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अविरल निर्मल गंगा के बगैर सारी व्यवस्थाएं शून्य: शंकराचार्य स्वरूपानंद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 15 Jan 2018 01:14 AM IST
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शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती
- फोटो : pti
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मकर संक्रांति स्नान पर्व पर निर्मल गंगा जल न होने को सरकार की नाकामी बताया है। मनकामेश्वर मंदिर में प्रवास कर रहे शंकराचार्य ने रविवार को एक बार फिर केंद्र और प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया। कहा, माघ मेले के लिए सरकार की सारी व्यवस्थाएं अविरल, निर्मल गंगा जल के बगैर शून्य हैं। कहा, तीर्थराज प्रयाग में सनातन से गंगा स्नान करने को संत महात्मा और श्रद्धालु गंगा-यमुना एवं अदृश्य त्रिवेणी के संगम पर आते रहे हैं। उनके लिए एकमात्र आकर्षण का केंद्र मां गंगा का सानिध्य रहा है। ऐसी भावना लेकर आज भी सनातनी आ रहे हैं। लेकिन उन्हें गंगा जल के बजाए शहर के मलजल युक्त जल में डुबकी लगानी पड़ रही है। शासन प्रशासन लोगों की भावनाओं को दरकिनार कर अपनी पीठ थपथपा रहा है। उन्होंने स्परूट कहा कि माघ मेला, मेला नहीं है। यह गंगास्नान का महापर्व है। केंद्र और राज्य सरकार का
सबसे बड़ा दायित्व गंगा-यमुना की पवित्र अविरल निर्मल धारा उपलब्ध कराना है। यदि गंगा-यमुना में प्रदूषण है, जल में कीड़े और काला जल है तो प्रश्न उठाता है कि फिर क्या तैयारी की गई। अंग्रेजों के जमाने में कोई संक्रामक रोग न हो जाए टीके की व्यवस्था थी। अपनी सरकार है फिर भी गंगा स्नान के लिए आए लाखों लोग सीवर और कई खतरनाक केमिकल मिले जल में डुबकी लगा रहे हैं।
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सबसे बड़ा दायित्व गंगा-यमुना की पवित्र अविरल निर्मल धारा उपलब्ध कराना है। यदि गंगा-यमुना में प्रदूषण है, जल में कीड़े और काला जल है तो प्रश्न उठाता है कि फिर क्या तैयारी की गई। अंग्रेजों के जमाने में कोई संक्रामक रोग न हो जाए टीके की व्यवस्था थी। अपनी सरकार है फिर भी गंगा स्नान के लिए आए लाखों लोग सीवर और कई खतरनाक केमिकल मिले जल में डुबकी लगा रहे हैं।
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