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गहरेबाजी में दम साधे देखते रहे घोड़ों का दमखम
Allahabad
Updated Tue, 15 Jul 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। सावन के पहले सोमवार को शहर की शान और साझी परंपरा गहरेबाजी यानी इक्का दौड़ की प्रतियोगिता फिर जीवंत हुई। पूरे उत्साह के साथ गहरेबाज जुटे और कदमबाज घोड़ों ने भी अपना कमाल दिखाया। गहरेबाजों ने उनका हौसला बढ़ाया तो सरपट दौड़ते घोड़े पल भर में ही हवा से बातें करने लगे। बिना किसी निमंत्रण और बुलावे के जुटे गहरेबाजी केशौकीन सड़क के दोनों ओर खड़े होकर मुग्ध और चकित होते रहे। यमुना बैंक रोड पर हुई प्रतियोगिता में जीत-हार का फैसला तो नहीं हुई लेकिन कदमबाज घोड़े सराहे गए। इसमें महेवा के बचई सेठ, मालवीय नगर के मुरारी, कटरा के बदरे आलम, सिविल लाइंस के सादिक, कीडगंज के विष्णु महराज आदि के घोड़ों ने कमाल दिखाया। बचई सेठ के बेटे शेर अली के घोड़ों, तूफान और ‘बिजली तड़प’ ने तेज रफ्तार से तालियां बटोरीं तो बाड़मेर के मेले से मंगाया गया गहरेबाज सादिक का घोड़ा भी सराहा गया। इसी तरह विष्णु महराज, कटरा के बदरे आलम, मुट्ठीगंज के अशोक शर्मा आदि की मौजूदगी भी खास रही। प्रतियोगिता सावन के प्रत्येक सोमवार को होगी। हालांकि अबकी यमुना बैंक रोड पर ज्यादा लोग जुटे लेकिन जानकारी न होने की वजह से गहरेबाजी के कई शौकीन, मेडिकल कालेज से लेकर सीएमपी डिग्री कालेज तक के पुराने रास्ते पर ही गहरेबाजों की राह तकते रहे। यहां काकू पंजाबी, अनुराग पंडा, ओमप्रकाश आदि अपने घोड़ों के साथ पहुंचे। प्रतियोगिता के संयोजक विष्णु महराज के मुताबिक जबर्दस्त ट्रैफिक और सब्जी मंडी होने से सीएमपी कालेज वाले रास्ते को बदला गया है।‘गहरेबाजी’ का लुत्फ उठाने के लिए शहरी ही नहीं नई दिल्ली की फ्रेंड्स कॉलोनी के असरार अहमद, वाराणसी के संकटमोचन से श्यामजी पाठक, लखनऊ के हजरतगंज से शमशाद और श्यामेंद्र भी आए। माना जाता है कि दशकों पहले तीर्थपुरोहितों की ओर से सावन में इक्के से शिव के दर्शन के लिए जाने और लौटने के साथ ही ‘इक्का दौड़’ की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे यह शहरियों का शौक बन गया।
घोड़ों में चुस्ती बनी रहे।
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घोड़ों में चुस्ती बनी रहे।