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मेले के बाद फिर ‘मैली’ हो गई गंगा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 02 Mar 2017 02:18 AM IST
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कानपुर में गंगा की ये है हालत
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कानपुर ही नहीं इलाहाबाद में भी गंगा की स्थिति बेहद खराब है। संगम की रेती पर माघ मेला खत्म होने के साथ ही एक बार फिर गंगा ‘मैली’ हो गई। सलोरी से लेकर दारागंज तक गंगा के जल में एक बार फिर कालापन दिखा तो गंगा का जल पहले की अपेक्षा अधिक प्रदूषणयुक्त और दुर्गंधयुक्त नजर आने लगा। श्रद्धालुओं ने आस्था की चादर उतारकर डुबकी लगाई तो गंगा की ताजा स्थिति सामने आ गई। बुधवार को दारागंज घाट पर गंगाजल के दुर्गंधयुक्त और कालेपन को लेकर चर्चा बनी रही। कम जल होने से संगम पर भी इसका असर दिखा। नियमित रूप से गंगा स्नान करने वालों सहित गंगा-संगम में डुबकी लगाने आए श्रद्धालुओं तक को गंगा में उभरी गंदगी साफ दिखी तो कई आचमन से भी कतराए।
दरअसल माघ मेले के दौरान संगम की रेती के सजने और आस्था का बिगुल बजने के साथ ही जब संतों ने गंगा मैली की हुंकार भरी तो नालों के टेप करने सहित नरौरा से भी पानी छोड़ा गया। इसके चलते गंगा का तेज प्रवाह, गंदगी को बहा ले गया और कालापन, दुर्गंध, प्रदूषण का असर बेमानी सा दिखने लगा लेकिन मेला खत्म होते ही स्थिति उलट गई। गंगा में नियमित डुबकी लगाने वालों के दावे के मुताबिक नरौरा से पानी आना बंद हुआ तो मेले के दौरान जिन नालों को टेप किया गया था, मेले के बाद धीरे से उनका मुंह खोल दिया गया। इसकी वजह से गंगा का प्रदूषण सतह पर आ गया।
दरअसल बमरौली, द्रौपदी घाट, नेवादा, गंगा नगर, ऊंचवागढ़ी, बेली गांव, मेहंदौरी, शिवकुटी, गोविंदपुर, सलोरी, बघाड़ा, दारागंज के छोटे-बड़ेे करीब दो दर्जन नालों का पानी बेरोकटोक गंगा में मिलता है। इस क्षेत्र में पोंगहट, मेहंदौरी और बक्शी बांध-दारागंज, तीन एसटीपी भी हैं लेकिन ये पूरी तरह काम नहीं कर रहे। ऐसे में इनका जल रात में जब तब गंगा में छोड़ दिया जाता है जिससे गंगा जल काला और दुर्गंधयुक्त होता है, अबकी बार भी यही हुआ।
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दरअसल माघ मेले के दौरान संगम की रेती के सजने और आस्था का बिगुल बजने के साथ ही जब संतों ने गंगा मैली की हुंकार भरी तो नालों के टेप करने सहित नरौरा से भी पानी छोड़ा गया। इसके चलते गंगा का तेज प्रवाह, गंदगी को बहा ले गया और कालापन, दुर्गंध, प्रदूषण का असर बेमानी सा दिखने लगा लेकिन मेला खत्म होते ही स्थिति उलट गई। गंगा में नियमित डुबकी लगाने वालों के दावे के मुताबिक नरौरा से पानी आना बंद हुआ तो मेले के दौरान जिन नालों को टेप किया गया था, मेले के बाद धीरे से उनका मुंह खोल दिया गया। इसकी वजह से गंगा का प्रदूषण सतह पर आ गया।
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दरअसल बमरौली, द्रौपदी घाट, नेवादा, गंगा नगर, ऊंचवागढ़ी, बेली गांव, मेहंदौरी, शिवकुटी, गोविंदपुर, सलोरी, बघाड़ा, दारागंज के छोटे-बड़ेे करीब दो दर्जन नालों का पानी बेरोकटोक गंगा में मिलता है। इस क्षेत्र में पोंगहट, मेहंदौरी और बक्शी बांध-दारागंज, तीन एसटीपी भी हैं लेकिन ये पूरी तरह काम नहीं कर रहे। ऐसे में इनका जल रात में जब तब गंगा में छोड़ दिया जाता है जिससे गंगा जल काला और दुर्गंधयुक्त होता है, अबकी बार भी यही हुआ।
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