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एएमयू मामलाः एक माह में जांच पूरी करे मानवाधिकार आयोग

Tue, 07 Jan 2020 11:33 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jan 2020 11:33 PM IST
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Aligarh muslim University caa protest case
हाईकोर्ट ने एसआईटी को जांच सौंपने से किया इंकार
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई की जांच कर रहे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने घटना की जांच एसआईटी को देने से इंकार करते हुए कहा कि मानवाधिकार आयोग पहले से ही मामले की जांच कर रहा है। याचिका की सुनवाई 17 फरवरी को होगी। एएमयू के पूर्व छात्र मोहम्मद अमन खान की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
याचिका में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की हाईकोर्ट के जज या एसआईटी से कराने की मांग की गई थी। कहा गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस और आरएएफ के जवानों ने बर्बर बर्ताव किया। याचिका में गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने, उन पर मुकदमा उठाने, घायल छात्रों का इलाज कराने, मुआवजा दिए जाने, दोषी पुलिसकर्मियों को दंडित करने सहित तमाम मांगे की गई हैं। प्रदेश सरकार अधिवक्ता ने बताया कि याचिका में लगाए गए आरोप झूठे हैं। आईजी और एसएसपी की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुरोध पर पुलिस परिसर में गई थी। आंदोलनकारियों ने धारा 144 का उल्लंघन किया। सार्वजनिक संपत्ति को क्षति से बचाने के लिए निरोधात्मक कार्रवाई की गई। 26 लोगों को हिंसा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कानून के मुताबिक कार्रवाई की है। इस हिंसा में कई छात्र घायल हो गए हैं।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि जामिया विश्वविद्यालय दिल्ली में इसी प्रकार की घटना हुई थी, जिसमें छात्रों की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग जांच कर रहा है। आयोग इस प्रकार की सभी घटनाओं की जांच कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि आयोग जांच कर रहा है ऐसे इस मामले की जांच एसआईटी को देने का कोई औचित्य नहीं है। आयोग पूरे घटनाक्रम की जांच करे। कोर्ट ने महानिबंधक से कहा है कि नौ जनवरी तक याचिका की छाया प्रति आयोग को उपलब्ध कराएं। और आयोग अपनी संस्तुति या जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। याचिका की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
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दोषी पुलिस वालों को मिले सजा: गोंसाल्विस
प्रयागराज। याचिका पर सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंसाल्विस ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि छात्रों और आंदोलनकारियों पर पुलिस ने ज्यादती की है। पुलिस का काम गैरकानूनी है मगर आज तक एक भी पुलिसकर्मी या अधिकारी के खिलाफ मुकदमा कायम नहीं हुआ है। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज कर उनको दंडित किया जाए।
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