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डेढ़ साल बाद अचेत हालत में मिली ससुराल से ठुकराई महिला
Sun, 13 Jun 2021 12:18 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 13 Jun 2021 12:18 AM IST
सार
- फूलपुर पुलिस ने किया था जिला प्रोबेशन अधिकारी के सुपुर्द, 20 दिन बाद आया होश तो बयां की दर्द की दास्तां
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विस्तार
अचेत हालत में फूलपुर पुलिस को मिली एक महिला आखिरकार महीने भर के इलाज के बाद शनिवार को होश में आ गई। मनोचिकित्सकों की मदद से उसकी काउंसलिंग कराकर परिजनों का पता लगाया गया। अंतत: उसे उसकी बहन को सुपुर्द कर दिया गया। सड़क के किनारे पटरी पर बेहोशी की हालत में मिली एक महिला के बारे में पुलिस ने बीती 23 मई को जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्र को सूचना दी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस की मदद से प्रोबेशन अधिकारी ने उसे खुल्दाबाद स्थित सखी वन स्टाफ सेंटर भिजवा दिया। मानसिक स्थिति ठीक न होने की वजह से वहां उसकी हालत और भी बिगड़ गई। महिला की तबीयत खराब होने पर उसे काल्विन अस्पताल में दिखाया गया।
लगातार उपचार केे बाद अंतत: महिला को होश आ गया। होश आने के बाद सखी वन स्टॉप सेंटर की परामर्शदाता प्रिंयका पांडेय ने उसकी काउंसलिंग की तब पता चला कि उसकी बहन पुराना कटरा में रहती है। उसने अपना घर वाराणसी बताया। महिला की सूचना के आधार पर उसकी मां से वीडियो कांफ्रेंसिंग कराई गई तो उसने अपनी बेटी को पहचान लिया, लेकिन उसे लेने के लिए आने में असमर्थता जताने लगी। इस पर वन स्टाफ सेंटर की प्रभारी शिष्या सिंह ने पुलिस की मदद से उसकी पुराना कटरा स्थित बहन से संपर्क किया। शनिवार की दोपहर उसकी बहन खुल्दाबाद स्थित सेंटर पहुंची और फिर डेढ़ साल बाद महिला अपने परिजनों के पास पहुंच सकी।
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लगातार उपचार केे बाद अंतत: महिला को होश आ गया। होश आने के बाद सखी वन स्टॉप सेंटर की परामर्शदाता प्रिंयका पांडेय ने उसकी काउंसलिंग की तब पता चला कि उसकी बहन पुराना कटरा में रहती है। उसने अपना घर वाराणसी बताया। महिला की सूचना के आधार पर उसकी मां से वीडियो कांफ्रेंसिंग कराई गई तो उसने अपनी बेटी को पहचान लिया, लेकिन उसे लेने के लिए आने में असमर्थता जताने लगी। इस पर वन स्टाफ सेंटर की प्रभारी शिष्या सिंह ने पुलिस की मदद से उसकी पुराना कटरा स्थित बहन से संपर्क किया। शनिवार की दोपहर उसकी बहन खुल्दाबाद स्थित सेंटर पहुंची और फिर डेढ़ साल बाद महिला अपने परिजनों के पास पहुंच सकी।
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