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मजदूरों की मदद के लिए पीएम को लिखा पत्र
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शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, रिटायर्ड जजों, प्रोफेसरों और अधिवक्ताओं ने प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर प्रवासी श्रमिकों को इस भीषण में गर्मी हो रही तकलीफ से निजात दिलाने के उपाय करने की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि प्रवासी मजदूरों की बेहद गंभीर उपेक्षा व पीड़ा सहन करनी पड़ रही है। उनको 43 डिग्री तापमान में हजारों किमी दूर अपने घर, गांव पैदल वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ा रहा है।
पत्र में कहा गया है कि 20 करोड़ प्रवासी मजदूर अपने राज्य से बाहर रहते हैं, इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा असंगठित क्षेत्र में हैं और लगभग सभी किराये के मकानों में रहते हैं। इन मजदूरों को लॉकडाउन समय का न तो कोई वेतन देगा और ना ही मकान मालिक बिना किराए के एक भी दिन टिकने देगा। सरकार की ओर से उठाए गए कदम मजदूरों को राहत पहुंचाने के लिए नाकाफी हैं।
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लाखों-लाख पुरुष व महिलाएं अपनी आवश्यक सामग्री और बच्चों को लादे पैदल ही अपने घरों को लौट रहे हैं। यह स्थिति बेहद त्रासदीपूर्ण है। मांग की गई है कि इन मजदूरों के लिए यातायात के साधन भोजन, दवा आदि आवश्यक चीजों का प्रबंध किया जाए। पत्र लिखने वालों में सेवानिवृत्त न्यायाधीश जनार्दन सहाय, सेवानिवृत्त न्यायाधीश हेत सिंह, श्री रविकिरण जैन (अध्यक्ष पीयूसीएल), प्रो. आलोक राय, प्रो. रंजना कक्कड़, प्रो. रघु सिन्हा, प्रो. कल्पना द्विवेदी, प्रो. निशा श्रीवास्तव, दिनेश द्विवेदी (वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय), ओ.डी. सिंह, हरिशचन्द्र द्विवेदी (सीटू), आनन्द मालवीय, अविनाश मिश्र, गायत्री गांगुली, अधिवक्ता काशान सिद्दिकी, प्रो. श्री बल्लभ, अंशु मालवीय, नरेश सहगल, डा. आशीष मित्तल (महासचिव एआईकेएमएस), अधिवक्ता फरमान नकवी, प्रो. लालसा यादव, डा. सूर्य नारायण आदि शामिल हैं।
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पत्र में कहा गया है कि प्रवासी मजदूरों की बेहद गंभीर उपेक्षा व पीड़ा सहन करनी पड़ रही है। उनको 43 डिग्री तापमान में हजारों किमी दूर अपने घर, गांव पैदल वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ा रहा है।
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पत्र में कहा गया है कि 20 करोड़ प्रवासी मजदूर अपने राज्य से बाहर रहते हैं, इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा असंगठित क्षेत्र में हैं और लगभग सभी किराये के मकानों में रहते हैं। इन मजदूरों को लॉकडाउन समय का न तो कोई वेतन देगा और ना ही मकान मालिक बिना किराए के एक भी दिन टिकने देगा। सरकार की ओर से उठाए गए कदम मजदूरों को राहत पहुंचाने के लिए नाकाफी हैं।
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लाखों-लाख पुरुष व महिलाएं अपनी आवश्यक सामग्री और बच्चों को लादे पैदल ही अपने घरों को लौट रहे हैं। यह स्थिति बेहद त्रासदीपूर्ण है। मांग की गई है कि इन मजदूरों के लिए यातायात के साधन भोजन, दवा आदि आवश्यक चीजों का प्रबंध किया जाए। पत्र लिखने वालों में सेवानिवृत्त न्यायाधीश जनार्दन सहाय, सेवानिवृत्त न्यायाधीश हेत सिंह, श्री रविकिरण जैन (अध्यक्ष पीयूसीएल), प्रो. आलोक राय, प्रो. रंजना कक्कड़, प्रो. रघु सिन्हा, प्रो. कल्पना द्विवेदी, प्रो. निशा श्रीवास्तव, दिनेश द्विवेदी (वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय), ओ.डी. सिंह, हरिशचन्द्र द्विवेदी (सीटू), आनन्द मालवीय, अविनाश मिश्र, गायत्री गांगुली, अधिवक्ता काशान सिद्दिकी, प्रो. श्री बल्लभ, अंशु मालवीय, नरेश सहगल, डा. आशीष मित्तल (महासचिव एआईकेएमएस), अधिवक्ता फरमान नकवी, प्रो. लालसा यादव, डा. सूर्य नारायण आदि शामिल हैं।