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शादी का सर्टिफिकेट नहीं है हाईकोर्ट का आदेश
Allahabad
Updated Sat, 21 Jun 2014 05:31 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। अनावश्यक मामलों पर याचिका दाखिल कर कोर्ट का वक्त बर्बाद करने की प्रवृत्ति पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कहा है कि ऐसी याचिकाओं पर कड़ा निर्णय लेने का वक्त आ गया है क्योंकि इनसे अदालतों का बोझ बढ़ता है और महत्वपूर्ण मुकदमों के निस्तारण में विलंब होता है। कोर्ट ने अपनी मर्जी से शादी करने के बाद संरक्षण का आदेश प्राप्त करने के लिए दाखिल याचिकाओं को तुच्छ तथा खिझाऊ माना है। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल की अवकाशकालीन बेंच ने ऐसे करीब दर्जन भर जोड़ों की याचिकाएं हर्जाने के साथ खारिज कर दी है।
अदालत ने अधिवक्ताओं से भी अपील की है कि वह अपने मुवक्किलों को सही राय देकर याचिकाओं का बेवजह बोझ बढ़ने से रोकने में मदद करें। न्यायपीठ का मानना है कि इस प्रकार की याचिकाओं पर रोक लगाना आसान नहीं है इसलिए न्यायालय को देखना है कि ऐसे लोगों को अनावश्यक लाभ नहीं मिले और अदालत का वक्त बर्बाद करने के लिए इन हर्जाना लगाया जाना भी आवश्यक है। कोर्ट ने पूनम व अन्य, इशरत जहां व अन्य, तीसमीस बहल व अन्य, शहनाज व अन्य, आरती व अन्य जैसी तमाम याचिकाओं को खारिज करते हुए सभी पर 2500-2500 रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने पूनम व अन्य की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अदालत ने मामले के तथ्यों का परीक्षण नहीं किया है, इसलिए कोई भी प्राधिकारी इस आदेश को शादी के सर्टिफिकेट के तौर पर न समझें।
यह सभी याचिकाएं लगभग एक जैसी मांग को लेकर दाखिल की गई थी। जिनमें याचिकाकर्ताओं ने अपनी मर्जी से शादी करने के कारण परिवार वालों द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पुलिस कार्रवाई से संरक्षण की मांग की थी। न्यायालय ने अधिकतर याचिकाओं में पाया कि वास्तव में याचियों के समक्ष ऐसी कोई समस्या नहीं है। याचिकाएं मात्र इस संभावना पर दाखिल की गई कि भविष्य में उनके समक्ष कोई ऐसा संकट आ सकता है। कोर्ट ने शपथपत्रों को भी सत्य नहीं पाया।
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अदालत ने अधिवक्ताओं से भी अपील की है कि वह अपने मुवक्किलों को सही राय देकर याचिकाओं का बेवजह बोझ बढ़ने से रोकने में मदद करें। न्यायपीठ का मानना है कि इस प्रकार की याचिकाओं पर रोक लगाना आसान नहीं है इसलिए न्यायालय को देखना है कि ऐसे लोगों को अनावश्यक लाभ नहीं मिले और अदालत का वक्त बर्बाद करने के लिए इन हर्जाना लगाया जाना भी आवश्यक है। कोर्ट ने पूनम व अन्य, इशरत जहां व अन्य, तीसमीस बहल व अन्य, शहनाज व अन्य, आरती व अन्य जैसी तमाम याचिकाओं को खारिज करते हुए सभी पर 2500-2500 रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने पूनम व अन्य की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अदालत ने मामले के तथ्यों का परीक्षण नहीं किया है, इसलिए कोई भी प्राधिकारी इस आदेश को शादी के सर्टिफिकेट के तौर पर न समझें।
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यह सभी याचिकाएं लगभग एक जैसी मांग को लेकर दाखिल की गई थी। जिनमें याचिकाकर्ताओं ने अपनी मर्जी से शादी करने के कारण परिवार वालों द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पुलिस कार्रवाई से संरक्षण की मांग की थी। न्यायालय ने अधिकतर याचिकाओं में पाया कि वास्तव में याचियों के समक्ष ऐसी कोई समस्या नहीं है। याचिकाएं मात्र इस संभावना पर दाखिल की गई कि भविष्य में उनके समक्ष कोई ऐसा संकट आ सकता है। कोर्ट ने शपथपत्रों को भी सत्य नहीं पाया।
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