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Air Pollution : धूल के गुब्बार ने बिगाड़ी शहर की आबो-हवा, 24वें स्थान पर फिसला प्रयागराज

Sun, 08 Sep 2024 05:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 08 Sep 2024 05:35 PM IST
सार

केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से 2022 में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की शुरुआत की गई थी। इसके तहत ठोस कचरा के निस्तारण, सड़क पर धूल, निर्माण कार्यों की वजह से उड़ने वाली धूल समेत आठ मानकों पर निकायों को परखा गया। यह सर्वेक्षण हर साल एक अप्रैल से 31 मार्च के बीच किया गया।

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Air Pollution: Clouds of dust spoiled the air of the city, Prayagraj slipped to 24th place.
प्रयागराज एयर क्वालिटी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

निर्माण कार्यों के लिए हो रही खोदाई से निकले धूल के गुब्बार ने शहर की आबो-हवा को बिगाड़ दी है। इस धूल को समेटने में ही नगर निगम ने करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर दिए लेकिन सुधार नहीं हुआ। इसका नतीजा है कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में प्रयागराज 24वें पायदान पर फिसल गया है। जबकि, 2022 में दूसरा स्थान था।

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केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से 2022 में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की शुरुआत की गई थी। इसके तहत ठोस कचरा के निस्तारण, सड़क पर धूल, निर्माण कार्यों की वजह से उड़ने वाली धूल समेत आठ मानकों पर निकायों को परखा गया। यह सर्वेक्षण हर साल एक अप्रैल से 31 मार्च के बीच किया गया।
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इस साल सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के कुल 47 शहरों को शामिल किया गया। मंत्रालय की ओर से इंटरनेशनल डे क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काइज के मौके पर शनिवार को सर्वेक्षण-2024 का परिणाम घोषित किया गया। इसमें प्रयागराज को 24वां स्थान मिला है। प्रथम तीन शहरों में गुजरात का सूरत, मध्य प्रदेश का जबलपुर एवं उत्तर प्रदेश का आगरा शामिल हैं। पिछले वर्ष भी प्रयागराज प्रथम तीन में स्थान नहीं बना पाया था लेकिन 2022 में संगम नगरी को पूरे देश में दूसरा स्थान मिला था। इस तरह से प्रयागराज दो साल में 22 स्थान नीचे फिसल गया।

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इस स्थिति के लिए धूल को प्रमुख कारण माना जा रहा है। महाकुंभ-2025 के मद्देनजर पूरे शहर में तेजी से निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। कई फ्लाईओवर का दो साल से निर्माण शुरू है। इसकी वजह से पूरे शहर में सड़कों की खोदाई कर दी गई है। इससे पूरा शहर महीनों से धूल की परत से ढका हुआ है।

इसके अलावा कई नालों का पानी अब भी सीधे नदियों में गिर रहा है तो जगह-जगह कूड़ों का भी ढेर भी लगा रहता है। सड़क चौड़ीकरण एवं नालियों के निर्माण कार्य की वजह से शहर के बड़े हिस्से में जल निकासी की भी व्यवस्था नहीं है और गंदे पानी का बदबू हवा में घुल रहा है। रैंकिंग में पिछड़ने की इन्हें मुख्य वजह माना जा रहा है।

धूल दबाने के लिए हैं 14 वाहन लेकिन सुधार नहीं

धूल से राहत के लिए नगर निगम के पास 14 वाहन हैं। इनमें से सात वाहनों से तो पानी का छिड़काव किया जाता है। वहीं अन्य सात से सड़क की धूल साफ की जाती है। बारिश के दिनों को छोड़कर इन वाहनों के चलाने पर रोजाना 410 लीटर डीजल खर्च किया जाता है। निगम के एक अफसर के अनुसार साल में 250 से अधिक दिन सभी वाहन चलाए जाते हैं। इस तरह से सिर्फ डीजल पर ही एक करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं लेकिन वायु प्रदूषण में बहुत सुधार नहीं है।
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निर्माण संस्थाओं को लगातार दिया गया नोटिस

शर्तों के अनुसार निर्माण वाले स्थानों को कवर किया जाना चाहिए। ताकि, धूल फैलने न पाए। इसके अलावा नियमित तौर पर पानी के छिड़काव का भी प्रावधान है लेकिन किसी भी निर्माण एजेंसी ने इन शर्तों का पालन नहीं किया। एक-दो स्थानों को छोड़कर कहीं भी निर्माण वाले स्थानों को कवर नहीं किया गया है। जगह-जगह सड़कें खोदकर भी छोड़ दी गई हैं, जिनसे धूल उड़ते रहते हैं। इसे लेकर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय के अलावा नगर निगम की ओर से भी निर्माण कराने वाली संस्थाओं को कई बार नोटिस भेजा गया लेकिन यह खानापूर्ति ही साबित हुई। वायु सर्वेक्षण के लिए आई टीम तथा एनजीटी की ओर से भी इसे लेकर हिदायत दी गई थी लेकिन नोटिस जारी करने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई।

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में योगदान के लिए 80 अफसर सम्मानित

एक तरफ स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में प्रयागराज दूसरे से 24 स्थान पर फिसल गया है। वहीं दूसरी तरह वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में विशेष योगदान के लिए नगर निगम के अफसरों को सम्मानित किया गया। इंटरनेशनल क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काइज के मौके पर शनिवार को नगर निगम मुख्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण अभियंता उत्तम वर्मा समेत 80 अफसरों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर वायु को स्वच्छ रखने की शपथ दिलाई गई। साथ ही हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। कार्यक्रम में अपर नगर आयुक्त अम्बरीश कुमार बिंद, नगर स्वास्थ्य अधिकारी महेश, जोनल अधिकारी संजय ममगई, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के शाहिद सिराज, वीर सिंह यादव आदि मौजूद रहे।

पूरे शहर में महाकुंभ के कार्य कराए जा रहे हैं। सेतुओं के काम दो वर्ष से हो रहे हैं। वायु प्रदूषण की गुणवत्ता की जांच के लिए नगर निगम मुख्यालय के अलावा मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान तथा झूंसी में उपकरण लगाए गए हैं। इन तीनों स्थानों के आसपास कई बड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं। इसकी वजह से पिछले दो वर्षों से स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में प्रयागराज का स्थान नीचे चला गया है। महाकुंभ के काम खत्म होने के बाद इसमें सुधार दिखेगा। - चंद्र मोहन गर्ग, नगर आयुक्त

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