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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   A Way of Living a Sanatan Life: Sudesh Berry

सनातन जीवन जीने का तरीका : सुदेश बेरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 02:43 AM IST
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A Way of Living a Sanatan Life: Sudesh Berry
अभिनेता सुदेश बेरी - फोटो : samvad
चर्चित फिल्म अभिनेता सुदेश बेरी सोमवार को पथरचट्टी रामलीला में मेघनाद की भूमिका निभाने प्रयागराज पहुंचे। अमर उजाला के लिए संवाद न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में उन्होंने अभिनय, सनातन संस्कृति और बदलते दौर में कला के स्वरूप पर खुलकर बात की।उन्होंने कहा कि सनातन केवल किसी पहचान तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। अभिनय उनके लिए महादेव का आशीर्वाद और साधना है। सुदेश ने कहा कि यह केवल अभिनय नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का माध्यम है।
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सवाल : पथरचट्टी रामलीला में मेघनाद की भूमिका को लेकर कितने उत्साहित हैं?
बहुत उत्साहित हूं। मेरे लिए जरूरी है कि माहौल अच्छा हो। मैं जब किसी किरदार को निभाने जाता हूं, तो अपने मन को उसके लिए तैयार करके जाता हूं। मैंने पहले से मेघनाद को तय करके नहीं रखा है कि उसे किस तरह निभाना है। मैं जिस दिन उसे निभाऊंगा, उस दिन से वही मेघनाद होगा।
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सवाल : टीवी और रामलीला के मंच पर अभिनय करने में क्या अंतर है?
जवाब: ‘रेत पर दौड़ना और जमीन पर दौड़ना’ जितना अंतर है। फिल्म में एक दृश्य दिन में शूट होता है लेकिन थिएटर में कलाकार को एक ही दिन में सब कुछ करना होता है। मंच पर कलाकार को उसी समय अपने अभिनय से दर्शकों को जोड़ना होता है।
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सवाल : आज कला और सिनेमा में क्या बदलाव देख रहे हैं?
जवाब: कला पहले जैसी दिखाई नहीं देती। पहले दूध में पानी था, अब पानी में दूध है। आज सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम का प्रभाव बहुत बढ़ गया है। लोकप्रियता और पैसे कमाने के तरीके बदल गए हैं। कलाकार के लिए सबसे जरूरी उसकी कला और काम के प्रति ईमानदारी होनी चाहिए।
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सवाल : प्रयागराज आकर कैसा लग रहा है?
अमिताभ बच्चन को बॉलीवुड का भगवान मानता हूं। जब प्रयागराज आता हूं, तो एक अलग ही एहसास होता है। लगता है कि 140 करोड़ लोगों के देश में अमिताभ बच्चन जैसे कलाकार 10-12 तो होने ही चाहिए। यहां आकर यह भाव आता है कि किसी और को नहीं, भगवान मुझे ही अमिताभ बच्चन बना दें।

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सवाल : युवा पीढ़ी को आप बेहतर अभिनय सीखने के लिए क्या संदेश देंगे?
अभिनय महादेव का आशीर्वाद है। यह केवल एक पेशा नहीं, बल्कि साधना है। अगर आप अपने काम से प्रेम करते हैं, तो आपको काम करने के लिए अलग से प्रेरणा की जरूरत नहीं पड़ती। ‘इफ यू लव योर वर्क, यू डोन्ट हैव टू वर्क’। मैं युवाओं से कहना चाहूंगा कि अच्छी बातें बोलें, अच्छी बातें सुनें, शराब से दूर रहें और अच्छा खानपान अपनाएं। जीवन में सकारात्मकता बहुत जरूरी है। अपने शरीर और मन का ध्यान रखें और अपने काम को पूरी ईमानदारी से करें।
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प्रमुख फिल्में
- घायल
- बॉर्डर
- रिफ्यूजी
- एलओसी कारगिल
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