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एआई से मजबूत होगी इमारतें, पुल और सड़कें : प्रो. एमएम गोरे
Fri, 16 Oct 2026 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Fri, 16 Oct 2026 02:20 AM IST
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एमएनएनआईटी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सेमिनार में बोलते प्रो. पोक। अमर उजाला
- फोटो : विभाग
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में बृहस्पतिवार को तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। यह सम्मेलन स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग सोसाइटी (एसएचएमएस) के तहत आयोजित किया गया।
चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और वास्तविक समय निगरानी तकनीकों का उपयोग शामिल था। इंडियन स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. एमएम गोरे ने कहा कि ये तकनीकें संरचनाओं की निगरानी में सहायक हैं। एआई से इमारतें, पुल और सड़कें मजबूत होंगी।
ये संभावित क्षति की पहचान और समय पर रखरखाव संबंधी निर्णय लेने में महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण कोरिया के चोननाम नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रो. ग्यूहे पार्क ने भारतीय अवसंरचना क्षेत्र में संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी की उपयोगिता पर विचार रखे। एमएनएनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष प्रो. एनआर रावत ने बताया कि यह आधुनिक अवसंरचनाओं की स्थिति का आकलन करती है।
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यह संभावित क्षति की पहचान कर समय पर रखरखाव सुनिश्चित करने में सहायक है। आईआईटी दिल्ली के प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने वर्तमान अनुप्रयोगों, भविष्य की संभावनाओं और शोध के नए अवसरों पर चर्चा की। आयोजन सचिव प्रो. रमा शंकर, डॉ. वरुण सिंह, डॉ. भारत राजन और डॉ. सेहल के भी इस मौके पर उपस्थित थे।
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चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और वास्तविक समय निगरानी तकनीकों का उपयोग शामिल था। इंडियन स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. एमएम गोरे ने कहा कि ये तकनीकें संरचनाओं की निगरानी में सहायक हैं। एआई से इमारतें, पुल और सड़कें मजबूत होंगी।
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ये संभावित क्षति की पहचान और समय पर रखरखाव संबंधी निर्णय लेने में महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण कोरिया के चोननाम नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रो. ग्यूहे पार्क ने भारतीय अवसंरचना क्षेत्र में संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी की उपयोगिता पर विचार रखे। एमएनएनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष प्रो. एनआर रावत ने बताया कि यह आधुनिक अवसंरचनाओं की स्थिति का आकलन करती है।
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यह संभावित क्षति की पहचान कर समय पर रखरखाव सुनिश्चित करने में सहायक है। आईआईटी दिल्ली के प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने वर्तमान अनुप्रयोगों, भविष्य की संभावनाओं और शोध के नए अवसरों पर चर्चा की। आयोजन सचिव प्रो. रमा शंकर, डॉ. वरुण सिंह, डॉ. भारत राजन और डॉ. सेहल के भी इस मौके पर उपस्थित थे।