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सिलिका सैंड खनन रोक पर सरकार देगी दस्तावेज
Allahabad
Updated Sat, 03 Aug 2013 05:33 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। सिलिका सैंड के अवैध खनन पर हाईकोर्ट की रोक के बाद सरकार और खनन माफियाओं दोनों में हड़कंप है। प्रदेश सरकार अब इस मसले पर अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी कर रही है। वहीं इस आदेश से प्रभावित कई पक्ष भी अदालती लड़ाई में दखलंदाजी के प्रयास में हैं। शुक्रवार को ओमदत्त सिंह द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर प्रदेश सरकार ने और समय की मांग की। सरकार की ओर से कहा गया कि प्रकरण से संबंधित कई दस्तावेज दाखिल करने हैं। रोक संबंधी आदेश में संशोधन के लिए महाधिवक्ता इसमें अपना पक्ष रखेंगे। दूसरी ओर प्रभावित पक्ष ने भी कहा कि आदेश उनका पक्ष सुने बिना पारित कर दिया गया है। हाईकोर्ट के आदेश से उनका खनन कार्य प्रभावित हो रहा है। अदालत ने इस मामले पर सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तिथि नियत की है।
शंकरगढ़ क्षेत्र में अवैध सिलिका खनन को रोकने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर ग्रीष्मावकास के दौरान हाईकोर्ट ने सिलिका खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। कोर्ट ने राजा शंकरगढ़ और एक अन्य की लीज को भी अवैध मानते हुए खनन पर रोक लगा दी। जिला प्रशासन को क्षेत्र में चल रहे खनन पर नजर रखने का निर्देश दिया है। इसी प्रकरण में पूर्व कमिश्नर हिमांशु कुमार के तबादले पर भी संज्ञान लिया है। इसके बाद प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्षेत्र की अधिकांश सिलिका खदानों को पर्यावरण विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त न होने के कारण खनन पुन: प्रारंभ कराने में कठिनाई आ रही है।
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शंकरगढ़ क्षेत्र में अवैध सिलिका खनन को रोकने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर ग्रीष्मावकास के दौरान हाईकोर्ट ने सिलिका खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। कोर्ट ने राजा शंकरगढ़ और एक अन्य की लीज को भी अवैध मानते हुए खनन पर रोक लगा दी। जिला प्रशासन को क्षेत्र में चल रहे खनन पर नजर रखने का निर्देश दिया है। इसी प्रकरण में पूर्व कमिश्नर हिमांशु कुमार के तबादले पर भी संज्ञान लिया है। इसके बाद प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्षेत्र की अधिकांश सिलिका खदानों को पर्यावरण विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त न होने के कारण खनन पुन: प्रारंभ कराने में कठिनाई आ रही है।
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