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जमानत याचिकाओं के निस्तारण में अनावश्यक विलंब न करें अदालतें
Allahabad
Updated Sat, 21 Jun 2014 05:31 AM IST
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हाईकोर्ट ने निचली अदालतों द्वारा मामूली कारणों से जमानत प्रार्थनापत्रों पर सुनवाई टालने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि वकीलों की हड़ताल जैसे मामूली कारणों से सुनवाई टालने से अभियुक्त के मौलिक अधिकार का हनन होता है। यदि वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई टालने की मांग की जाती है तो अदालतों को अभियुक्त को स्वयं अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए और उसे सुनकर आदेश पारित करना चाहिए। आगरा के रवि कुमार अग्रवाल द्वारा दाखिल 482 के प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने विस्तृत आदेश पारित किए हैं।
रवि कुमार का जमानत प्रार्थनापत्र एडीजे आगरा की अदालत में काफी समय से लंबित है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल जमानत पर शीघ्र सुनवाई का आदेश देने की मांग की। न्यायपीठ ने कहा कि इस मामूली से कारण की वजह से याची को हाईकोर्ट तक आना पड़ा जो नहीं होना चाहिए था। न्यायपीठ ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब अदालतें समयबद्ध तरीके से प्रार्थनापत्रों और मुकदमों के निस्तारण का रास्ता खोजें और बेवजह के कारणों से सुनवाई न टाली जाए। यदि अदालत को लगता है कि अभियोजन से कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है और वह उस दिन प्राप्त नहीं हो पा रही है तो प्रार्थनापत्र अगले दिन सुना जाए मगर किसी भी हालत में इसे अनिश्चित समय तक के लिए नहीं टाला जाना चाहिए। अदालत ने जमानत प्रार्थनापत्र का समय से निस्तारण नहीं करने पर प्रदेश सरकार पर दस हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है।
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रवि कुमार का जमानत प्रार्थनापत्र एडीजे आगरा की अदालत में काफी समय से लंबित है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल जमानत पर शीघ्र सुनवाई का आदेश देने की मांग की। न्यायपीठ ने कहा कि इस मामूली से कारण की वजह से याची को हाईकोर्ट तक आना पड़ा जो नहीं होना चाहिए था। न्यायपीठ ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब अदालतें समयबद्ध तरीके से प्रार्थनापत्रों और मुकदमों के निस्तारण का रास्ता खोजें और बेवजह के कारणों से सुनवाई न टाली जाए। यदि अदालत को लगता है कि अभियोजन से कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है और वह उस दिन प्राप्त नहीं हो पा रही है तो प्रार्थनापत्र अगले दिन सुना जाए मगर किसी भी हालत में इसे अनिश्चित समय तक के लिए नहीं टाला जाना चाहिए। अदालत ने जमानत प्रार्थनापत्र का समय से निस्तारण नहीं करने पर प्रदेश सरकार पर दस हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है।
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