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नई सरकार से कर्मचारियों को उम्मीदें
Allahabad
Updated Sun, 25 May 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में कर्मचारी वर्ग की भी अहम भूमिका है और पोस्टल बैलेट के जरिए पड़े वोट इसकासंकेत हैं। ऐसे में सरकार से उम्मीदें रखना लाजिमी है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि केंद्र की नई सरकार उनकी समस्याओं को सुनेगी और समझेगी। साथ ही उन्हें राहत देेते हुए तमाम मांगे पूरी करेगी। हालांकि नरेंद्र मोदी ने अभी प्रधानमंत्री पद की शपथ नहीं ली है लेकिन कर्मचारी वर्ग में इन दिनों यही चर्चा चल रही है कि मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद कर्मचारियों के लिए क्या करते हैं।
पिछले पांच साल यूपीए-2 के कार्यकाल में तमाम मांगों को लेकर कर्मचारी लगातार आंदोलन करते रहे। कई बार राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों ने हड़ताल भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि छठवें वेतन आयोग की तमाम विसंगतियां भी पांच साल में दूर नहीं की जा सकीं। ऐसे में कर्मचारी वर्ग में भी सत्ता पक्ष के प्रति नाराजगी थी। यह गुस्सा किस हद तक पहुंच गया था, इसके दो उदाहरण सामने हैं। चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी पोस्टल बैलेट के जरिये मतदान करते हैं। फूलपुर संसदीय सीट में भाजपा को पोस्टल बैलेट के जरिये पड़े मतों के 60 फीसदी और इलाहाबाद संसदीय सीट में 41 फीसदी वोट मिले। कर्मचारी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि नई सरकार उनके लिए कुछ करेगी। उनकी मांग है कि पचास फीसदी महंगाई भत्ते (डीए) को मूल वेतन में मर्ज किया जाए, आयकर कटौती की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये की जाए, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें पहली जनवरी 2014 से लागू की जाएं, यूपीए-2 के कार्यकाल में लागू की गई नई अंशदायी पेंशन योजना का समाप्त कर पुरानी पेंशन नीति पुन: लागू की जाए, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों और डाक विभाग के ईडी कर्मचारियों को विनियमित किया जाए। आल इंडिया ऑडिट एंड एकाउंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र पांडेय का कहना है कि सरकार किसी की भी हो लेकिन काम और फैसले कर्मचारी हित में होने चाहिए। कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई सरकार तमाम मांगें पूरी करते हुए उन्हें राहत प्रदान करेगी।
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पिछले पांच साल यूपीए-2 के कार्यकाल में तमाम मांगों को लेकर कर्मचारी लगातार आंदोलन करते रहे। कई बार राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों ने हड़ताल भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि छठवें वेतन आयोग की तमाम विसंगतियां भी पांच साल में दूर नहीं की जा सकीं। ऐसे में कर्मचारी वर्ग में भी सत्ता पक्ष के प्रति नाराजगी थी। यह गुस्सा किस हद तक पहुंच गया था, इसके दो उदाहरण सामने हैं। चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी पोस्टल बैलेट के जरिये मतदान करते हैं। फूलपुर संसदीय सीट में भाजपा को पोस्टल बैलेट के जरिये पड़े मतों के 60 फीसदी और इलाहाबाद संसदीय सीट में 41 फीसदी वोट मिले। कर्मचारी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि नई सरकार उनके लिए कुछ करेगी। उनकी मांग है कि पचास फीसदी महंगाई भत्ते (डीए) को मूल वेतन में मर्ज किया जाए, आयकर कटौती की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये की जाए, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें पहली जनवरी 2014 से लागू की जाएं, यूपीए-2 के कार्यकाल में लागू की गई नई अंशदायी पेंशन योजना का समाप्त कर पुरानी पेंशन नीति पुन: लागू की जाए, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों और डाक विभाग के ईडी कर्मचारियों को विनियमित किया जाए। आल इंडिया ऑडिट एंड एकाउंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र पांडेय का कहना है कि सरकार किसी की भी हो लेकिन काम और फैसले कर्मचारी हित में होने चाहिए। कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई सरकार तमाम मांगें पूरी करते हुए उन्हें राहत प्रदान करेगी।
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