सिविल लाइंस में बस ने ली चाचा-भतीजा की जान

Allahabad Updated Wed, 27 Nov 2013 05:40 AM IST
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इलाहाबाद। सिविल लाइंस में नवाब युसूफ रोड पर खरबंदा मार्केट के पास मंगलवार शाम रोडवेज बस की चपेट में आने से बाइक सवार दो छात्रों की मौत हो गई। वे दोनों बीए के छात्र और रिश्ते में चाचा-भतीजा थे। धूमनगंज के रहने वाले ये छात्र शाम को सिविल लाइंस से घर लौट रहे थे तभी यह हादसा हो गया। खबर पाकर उन दोनों के परिजन और रिश्तेदार रोते-कलपते अस्पताल पहुंच गए। पुलिस ने रोडवेज बस कब्जे में ली है।
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धूमनगंज में चक मीरा पट्टी निवासी निरंजन सिंह रेलवे में टीटीई हैं। उनका इकलौता बेटा अभिषेक सिंह (21) हंडिया पीजी कॉलेज में बीए दूसरे वर्ष का छात्र था। चंदौली जनपद में रहने वाले उनके भतीजे महेंद्र सिंह का बेटा अंकित (20) भी उनके घर में रहकर पढ़ाई करता था। दो भाइयों में बड़ा अंकित जगपत सिंह सिंगरौर डिग्री कॉलेज में बीए दूसरे वर्ष का छात्र था। मंगलवार दोपहर वे दोनों बाइक से सिविल लाइंस आए थे। वहां से शाम करीब छह बजे घर लौट रहे थे। अभिषेक और अंकित नवाब युसूफ रोड पर खरबंदा मार्केट के पास पहुंचे तभी बस अड्डे की ओर जा रही रोडवेज बस ने उन्हें टक्कर मार दी। दोनों लड़के बाइक समेत सड़क पर गिर गए। बस की तेज टक्कर से उन दोनों को गंभीर चोट पहुंची। उन्हें उठाकर एसआरएन अस्पताल ले जाया गया। सिविल लाइंस थाने के उपनिरीक्षक आरके शर्मा के मुताबिक, अस्पताल में अभिषेक सिंह को मृत घोषित कर दिया गया। कुछ देर में अभिषेक के परिवार के लोग अस्पताल गए। गंभीर रूप से घायल अंकित सिंह ने भी रात करीब आठ बजे दम तोड़ दिया। उसके भी घर में हादसे की खबर पहुंची तो परिजन देर रात चंदौली से आ गए। पुलिस ने बताया कि रोडवेज बस कब्जे में ली गई है। हादसे के बाद बस का डइवर कंडक्टर समेत भाग गया था।
चक मीरा पट्टी में रहने वाले रेलवे के टीटीई निरंजन सिंह के घर में मंगलवार शाम तक खुशियां छाई थीं। इस संपन्न परिवार में शादी की तैयारी चल रही थी। निरंजन सिंह ने बेटी सोनिया का ब्याह होना हैा। शादी दिसंबर में होनी थी। मगर अचानक एक अनहोनी ने उनके परिवार से खुशियां छीन लीं। अब घर में मातम पसरा है। इकलौते बेटे अभिषेक की मौत से परिवार में हाहाकार मच गया। चंदौली में अंकित के घर में यह दुखद जानकारी पहुंची तो वहां भी कोहराम मच गया। अंकित के पिता समेत परिवार के कई लोग देर रात रोते-कलपते इलाहाबाद आ गए।
अभिषेक और अंकित के बीच रिश्ता भले ही चाचा-भतीजा का था लेकिन दोनों में दोस्तों जैसा गहरा अपनापन था। एक ही कक्षा में होने के कारण यह लगाव कुछ ज्यादा ही था। दोनों एक की कमरे में रहते, पढ़ते-लिखते और साथ घूमने-फिरने जाते थे। मंगलवार दोपहर भी वे दोनों बाइक पर साथ निकले थे। घर में बताया था कि शाम को लौट आएंगे। बताते हैं कि किसी वजह से अभिषेक को जाने से मना भी किया गया था मगर दोनों निकल गए। घर में शाम को उन दोनों के लौटने का इंतजार किया जा रहा था, मगर उनकी बजाय ऐसी मनहूस खबर पहुंची कि निरंजन सिंह की दुनिया ही उजड़ गई। वे कुछ लोगों के साथ घबराए हुए एसआरएन अस्पताल पहुंचे तो वहां बेटे अभिषेक का शव देख उनकी आंखों के आगे अंधेरा सा छा गया। वे फफक पड़े। साथ मौजूद लोग उन्हें संभालने का प्रयास करने लगे मगर घर का चिराग बुझने से गम में डूबे पिता को दिलासा देेने वाले खुद अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। उस वक्त अंकित का इलाज चल रहा था। हालांकि उसकी भी हालत नाजुक थी। घंटे भर बाद उसकी भी सांस थमी तो निरंजन गम के पहाड़े से डूब गए। अभिषेक की मां सरोज और बड़ी बहन सोनिया से पहले तो यह दुखद घटना छिपाने की कोशिश की गई फिर उन्हें भी बताना पड़ा। अभिषेक की मां और बहन के विलाप से मुहल्ले वाले भी गम में डूब गए। अंकित का छोटा भाई हाईस्कूल का छात्र है।
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