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गजब : मोबाइल फोन पर गेम खेलते-खेलते छह साल का बच्चा बोलने लगा कोरियन भाषा

Fri, 06 Feb 2026 12:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 06 Feb 2026 12:50 PM IST
सार

Prayagraj News: होलागढ़ निवासी एक छह वर्षीय बच्चा मोबाइल फोन पर कोरियन गेम, ड्रामा व कार्टून देखने में ऐसा डूबा कि देखते-देखते ही वह हिंदी भाषा छोड़ कोरियन बोलने लगा। इससे घबराए बच्चे के माता-पिता उसे लेकर मनोचिकित्सक के पास पहुंचे।

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A six-year-old boy started speaking Korean while playing a game on his mobile phone.
मोबाइल गेम। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मोबाइल फोन पर तरह-तरह के ऑनलाइन-ऑफलाइन गेम में उलझे छोटे-बड़े बच्चे, अब घर-घर की बड़ी समस्या बन गए हैं। एकांत में मोबाइल फोन पर उनका घंटों चिपके रहना अभिभावकों के लिए चिंता का विषय तो है ही, बच्चों की सेहत व उनके दिल और दिमाग पर भी प्रतिकूल असर डाल रहा है। एक ऐसा ही प्रकरण कॉल्विन अस्पताल के मन कक्ष के चिकित्सकों के पास पहुंचा है।

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होलागढ़ निवासी एक छह वर्षीय बच्चा मोबाइल फोन पर कोरियन गेम, ड्रामा व कार्टून देखने में ऐसा डूबा कि देखते-देखते ही वह हिंदी भाषा छोड़ कोरियन बोलने लगा। इससे घबराए बच्चे के माता-पिता उसे लेकर मनोचिकित्सक के पास पहुंचे। गूगल सर्च करने पर पता चला कि बच्चा जो भाषा बोल रहा है, वह कोरियन है।

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शिक्षा विभाग में नौकरी करने वाले माता-पिता ने व्यस्तता के चलते अपने बेटे को होलागढ़ में दादा के पास देखभाल के लिए छोड़ा था। दादा बच्चे को खेलने व बहलाने के लिए जब-तब मोबाइल फोन थमा देते थे। कुछ समय बाद बच्चा कुछ अजीब सी भाषा बोलने लगा। कुछ हिंदी और कुछ अटपटे शब्द सुन परिजन हैरान-परेशान हो गए। जब बच्चे की भाषा समझ में नहीं आई तो परिजन उसे लेकर कॉल्विन अस्पताल के मन कक्ष पहुंचे।

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यहां गूगल सर्च से पता चला कि वह कोरियन भाषा का इस्तेमाल कर रहा है। उसका मोबाइल फोन चेक करने पर उसमें कोरियन गेम व कार्टून की भरमार मिली। चिकित्सकों ने पाया कि बच्चा वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार हो गया था। ऐसे में चिकित्सकों ने बच्चे को मोबाइल फोने देने से मना कर दिया। साथ ही माता-पिता को बच्चे से अधिक बात करने व उसके साथ समय गुजारने को कहा। संवाद

क्या है वर्चुअल ऑटिज्म

छोटे बच्चों में स्क्रीन (मोबाइल, टीवी, टैबलेट) के अत्यधिक उपयोग के कारण उत्पन्न लक्षण को वर्चुअल ऑटिज्म कहते हैं। यह वास्तविक ऑटिज्म से अलग है, क्योंकि यह प्रतिवर्ती है। स्क्रीन टाइम कम करा व बातचीत बढ़ाने से यह ठीक हो सकता है। इस समस्या से ग्रस्त बच्चा सामाजिक रूप से अलग-थलग, भाषा में पिछड़ा और ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ हो सकता है।

मोबाइल फोन पर अधिक समय देने के खराब नतीजे

आंखों पर असर, कमजोरी के साथ रोशनी कम हो सकती है। शारीरिक गतिविधि कम होने से मोटापा, हृदय रोग और मांसपेशियों में समस्या का बढ़ना।

बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, और आक्रामक प्रवृत्ति बढ़ जाती है। मोबाइल फोन न मिलने पर एंग्जाइटी या बेचैनी होना, लत लगने का संकेत है।

मोबाइल फोन से निकलने वाली नीली रोशनी नींद के हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे नींद आने में दिक्कत और अनिद्रा की समस्या होती है।

स्क्रीन पर अधिक समय देने के कारण बच्चों के बोलने और भाषा सीखने की क्षमता में देरी हो सकती है, साथ ही एकाग्रता में कमी आती है।

वर्चुअल दुनिया में ज्यादा रहने से बच्चों के सामाजिक कौशल कमजोर होते हैं, जिससे वह परिवार और दोस्तों से दूर हो जाते हैं।

पढ़ाई और होमवर्क से ध्यान भटकता है।

कैसे मोबाइल फोन से करें दूर

बच्चों के लिए मोबाइल फोन इस्तेमाल का एक निश्चित समय निर्धारित करें, जैसे खेलने के बाद या शाम को एक घंटे के लिए।

बच्चों को पार्क में खेलने, स्विमिंग या किसी रचनात्मक कार्य (पेंटिंग, पहेलियाें आदि) में व्यस्त रखें।

बच्चे माता-पिता की नकल करते हैं। यदि अभिभावक उनके सामने मोबाइल फोन का उपयोग कम करेंगे, तो ने भी ऐसा ही करेंगे।

घर के कुछ हिस्सों जैसे बेडरूम या डाइनिंग टेबल पर फोन का इस्तेमाल न करें।

बच्चों के साथ खेलें, कहानियां सुनाएं और सभी एक साथ बैठकर खाना खाएं, जिससे उनका ध्यान मोबाइल से हटकर परिवार पर जाए।

बच्चों को समझाएं कि ज्यादा स्क्रीन टाइम उनकी आंखों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

 

स्क्रीन पर अधिक समय देने की वजह से बच्चे अलग वर्चुअल दुनिया में जीने लगते हैं। ऐसे में वह अपनों से दूर हो जाते हैं। अगर कोई इसका विरोध या फिर रोक टोक लगाए, तो वह मरने व मारने को तैयार हो जाते हैं। इसके लिए जरूरी है कि बच्चों को तमाम प्रकार की गतिविधियों में अपने साथ व्यस्त रखें।- डॉ. अनुराग वर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल।


अधिक स्क्रीन टाइम की वजह से कई बच्चे देर से बोलना शुरू कर रहे हैं। बच्चों में सीखने की क्षमता अधिक होती है। ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चाें को अधिक समय दें और उनके सामने मोबाइल का कम इस्तेमाल करें।- डॉ. राकेश पासवान, मनोचिकित्सक परामर्शदाता, कॉल्विन हॉस्पिटल।

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