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साफ्टवेयर इंजीनियर ने हैक की रिचार्ज वेबसाइट
Allahabad
Updated Tue, 18 Feb 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। रातों रात अमीर बनने की चाहत में साफ्टवेयर इंजीनियर देवव्रत ने अपने साथ काम करने वाले को तो धोखा दिया ही, मोबाइल रिचार्ज करने वाली कंपनी को भी लाखों रुपये का चूना लगा दिया। उसने अपने साथी के पास से मल्टी रिचार्ज कंपनी गोलियंस का आईपी एड्रेस चोरी कर लिया। साथ काम करने वाले इंजीनियर ने ही गोलियंस का वेबसाइट बनाया था। उसने आईपी एड्रेस के जरिए रिचार्ज कंपनी की वेबसाइट को हैक कर गोरखधंधा शुरू कर दिया। जब एकाउंट से रुपये कम होने लगे तो रिचार्ज कंपनी के मनोज गोयल ने कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई। साइबर सेल ने तलाश शुरू की और हैकर को निरंजन सिनेमा हाल के पास से रविवार रात धर दबोचा।
मनोज गोयल की कंपनी गोलियंस का दफ्तर नार्थ मलाका में है। उनकी मल्टी रिचार्ज कंपनी से शहर के 553 रिटेलर जुड़े हुए हैं। देवव्रत ने डॉटा बेस चोरी करने के बाद सभी रिटेलर्स के पासवर्ड भी हासिल कर लिए थे। वेबसाइट को हैक कर वह रिटेलर्स के एकाउंट से धीरे-धीरे रिचार्ज करने लगा। देवव्रत का गोरखधंधा चलता रहा लेकिन उसने एक गलती कर दी और जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया। उसने वेबसाइट के जरिए खुद ही रिटेलर नियुक्त कर दिए। नया रिटेलर वेबसाइट पर दिखा तो मनोज गोयल को कुछ शक हुआ। उन्होंने पिछले सप्ताह कोतवाली में मुकदमा लिखवाया। एसएसपी उमेश कुमार श्रीवास्तव ने जांच एसपी क्राइम एके पांडेय को सौंपी। एसपी क्राइम ने साइबर क्राइम सेल के प्रभारी ज्ञानेंद्र कुमार राय को जांच में लगाया। पुलिस ने सबसे पहले वेबसाइट तैयार करने वाले को ही दबोच लिया लेकिन उसकी भूमिका न मिलने पर तफ्तीश शुरू की। तीन दिन के भीतर ही जालसाज पकड़ा गया। देवव्रत ने एमसीए की डिग्री इग्नू से हासिल की है। देवव्रत ने बताया कि उसकी करतूत की जानकारी साथ काम करने वाले इंजीनियर को नहीं थी।
हैकिंग के काम में देवव्रत को महारत हासिल है। सोमवार को पत्रकारों से मुखातिब एसएसपी ने बताया कि देवव्रत पहले भी वेबसाइट हैक कर कई कंपनियों को चूना लगा चुका है। वह मोबाइल रिचार्ज के अलावा, ऑनलाइन शॉपिंग, डीटीएच रिचार्ज भी करता था। इसके पास से लैपटॉप मिला है जिसकी जांच करवाई जा रही है। इससे साइबर क्राइम के कई और मामले भी खुल सकते हैं।
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एसएसपी ने साइबर क्राइम के उलझे हुए मामले को खोलने पर इंस्पेक्टर विशवंभर नाथ तिवारी, एसआई ज्ञानेंद्र कुमार राय को एसएसपी ने 10 हजार रुपये इनाम की घोषणा की है।
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मनोज गोयल की कंपनी गोलियंस का दफ्तर नार्थ मलाका में है। उनकी मल्टी रिचार्ज कंपनी से शहर के 553 रिटेलर जुड़े हुए हैं। देवव्रत ने डॉटा बेस चोरी करने के बाद सभी रिटेलर्स के पासवर्ड भी हासिल कर लिए थे। वेबसाइट को हैक कर वह रिटेलर्स के एकाउंट से धीरे-धीरे रिचार्ज करने लगा। देवव्रत का गोरखधंधा चलता रहा लेकिन उसने एक गलती कर दी और जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया। उसने वेबसाइट के जरिए खुद ही रिटेलर नियुक्त कर दिए। नया रिटेलर वेबसाइट पर दिखा तो मनोज गोयल को कुछ शक हुआ। उन्होंने पिछले सप्ताह कोतवाली में मुकदमा लिखवाया। एसएसपी उमेश कुमार श्रीवास्तव ने जांच एसपी क्राइम एके पांडेय को सौंपी। एसपी क्राइम ने साइबर क्राइम सेल के प्रभारी ज्ञानेंद्र कुमार राय को जांच में लगाया। पुलिस ने सबसे पहले वेबसाइट तैयार करने वाले को ही दबोच लिया लेकिन उसकी भूमिका न मिलने पर तफ्तीश शुरू की। तीन दिन के भीतर ही जालसाज पकड़ा गया। देवव्रत ने एमसीए की डिग्री इग्नू से हासिल की है। देवव्रत ने बताया कि उसकी करतूत की जानकारी साथ काम करने वाले इंजीनियर को नहीं थी।
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हैकिंग के काम में देवव्रत को महारत हासिल है। सोमवार को पत्रकारों से मुखातिब एसएसपी ने बताया कि देवव्रत पहले भी वेबसाइट हैक कर कई कंपनियों को चूना लगा चुका है। वह मोबाइल रिचार्ज के अलावा, ऑनलाइन शॉपिंग, डीटीएच रिचार्ज भी करता था। इसके पास से लैपटॉप मिला है जिसकी जांच करवाई जा रही है। इससे साइबर क्राइम के कई और मामले भी खुल सकते हैं।
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एसएसपी ने साइबर क्राइम के उलझे हुए मामले को खोलने पर इंस्पेक्टर विशवंभर नाथ तिवारी, एसआई ज्ञानेंद्र कुमार राय को एसएसपी ने 10 हजार रुपये इनाम की घोषणा की है।