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27 सौ परिवारों में एक भी बच्चा दसवीं पास नहीं
इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 16 Aug 2013 10:58 AM IST
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इलाहाबाद में बच्चों को शिक्षित करने, उच्च शिक्षा प्रदान कर उन्हें रोजगार
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से जोड़ने की दर्जनों योजनाएं चल रही हैं प्रदेश में लेकिन ताज्जुब है कि
शिक्षा के गढ़ कहे जाने इलाहाबाद के एक हिस्से में 2700 ऐसे परिवार हैं
जहां का कोई बच्चा दसवीं पास नहीं कर सका।
शंकरगढ़ क्षेत्र की पत्थर खदानों में काम करने वाले मजदूर परिवारों का एक भी बच्चा 2013 की हाईस्कूल परीक्षा पास नहीं कर सका। हाड़-तोड़ मेहनत के बाद भी इन मजदूरों की जिंदगी में उजाला लाने की कोशिश सफल नहीं हो रही है।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में 86.63 फीसदी छात्रों की सफलता का दावा करने वाले यूपी बोर्ड की नाक के नीचे ही अंधेरा है। इन गरीब परिवारों केे बच्चों को अशिक्षा की गुलामी से बचाने की कोशिशें नहीं हुईं। खदानों में काम करने वाले इन मजदूरों का कोई भी बच्चा हाईस्कूल पास नहीं कर सका। गोविंद बल्लभ पंत संस्थान एवं प्रगति संस्थान की ओर से संयुक्त रिपोर्ट में इन मजदूरों की जिंदगी का स्याह पक्ष सामने आया है।
गोविंंद बल्लभ पंत संस्थान के विशेषज्ञों ने शंकरगढ़ क्षेत्र के 250 स्वयं सहायता समूह से जुड़े परिवारों की शिक्ष, स्वास्थ्य पर काम किया। सामने आया कि 2700 परिवार ऐसे हैं जिनके बच्चे दसवीं पास नहीं सके। इसमें सभी पत्थर और कृषि मजदूरों के परिवार शामिल हैं। राहत की बात यह है कि विवाह के बाद इन परिवारों में बहू बनकर आई 12 लड़कियों ने पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के रीवा और सतना जिले से हाईस्कूल पास किया है।
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पंत संस्थान के डॉ. सुनीत सिंह का कहना है कि इन परिवारों को शिक्षा के उजियारे से जोड़ने के लिए प्रगति सेवा संस्थान ने गोद लेने का प्रयास किया है। इसमें संस्था और समाज के संपन्न लोगों की मदद से वंचित छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति, पुस्तकें, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य, साइकिल की सुविधा देने का निश्चय किया गया।
डॉ. सुनीत सिंह ने बताया कि पत्थर खदानों में काम करने वाले इन मजदूरों के बच्चे भी उन्हीं खदानों में काम कर रहे हैं। काम करने वाले इन बच्चों को संस्था की ओर से गोद लेने की प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। इस वर्ष इन्हीं खदानों में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को गोद लेकर स्कूल में प्रवेश दिलाने के साथ किताब, ड्रेस आदि की व्यवस्था के साथ ही हर महीने 100 रुपये देने का फैसला किया गया है। इस योजना के तहत विजय लक्ष्मी नामक छात्रा पहली लाभार्थी बनी है।
शंकरगढ़ क्षेत्र की पत्थर खदानों में काम करने वाले मजदूर परिवारों का एक भी बच्चा 2013 की हाईस्कूल परीक्षा पास नहीं कर सका। हाड़-तोड़ मेहनत के बाद भी इन मजदूरों की जिंदगी में उजाला लाने की कोशिश सफल नहीं हो रही है।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में 86.63 फीसदी छात्रों की सफलता का दावा करने वाले यूपी बोर्ड की नाक के नीचे ही अंधेरा है। इन गरीब परिवारों केे बच्चों को अशिक्षा की गुलामी से बचाने की कोशिशें नहीं हुईं। खदानों में काम करने वाले इन मजदूरों का कोई भी बच्चा हाईस्कूल पास नहीं कर सका। गोविंद बल्लभ पंत संस्थान एवं प्रगति संस्थान की ओर से संयुक्त रिपोर्ट में इन मजदूरों की जिंदगी का स्याह पक्ष सामने आया है।
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गोविंंद बल्लभ पंत संस्थान के विशेषज्ञों ने शंकरगढ़ क्षेत्र के 250 स्वयं सहायता समूह से जुड़े परिवारों की शिक्ष, स्वास्थ्य पर काम किया। सामने आया कि 2700 परिवार ऐसे हैं जिनके बच्चे दसवीं पास नहीं सके। इसमें सभी पत्थर और कृषि मजदूरों के परिवार शामिल हैं। राहत की बात यह है कि विवाह के बाद इन परिवारों में बहू बनकर आई 12 लड़कियों ने पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के रीवा और सतना जिले से हाईस्कूल पास किया है।
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पंत संस्थान के डॉ. सुनीत सिंह का कहना है कि इन परिवारों को शिक्षा के उजियारे से जोड़ने के लिए प्रगति सेवा संस्थान ने गोद लेने का प्रयास किया है। इसमें संस्था और समाज के संपन्न लोगों की मदद से वंचित छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति, पुस्तकें, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य, साइकिल की सुविधा देने का निश्चय किया गया।
डॉ. सुनीत सिंह ने बताया कि पत्थर खदानों में काम करने वाले इन मजदूरों के बच्चे भी उन्हीं खदानों में काम कर रहे हैं। काम करने वाले इन बच्चों को संस्था की ओर से गोद लेने की प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। इस वर्ष इन्हीं खदानों में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को गोद लेकर स्कूल में प्रवेश दिलाने के साथ किताब, ड्रेस आदि की व्यवस्था के साथ ही हर महीने 100 रुपये देने का फैसला किया गया है। इस योजना के तहत विजय लक्ष्मी नामक छात्रा पहली लाभार्थी बनी है।