फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Ahmed's bail rejected in Shuats case

शुआट्स मामले में अतीक अहमद की जमानत नामंजूर

Tue, 30 May 2017 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 30 May 2017 01:59 AM IST
विज्ञापन
Ahmed's bail rejected in Shuats case
अतीक अहमद (फाइल फोटो)
नैनी स्थित शुआट्स परिसर में तोड़फोड़ और मारपीट के आरोप में पूर्व सांसद अतीक अहमद को हाईकोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिल सकी है। कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी रद्द करते हुए पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के सख्त निर्देशों के बावजूद जांच में गंभीर लापरवाही की गई और मुकदमे में से लूट की धारा (395) को बिना ठीक तरीके से जांच किए हटा दिया गया। कोर्ट ने कहा कि जो तथ्य मौजूद हैं, उससे इस धारा में केस चलाने का पर्याप्त आधार है।
विज्ञापन

 जांच अधिकारी ने केस को कमजोर (डायल्यूट) किया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अतीक पर आपराधिक अतिचार (441 आईपीसी)(किसी दूसरे की कब्जे वाली संपत्ति में अपराध करने के इरादे से प्रवेश करना) का मुकदमा भी दर्ज होना चाहिए था। अतीक की जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति प्रत्यूष कुमार ने सुनवाई की।
विज्ञापन


प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कांत और विमलेंदु त्रिपाठी ने जमानत का जबरदस्त विरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि अतीक  के खिलाफ 239 आपराधिक मामले दर्ज हैं। अभियुक्त का लंबा आपराधिक इतिहास है। शुआट्स परिसर में उन्होंने असलहाधारियों के साथ जाकर वहां के कर्मचारियों को मारापीटा जिससे एक शैक्षणिक परिसर में दहशत का माहौल कायम हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अतीक पर दर्ज राजूपाल हत्याकांड में उनको मिली जमानत निरस्त करने की पूजा पाल की अर्जी पर भी कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। पूजा पाल की अर्जी पर न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा ने सुनवाई की। अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि राजूपाल हत्याकांड की जांच सीबीआई कर रही है। अतीक ने गवाहों को डराने धमकाने के लिए दो गवाहों का अपहरण कर लिया था। उन पर गवाही से मुकरने के लिए दबाव डाला गया। अतीक ने जमानत शर्तों का उल्लंघन किया है इसलिए उनकी जमानत निरस्त की जानी चाहिए। अतीक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी और दयाशंकर मिश्र, रवींद्र शर्मा आदि ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर कहा गया कि 2005 में जमानत मिलने के बाद अतीक पर कोई केस दर्ज नहीं हुआ। 2005 में तीन मुकदमे दर्ज हुए, जिसमें से तीन में वह बरी हो चुके हैं। दो केस में पीड़ितों ने जमानत निरस्त करने की अर्जी दी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। बसपा सरकार के शासनकाल में उनको रंजिशन फंसाया गया। इस मामले में 11 साल बाद जमानत रद्द करने की अर्जी दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed