फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   aducation tribunal

हाईकोर्ट की तरह क्षेत्राधिकार बंटवारे पर सहमत हैं वकील

Sat, 17 Aug 2019 09:30 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 17 Aug 2019 09:30 PM IST
विज्ञापन
aducation tribunal
aducation tribunal
शिक्षा सेवा अधिकरण
विज्ञापन

00000000000000000000000000
हाईकोर्ट की तरह क्षेत्राधिकार बंटवारे पर सहमत हैं वकील
0 अधिकरण पर निकाला जा सकता है बीच का रास्ता मगर विधायन पर ही उठ रहे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। शिक्षा सेवा अधिकरण के गठन पर हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीच का रास्ता निकालने पर सहमत हैं। उनका मानना है कि यदि अधिकरण का क्षेत्राधिकार भी इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ पीठ के क्षेत्राधिकार की तरह बांट दिया जाए तो इस समस्या का हल निकल सकता है, बशर्ते सभी पक्ष इस पर सहमत हों। निर्णय प्रदेश सरकार को करना है इसलिए उसकी रज़ामंदी सबसे जरूरी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में प्रदेश के 62 जिले हैं जबकि, लखनऊ पीठ के पास 13 जिलों का क्षेत्राधिकार है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता चाहते हैं, यदि इसी के मुताबिक अधिकरण का क्षेत्राधिकार भी बांट दिया जाए तो उनको कोई आपत्ति नहीं है। मगर पूरा अधिकरण अकेले लखनऊ में स्थापित करना न तो न्याय हित में है और न ही वादकारियों के। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कहना है कि उसने इस सुझाव के साथ राज्य सरकार को प्रस्ताव भी भेजा है मगर, अभी तक सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
विज्ञापन

बार के अध्यक्ष राके श पांडेय का कहना है कि अधिकरण लखनऊ ले जाने के पीछे असल खेल ब्यूराक्रेसी का है। मगर इससे वादकारियों को गंभीर नुकसान होगा। अधिकरण के फैसले के खिलाफ यदि अपील या रिवीजन दाखिल करना है तो उसे फिर इलाहाबाद आना होगा। इससे वादकारी की परेशानी बढ़ेगी। यदि लखनऊ पीठ में ही सभी रिवीजन दाखिल होंगे तो इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों का नुकसान होगा। उनके काम का बड़ा हिस्सा छिन जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा प्रस्तावित बिल पर ही सवाल खड़े करते हैं। कहते हैं ट्रिब्यूनल का स्ट्रक्चर ही जनता के हित में नहीं है। इसमें जिला जज और सचिव स्तर के अधिकारी बैठेंगेे। उनका कार्यकाल दो साल का होगा। इसका मतलब है कि जबतक वह शिक्षा कानूनों को समझेंगे, कार्यकाल ही समाप्त हो जाएगा। अधिकरण के बिल में हाईकोर्ट को अपील की अधिकारिता नहीं दी गई है। अपील सुप्रीमकोर्ट में दाखिल होगी जबकि हाईकोर्ट को सिर्फ रिवीजन की अधिकारिता होगा। इससे वादकारियों के लिए न्याय पाने का रास्ता और दुरुह हो जाएगा।
पूर्व अध्यक्ष आईके चतुर्वेदी भी क्षेत्राधिकार बंटवारे पर सहमत हैं मगर, सवाल उठाते हैं कि जो काम इलाहाबाद और लखनऊ पीठ में 20 हाईकोर्ट के जज कर रहे हैं, वह काम ट्रिब्यूनल में कैसे हो पाएगा। यह अलग सवाल है। चतुर्वेदी कहते हैं, अधिकरणों के काम को लेकर वैसे भी कई सवाल हैं। प्रदेश में जितने भी अधिकरण बने हैं, किसी में नियुक्तियां पूरी नहीं हैं। ऐसे में शिक्षा जैसे संवेदनशील मामले के निस्तारण में अधिकरण कितने प्रभावी होंगे इस पर भी विचार की जरूरत है।

हालांकि अधिकरण के मुद्दे पर गेंद अब कोर्ट के पाले में है। जस्टिस सुधीर अग्रवाल के रेफरेंस पर पांच जजों की पीठ के इस मामले पर सुनवाई करने की संभावना है। अधिवक्ता कहते हैं कि अधिकरण से जुड़े इन तमाम मुद्दों को अदालत के समक्ष रखा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed