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आखिर पूर्व सांसद अतीक के प्रति इतनी नर्मी क्यों!

Sun, 14 Apr 2019 12:30 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 14 Apr 2019 12:30 AM IST
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After all, why so humble towards the former MP Atik!
अतीक अहमद - फोटो : self
पूर्व बाहुबली सांसद अतीक अहमद को बरेली से नैनी जेल लाने की कवायद पर सियासी पंडितों के कान खड़े हो गए हैं। जेल में भी दबंगई की शिकायतों के बावजूद शासन की ओर से निर्वाचन आयोग से इसके लिए अनुमति मांगे जाने पर सवाल उठने लगे हैं तो लोकसभा चुनाव के बीच अतीक के प्रति इस नर्मी के सियासी निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। अतीक की मुस्लिम मतदाताओं में आज भी मजबूत पकड़ मानी जाती है। पिछले वर्ष फूलपुर के लिए हुए उपचुनाव में अतीक का असर भी दिखा था। ऐसे में इसे प्रशासनिक निर्णय के बजाय लोकसभा चुनाव में मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण को रोकने के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि इससे उनके चुनाव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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लोकसभा चुनाव में मतों के ध्रुवीकरण की सियासत शीर्ष पर है। इसमें नेताओं के बोल भी बिगड़ गए हैं। चूंकि अतीक मुस्लिम बहुल शहर पश्चिमी से पांच बार विधायक रहे हैं। इसके अलावा भाई अशरफ भी विधायक रहे। अतीक फूलपुर से सांसद भी रहे। उन्होंने पिछले साल फूलपुर से उपचुनाव भी लड़ा था। अतीक के प्रभाव को इससे भी समझा जा सकता है कि जेल में होने के बावजूद अतीक को उपचुनाव में 48094 मत मिले थे और वह तीसरे स्थान पर रहे। इसमें भी अकेले शहर पश्चिमी विधानसभा में अतीक को 28820 वोट मिले थे। इसका नतीजा रहा कि सपा उम्मीदवार नागेंद्र सिंह पटेल को सबसे कम 33354 वोट पश्चिमी विधानसभा में ही मिले थे।
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ऐसे में अतीक को नैनी जेल शिफ्ट करने की कवायद को लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि अतीक या पत्नी शाइस्ता परवीन फूलपुर से चुनाव लड़ सकती हैं। ऐसा हुआ तो चुनाव में फिर अतीक मुख्य फैक्टर होंगे। कहा तो यहां तक जा रहा है कि यदि अतीक को नैनी जेल शिफ्ट कर दिया गया तो वह या उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव न लड़ें तो भी फूलपुर संसदीय क्षेत्र में उनका दखल होगा। इसका सीधा नुकसान गठबंधन प्रत्याशी को होने की बात कही जा रही है। सपा के जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति यादव का कहना भी है कि अतीक को यहां लाने के पीछे सरकार की चाल है लेकिन इससे गठबंधन पर कोई असर नहीं होगा। मतदाता गठबंधन के साथ है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय का कहना है कि सरकार का अपराधियों को सरंक्षण मिला है। उपचुनाव में भी अतीक को बुलाया गया था लेकिन नतीजा सामने है।
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नैनी जेल में अतीक का पूरा नेटवर्क फैले होने की बात कही जाती है। यहां उनसे मिलने वालों का क्रम लगातार बना रहता था। बताया जाता है कि वह सभी धंधों को जेल से ही संचालित करते रहे। इसलिए अतीक को नैनी से देवरिया जेल शिफ्ट कर दिया गया लेकिन वहां भी दबंगई की शिकायत हुई। एक व्यापारी को जेल में ही प्रताड़ित करने की शिकायत हुई थी। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। इसके बाद बरेली जेल शिफ्ट कर दिया गया लेकिन वहां भी अतीक पर धमकाने-डराने के आरोप लगे। इन आरोपों के बीच पत्नी ने स्वास्थ्य के आधार पर अतीक को दोबारा नैनी जेल शिफ्ट करने की मांग की है और शासन ने अतीक को नैनी भेजने की तैयारी भी शुरू कर दी है। बस निर्वाचन आयोग की अनुमति का इंतजार है। ऐसे में अतीक को एक बार फिर नैनी जेल लाने की कवायद तथा उनके प्रति इस नर्मी पर सवाल उठने लगे हैं।
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