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जीते-जी अधूरी रह गई दोगुनी पेंशन की आस

Wed, 27 Aug 2014 05:30 AM IST
Allahabad
Allahabad Updated Wed, 27 Aug 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत व्यवस्था की गई थी कि सौ वर्ष की उम्र पूरी करने पर पेंशन दोगुनी हो जाएगी लेकिन इस घोषणा का फायदा सिर्फ कागजों में सीमित रह गया। गिने-चुने पेंशनरों को ही इसका लाभ मिला। इलाहाबाद में महज आधा दर्जन लोग सौ वर्ष की आयु तक पहुंच सके। इनमें से भी दो का निधन हो चुका है और बचे हुए तीन लोग पारिवारिक पेंशनर्स हैं।
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जहां तक सामान्य पेंशनर्स की बात है तो इलाहाबाद में अब तक महज एक पेंशनर को इस योजना का फायदा मिल सका है और वह भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। पेंशनरों का कहना है कि ऐसी योजना का क्या मतलब, जिसका फायदा जीते-जी न मिल सके। सरकार ने जान बूझकर ऐसी योजना बनाई, जिसका फायदा किसी को न मिले और सरकार की झूठी वाहवाही भी हो। छठे वेतन आयोग के तहत व्यवस्था की गई थी कि 80 वर्ष की आयु पूरी करने पर पेंशन में 20 फीसदी, 85 वर्ष पर 30 फीसदी, 90 वर्ष पर 40, 95 वर्ष पर 50 और 100 वर्ष की आयु पूरी करने पर पेंशन में 100 फीसदी की बढ़ोत्तरी की जाएगी लेकिन 100 वर्ष की आयु तक गिने-चुने पेंशनर्स ही पहुंच पाते हैं। पेंशनर्स संगठन ने अब आयु वर्ग का नया प्रस्तावित स्लैब तैयार कर इसे सातवें वेतन आयोग के तहत लागू करने की मांग की है ताकि पेंशनरों को 85 वर्ष की आयु में ही 100 फीसदी की बढ़ोत्तरी का लाभ मिल सके।
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सौ साल की आयु पर दोगुनी पेंशन की व्यवस्था छठे वेतन आयोग के तहत जनवरी 2006 से लागू की गई। तब से लेकर अब तक इलाहाबाद में एक सामान्य पेंशनर और तकरीबन चार पारिवारिक पेंशनरों को यह लाभ मिला। इलाहाबाद जिला कोषागार से 36 हजार 232 सामान्य एवं पारिवारिक पेंशनर्स जुड़े हुए हैं। सबसे पहले यह लाभ उंचवागढ़ी में रहनी वाली धनपति देवी को बतौर पारिवारिक पेंशनर मिला लेकिन वह अब इस दुनिया में नहीं हैं।
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जिला कोषागार की वरिष्ठ कोषाधिकारी नीलम सिंह ने बताया कि वर्तमान में इलाहाबाद में दोगुनी पेंशन का लाभ करेली की तहजूबिन निशा के साथ कलावती एवं फूलादेवी को मिला रहा है और तीनों पारिवारिक पेंशनर्स हैं। इनको प्रतिमाह 14-14 हजार रुपये पारिवारिक पेंशन मिलती है। इससे पहले तीनों को न्यूनतम 3500 रुपये पेंशन मिलती थी और 3500 रुपये डीए था। यानी कुल सात हजार रुपये पेंशन मिलती थी, जो सौ वर्ष की आयु पूरी करने पर दोगुनी हो गई। तहजूबिन निशा की जन्मतिथि 12 जुलाई 1909, फूलादेवी की एक जनवरी 1912 और कलावती की जन्मतिथि एक जुलाई 1914 है। इनमें से तहजूबिन का ट्रांसफर केस है। इससे पहले उन्हें जिला कोषागार मऊ से पेंशन मिल रही थी। इसके अलावा सिविल लाइंस ट्रेजरी से भी साढ़े पांच हजार पेंशनर्स जुड़े हुए हैं लेकिन वर्तमान में वहां किसी को दोगुनी पेंशन नहीं मिल रही है। वरिष्ठ कोषाधिकारी दिलीप कुमार पांडेय ने बताया कि दो साल पहले सिविल लाइंस ट्रेजरी से जुगल किशोर सिन्हा नाम के पेंशनर को दोगुनी पेंशन मिल रही थी। वह केसर विद्या पीठ से टीचर के पद से रिटायर हुए थे लेकिन अब जीवित नहीं हैं।
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