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लोकतंत्र और लोकमत से ऊपर है लोकहित

Sun, 16 Feb 2014 05:30 AM IST
Allahabad
Allahabad Updated Sun, 16 Feb 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। युवाओं की ओर से युवाओं के लिए आयोजित ‘युवा संवाद-एक पहल’ में वक्ताओं ने ‘लोकहित, लोकमत, लोकतंत्र’ के लिए युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में आयोजित संवाद में मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद केन्द्रीय मंत्री राजीव शुक्ल ने युवाओं का आह्वान किया कि वह यह संकल्प लें कि उनकी हर पहल का लाभ समाज के सबसे कमजोर तबके तक पहुंच रहा है कि नहीं। संवाद के दौरान ‘युवा विमर्श’ पत्रिका का विमोचन किया गया। संवाद 16 फरवरी को भी जारी रहेगा।
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‘लोकहित, लोकमत, लोकतंत्र’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संवाद में लोकमत में मीडिया की भूमिका, राजनीतिक दलों की युवा नीति एवं अंत:लोकतंत्र एवं सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया। केन्द्रीय मंत्री राजीव शुक्ल ने लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी को रेखांकित करते हुए उनको उत्तरदायित्व का भी बोध करवाया। उन्होंने लोकमत और लोकतंत्र से ऊपर लोकहित को बताया। इविवि की हालत पर चिंता जताने के साथ यहां की जानकारी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के सामने रखने की बात कही। उन्होंने स्थिति बेहतर बनाने का आश्वासन भी दिया।
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प्रो. लाल बहादुर वर्मा ने लोकतंत्र में इस बात पर बल दिया कि लोकहित और लोकमत के निर्माण में नारी सशक्तिकरण की प्रमुख भूमिका है। उन्होंने प्रकृति के साथ हो रहे छेड़छाड़ को रोकने की बात कही। वरिष्ठ पत्रकार धनंजय चोपड़ा ने लोक पर प्रमुखता से बल दिया। इस दौरान विचार रखने वालों में शांतनु महाराज ने राम की लोक व्यवस्था को सर्वोपरि बताया। मुख्य अतिथि को प्रतीक चिह्न भेंटकर स्वागत सर्वेन्द्र प्रताप शाही ने किया। अन्य अतिथियों का स्वागत पूर्व महामंत्री सुरेश यादव, रजनीश सिंह ने संचालन डॉ. राजेश सिंह ने एवं आभार रतन दीक्षित ने किया।
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दूसरे सत्र में लोकमत के निर्माण में मीडिया की भूमिका विषय पर आयोजित संवाद में न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय, सुधीर जैन एवं सुमंत भट्टाचार्य ने अपनी बात रखी। न्यायमूर्ति मालवीय ने लोकतंत्र के निर्माण में जागरूक एवं स्वतंत्र मीडिया के कार्यों, इसकी वैधानिक चुनौतियों एवं मीडिया के समक्ष चुनौतियों पर अपने विचार रखे। पीयूष बवेले ने वर्तमान दौर में जनता का लोकतंत्र से उठता विश्वास एवं नए विश्वास बहाली में मीडिया के बढ़ते योगदानों की चर्चा की। सुमंत भट्टाचार्य ने मीडिया को विचारों केयुद्घ जैसे संज्ञाओं से अविभूत किया। सत्र का संचालन धनंजय चोपड़ा ने किया एवं आभार अमरेन्दु ने किया। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति सभाजीत यादव, श्याम कृष्ण पांडेय, अभिन्न श्याम गुप्त, धनंजय सिंह, रविनंदन सिंह, चुन्ना सिंह आदि मौजूद रहे।
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