलब्ध कराया गया है लेकिन सरकार इसे मानने के लिए तैयार नहीं है।
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हालांकि कहीं से इसकी पुष्टि नहीं होने की वजह से अफसर इस बारे में कुछ बोलने से मना कर रहे हैं लेकिन उनका यह जरूर कहना है कि सरकार ने बैंकों के विलय की तैयारी शुरू कर दी है। उनके अनुसार विलय किए जाने वाले बैंकों की सूची को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। पीएनबी, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन, बैंक ऑफ इंडिया समेत कुछ बड़े बैंक ही बचेंगे। अफसरों के अनुसार इलाहाबाद के अलावा इंडियन बैंक, कारपोरेशन बैंक तथा ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को शामिल किया जाएगा। इस तरह की रिपोर्ट अलग-अलग फोरम पर आने के बाद तथा अन्य मुद्दों को लेकर बैंक कर्मियों ने विरोध शुरू कर दिया है। एक बड़े आंदोलन की भी तैयारी है।
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‘इलाहाबाद बैंक के विलय की बात गलत है। किसी फोरम पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है लेकिन ऐसा हुआ तो हर स्तर पर इसका विरोध किया जाएगा। शहरियों से भी इसमें सहयोग की अपील की जाएगी।’
मदनजी उपाध्याय, इंप्लाइज कोऑर्डिनेशन कमेटी के राष्ट्रीय उप महामंत्री
बैंकों के विलय के किसी प्रस्ताव तथा अन्य मुद्दों को लेकर यूनियनों की तरफ से 22 अगस्त को हड़ताल की घोषणा की गई है। यूनाइटेड फोरम की ओर से घोषित इस आंदोलन में एसबीआई समेत अन्य सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के ऑफिसर्स तथा इंम्लाइज यूनियन शामिल होंगे। पीएनबी ऑफिसर्स एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष अश्वनी तिवारी का कहना है कि बैंकों को घाटे से निकालने के लिए आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कांफ्रेंडेरेशन की ओर से प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इसमें उद्योग घरानों पर बकाया लोन तथा एनपीए की वसूली के लिए प्रभावी प्रावधान किए जाने का प्रस्ताव भी शामिल है लेकिन सरकार इसे नहीं मान रही। इसके विरोध में आंदोलन की रणनीति बनाई गई है। 19 जुलाई 1969 को बैंकों को राष्ट्रीयकृत किया गया था। इसके मद्देनजर 19 जुलाई से भी विरोध की शुरुआत हो चुकी है। उन्हाेंने बताया कि हर सप्ताह अलग-अलग बैंकों के सामने धरना-प्रदर्शन की घोषणा की गई। हड़ताल से एक दिन पहले 21 अगस्त को दिन भर धरना दिया जाएगा। फिर अगले दिन सभी बैंक शाखाओं में तालाबंदी की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके बाद 15 सितंबर को दिल्ली में जंतर-मंतर पर सभा की घोषणा की गई है। देश भर से जुटे अफसर और कर्मचारी वहां से संसद तक मार्च निकालेंगे।