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केंद्रीय कारागार में वर्तमान में कुल 35 कैदियों में हो चुकी है एड्स की पुष्टि

Wed, 17 Apr 2019 12:53 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 17 Apr 2019 12:53 AM IST
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A total of 35 prisoners currently in central jails have confirmed the AIDS
HIV AIDS

केंद्रीय कारागार नैनी में इस वर्ष के बीते दो महीने में 11 कैदी एचआईवी पाजिटिव पाए गए हैं। जिनमें तीन कैदियों के बारे में तो गत फरवरी महीने में एड्स पीड़ित होने की पुष्टि हो गई थी। बाकी बचे आठ कैदियों का अभी एसआरएन अस्पताल से एआटीसी सेंटर में जांच कराना बाकी हैं। फिलहाल इन कैदियों का जेल अस्पताल में कराए गए खून के जांच से पता चला है कि इनमें एचआईवी पाजिटिव के लक्षण है। इनमें से ज्यादातर कैदी ड्रग्स एडिक्ट बताए जा रहे हैं। एड्स पीड़ित कैदियों की संख्या बढने से जेल प्रशासन के कान खड़े होना स्वाभाविक है लेकिन इन सब के बीच एक राहत भरी खबर ये है कि फिलहाल जेल में कैंसर जैसी भयावह बीमारी से ग्रसित एक भी कैदी नहीं बचे हैं।

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केंद्रीय कारागार नैनी में इस समय तकरीबन चार हजार विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदी बंद हैं। इनमें से 43 कैदी एड्स जैसी भयावह बीमारी की चपेट में हैं। जिनमें 35 कैदियों में इसकी पुष्टि हो चुकी है और इन सबका शहर के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल से इलाज चल रहा है। जिनमें तीन कैदी तो अभी इस वर्ष 14 और 21 फरवरी को एचआईवी पाजिटिव पाए गए हैं। इनके अलावा आठ ऐसे कैदी अभी और बचे हैं जिनका एसआरएन अस्पताल के एआरटीसी सेंटर से जांच होनी बाकी हैं, क्योकि इन कैदियों की जेल अस्तपाल में कराई गई खून की जांच में एचआईवी पाजिटिव के लक्षण पाए गए हैं। इस साल के महज साढ़े तीन महीने में ही 11 कैदियों के एड्स से ग्रसित होने की पुष्टि होने से खलबली मचना स्वाभाविक है।
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जेल आंकड़े पर यकीन करें तो 29 दिसंबर 2018 तक एड्स पीड़ित कैदियों की संख्या 32 थी। जिनमें वर्ष 2018 में ही अकेले 15 कैदी एड्स पीड़ित पाए गए थे। वर्तमान में जिन आठ कैदियों में एचआईवी पाजिटिव होने के लक्षण पाए गए हैं, उनका एसआरएन अस्पताल में ब्लड  जांच कराने के लिए पुलिस कप्तान प्रयागराज से पुलिस फोर्स की मांग वरिष्ठ जेल अधीक्षक की ओर से की गई है। फोर्स मिलते ही इन कैदियों को जांच कराने के लिए भेजा जाएगा। हालांकि इस खलबली के बीच यह राहत भरी खबर है कि जेल में एक भी कैंसर पीड़ित कैदी नहीं बचे हैं। जो कैंसर पीड़ित कैदी थे, उनमें से अधिकांश लोग रिहा हो गए। एक कैदी बचा था, जिसकी तकरीबन दो महीने पहले इलाज के दौरान मौत हो गई थी। फिलहाल अब जेल में कैंसर से ग्रसित एक भी कैदी नहीं हैं।
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