महाशिवरात्रि : बैंडबाजा के साथ अस्त्र-शस्त्र लेकर निकले जय शिव सैनिक, शिव तांडव नृत्य बना आकर्षण का केंद्र
महाकाली के अलावा शिव तांडव नृत्य की प्रस्तुतियां रास्ते भर होती रहीं। घंटा-घडिय़ाल के साथ अस्त्र-शस्त्र लेकर श्रद्धालु इस शोभायात्रा में चल रहे थे। डीजे बैंड, पाइप बैंड के साथ जय शिव का जयकारा लगाते हुए लोग नाचते गाते रहे।
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त्रिशूल भगवान की दर्शन शोभायात्रा में शुक्रवार को हिंदू सनातन संस्कृति की मजबूती के लिए एकजुट होने का के साथ ही सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया। रथारूढ़ त्रिशूल की सविधि पूजा-आरती की गई। यह 37वीं शोभायात्रा जय शिवसेना की ओर से निकाली गई। इस दौरान हिंदू राष्ट्र की स्थापना के स्वरूप को और मजबूत करने का संदेश दिया गया। इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी ने कहा कि त्रिशूल भगवान के माध्यम से जय शिव सेना ने सामाजिक समरसता के अभियान को आगे बढ़ाया है।
इस त्रिशूल दर्शन शोभायात्रा में दर्जनों रथों पर सुसज्जित भव्य झांकियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। इसमें देवी देवताओं के विभिन्न स्वरूपों की साज सज्जा के साथ त्रिशूल भगवान की प्रतिमाएं सजाई गई थी। इस शोभायात्रा में महाकाली के अलावा शिव तांडव नृत्य की प्रस्तुतियां रास्ते भर होती रहीं। घंटा-घडिय़ाल के साथ अस्त्र-शस्त्र लेकर श्रद्धालु इस शोभायात्रा में चल रहे थे। डीजे बैंड, पाइप बैंड के साथ जय शिव का जयकारा लगाते हुए लोग नाचते गाते रहे।
जयशिव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. ओंकार नाथ त्रिपाठी, दिगंबर त्रिपाठी, विशाल साहनी के नेतृत्व में त्रिशूल शोभायात्रा करेली, सदियापुर, हर्षवर्धन नगर, मीरापुर, अतरसुइया होते हुए बाबा दरवेश्वर नाथ की पूजा आरती के बाद नखास कोहना पहुंची। वहां मुट्ठीगंज और गढ़ीकला की यात्राएं भी शामिल हो गईं। इसके बाद हिम्मतगंज होते हुए खुल्दाबाद गुरुद्वारा, गाड़ीवान टोला, स्टेशन रोड होते हुए जानसेनगंज, घंटाघर, लोकनाथ, राम भवन, मुट्ठीगंज, आर्यकन्या इंटर कॉलेज, चंद्रलोक चौराहा, जीरोरोड, घंटाघर, कोतवाली के कोतवालेश्वर बाबा मंदिर में पहुंच कर सविधि आराधना की गई। इसके बाद कल्याणी देवी मंदिर में त्रिशूल भगवान की पूजा की गई। इस दौरान तरह-तरह की झांकियों के साथ घोड़े और ध्वजा-पताकाओं से शोभायात्रा की भव्यता देखते बन रही थी।
संगम की रेती पर सुमेरुपीठ के शिविर से ऊंट-घोड़ों से निकली शिव बरात
शिवरात्रि पर शुक्रवार को काशी सुमेरु पीठ के दंडी संन्यासी जगदगुरु स्वामी नरेंद्रनंद सरस्वती के माघ मेला शिविर से निकाली गई भव्य शिव बरात में सैकड़ों संतों-भक्तों ने हिस्सा लिया। सुसज्जित रथों, ऊंट-घोड़ों पर सवार होकर निकले संतों ने राष्ट्र के मंगल और समाज की समृद्धि की कामना की। त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर से दर्जनों ऊंट, घोड़े और रथों पर बैंड बाजा, डीजे के साथ शिव बारात निकाली गई। बारात के आगे भगवान शिव के गण नृत्य करते हुए चल रहे थे।
शिव बारात शिविर से निकलकर लेटे हनुमान मंदिर में दर्शन -पूजन के बाद वापस शिविर में आई । इस अवसर पर स्वामी नरेंद्रानंद ने बताया कि बिंदु शक्ति है और नाद शिव। यही सबका आधार है । उन्होंने भक्तों को महाशिवरात्रि की बधाई दी। इस मौके पर जूना अखाड़ा मौजगिरि आश्रम के व्यवस्थापक स्वामी हरि शंकर गिरि, स्वामी करुणानंद सरस्वती, स्वामी बृजभूषणानंद, अखिलेश राय, शशांक धर द्विवेदी, शीतला प्रसाद मिश्र, डॉ. योगेश नारायण मिश्र, दयाराम पांडेय उपस्थित थे।