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अधिवक्ता दस वर्ष के लिए निलंबित
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
Updated Tue, 03 Jan 2017 01:20 AM IST
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बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने मकान हड़पने के आरोपी अधिवक्ता विजय कुमार शुक्ला को दस वर्ष के लिए वकालत के पेशे से निलंबित कर दिया है। इस दौरान उनको देश की किसी भी अदालत, अधिकरण, अधिकारी या पंचाट में वकालत करने की अनुमति नहीं होगी। नैनी की पिंकी कुशवाहा ने अधिवक्ता के खिलाफ बार कौंसिल में शिकायत दर्ज कराई थी।
मधवापुर पट्टी खरकौनी नैनी निवासी याची का आरोप है कि उसका अपने पिता स्व. चिरौंजी लाल के साथ रहने वाली महिला सुधा कुशवाहा से संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर विवाद चल रहा था। इस सिलसिले में उसकी मुलाकात अधिवक्ता विजय कुमार शुक्ला से हुई। विजय ने उसे विश्वास में लेकर संपत्ति संबंधी सभी मूल दस्तावेज तथा एफडी और बीमा आदि के मूल दस्तावेज ले लिए। कई सादे और लिखे कागजों पर हस्ताक्षर कराने के बाद बाद में उसका मकान हड़प लिया। उस पर जबरन कब्जा भी कर लिया। इस संबंध में अधिवक्ता के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। यह भी बताया गया कि विजय कुमार शुक्ला के खिलाफ धोखाधड़ी और जानलेवा हमले समेत करीब छह आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
कौंसिल की अनुशासनात्मक सीमित ने सभी तथ्यों का अवलोकन करने के बाद अधिवक्ता को व्यवसायिक कदाचार का दोषी मानते हुए दस वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है। इस दौरान उनके वकालत करने पर भी रोक लगा दी गई है।
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मधवापुर पट्टी खरकौनी नैनी निवासी याची का आरोप है कि उसका अपने पिता स्व. चिरौंजी लाल के साथ रहने वाली महिला सुधा कुशवाहा से संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर विवाद चल रहा था। इस सिलसिले में उसकी मुलाकात अधिवक्ता विजय कुमार शुक्ला से हुई। विजय ने उसे विश्वास में लेकर संपत्ति संबंधी सभी मूल दस्तावेज तथा एफडी और बीमा आदि के मूल दस्तावेज ले लिए। कई सादे और लिखे कागजों पर हस्ताक्षर कराने के बाद बाद में उसका मकान हड़प लिया। उस पर जबरन कब्जा भी कर लिया। इस संबंध में अधिवक्ता के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। यह भी बताया गया कि विजय कुमार शुक्ला के खिलाफ धोखाधड़ी और जानलेवा हमले समेत करीब छह आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
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कौंसिल की अनुशासनात्मक सीमित ने सभी तथ्यों का अवलोकन करने के बाद अधिवक्ता को व्यवसायिक कदाचार का दोषी मानते हुए दस वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है। इस दौरान उनके वकालत करने पर भी रोक लगा दी गई है।
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