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ट्रेन ड्राइवरों के लिए बनेंगे छह एडवांस सेंटर
Allahabad
Updated Sun, 16 Nov 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। ट्रेन ड्राइवरों की कमी दूर करने के लिए छह एडवांस ट्रेनिंग सेंटर बनाने की तैयारी है। इसमें तकनीकी कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इन सेंटर में ड्राइविंग सिमुलेटर्स भी लगाए जाएंगे। इनसे ड्राइवरों को प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनों को पटरी पर दौड़ने का अहसास होगा। यह सेंटर मुगलसराय, कुर्ला, आसनसोल, विशाखापट्टनम, कानपुर और अवाडी में बनाए जाएंगे। 120 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को पीपीपी के तहत पूरा किया जाएगा।
मोदी सरकार रेलवे में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश की तैयारी में जुटी है। रेल मंत्रालय ने तय किया है कि ट्रेन चालकों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण केेंद्रों के निर्माण के लिए एफडीआई का इस्तेमाल हो सकता है। प्रशिक्षण संस्थानों के निर्माण में रेलवे बीओटी, बीओओ के साथ ज्वाइंट वेंचर और एन्युटी जैसे विकल्पों को अपनाएगी। चारों विकल्प निवेशकों को दिए गए हैं। छह प्रशिक्षण संस्थानों के निर्माण में 120 करोड़ रुपये का खर्च आने की संभावना है। रेलवे अफसर बताते हैं कि प्रशिक्षण संस्थानों में ड्राइवर्स सिमुलेटर्स भी लगाए जाएंगे। इन सिमुलेटर्स में बैठकर ड्राइवर सेमी हाईस्पीड और हाई स्पीड ट्रेनों का प्रशिक्षण ले सकेंगे। चालकों को ठीक उसी तरह अनुभव होगा, जैसा हाईस्पीड ट्रेन चलाने को दौरान हो सकता है। इसके साथ ही मैकेनाइज्ड लॉड्री का निर्माण भी इन्हीं मॉडल पर होना है। लॉड्री एक, दो, तीन और पांच टन रोजाना क्षमता की बनाई जाएंगी। इन परियोजनाओं को भी निवेश वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है।
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मोदी सरकार रेलवे में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश की तैयारी में जुटी है। रेल मंत्रालय ने तय किया है कि ट्रेन चालकों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण केेंद्रों के निर्माण के लिए एफडीआई का इस्तेमाल हो सकता है। प्रशिक्षण संस्थानों के निर्माण में रेलवे बीओटी, बीओओ के साथ ज्वाइंट वेंचर और एन्युटी जैसे विकल्पों को अपनाएगी। चारों विकल्प निवेशकों को दिए गए हैं। छह प्रशिक्षण संस्थानों के निर्माण में 120 करोड़ रुपये का खर्च आने की संभावना है। रेलवे अफसर बताते हैं कि प्रशिक्षण संस्थानों में ड्राइवर्स सिमुलेटर्स भी लगाए जाएंगे। इन सिमुलेटर्स में बैठकर ड्राइवर सेमी हाईस्पीड और हाई स्पीड ट्रेनों का प्रशिक्षण ले सकेंगे। चालकों को ठीक उसी तरह अनुभव होगा, जैसा हाईस्पीड ट्रेन चलाने को दौरान हो सकता है। इसके साथ ही मैकेनाइज्ड लॉड्री का निर्माण भी इन्हीं मॉडल पर होना है। लॉड्री एक, दो, तीन और पांच टन रोजाना क्षमता की बनाई जाएंगी। इन परियोजनाओं को भी निवेश वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है।
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