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ट्रेन लेट होने से छूटी हजारों की परीक्षा
इलाहबाद/ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jun 2013 12:17 PM IST
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ट्रेनें लेट होने की वजह से बुधवार को हजारों अभ्यर्थियों की पीसीएस प्रारम्भिक परीक्षा छूट गई। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा देने दिल्ली सहित प्रदेश के अलग-अलग भागों से पहुंचे परीक्षार्थियों को उस समय निराशा हाथ लगी जब परीक्षा शुरू होने से आधे घंटे पहले ट्रेन स्टेशन पहुंची।
बड़े प्रयास के बाद भी परीक्षार्थी समय से झूंसी, बमरौली, फाफामऊ जैसे दूर-दराज के क्षेत्र में परीक्षा केन्द्रों पर नहीं पहुंच सके। परीक्षा से वंचित छात्रों ने आयोग पर प्रदर्शन भी किया। इधर ट्रेन के देर से स्टेशन पहुंचने पर बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने स्टेशन मास्टर का उनके कार्यालय का घेराव भी किया। लोक सेवा आयोग की ओर से पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा प्रदेश के 24 जिलों में 558 केन्द्रों पर हुई। इलाहाबाद में 44 हजार परीक्षार्थियों के लिए 80 परीक्षा केन्द्र बनाए गए थे
परीक्षा से वंचित होने वाले सैकड़ों की संख्या में परीक्षार्थियों ने आयोग मुख्यालय पहुंचकर चक्काजाम करने की कोशिश की। परीक्षार्थियों का कहना था कि केन्द्रों पर तैनात व्यवस्थापक और परीक्षा से जुड़े लोगों ने 10 मिनट देरी से पहुंचने पर भी केन्द्र के अंदर नहीं जाने दिया।
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परीक्षा से वंचित छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि केन्द्र व्यवस्थापकों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। रेलवे स्टेशन पर ही देरी से पहुंचने के कारण बड़ी संख्या में परीक्षार्थी केन्द्रों तक गए ही नहीं। इन परीक्षार्थियों ने रेल प्रशासन को कोसने के साथ ही आयोग की ओर से मूल निवास से दूर परीक्षा केन्द्र बनाने को दोषी ठहराया। परीक्षा छूटने वाले अभ्यर्थियों में अधिकांश दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा और बिहार के कुछ जिलों से थे।
इन परीक्षार्थियों का कहना था कि आयोग ने इलाहाबाद के छात्रों का केन्द्र गाजियाबाद, मेरठ सहित दिल्ली के पास वाले शहरों में कर दिया जबकि मेरठ, नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद के छात्रों का केन्द्र इलाहाबाद बना दिया। बड़ी संख्या में परीक्षार्थी ट्रेन लेट होने से परीक्षा केन्द्रों तक नहीं पहुंच सके। इलाहाबाद स्टेशन पर मंगलवार देर रात से ही अभ्यर्थियों का हुजूम उमड़ने लगा था।
लोक सेवा आयोग मुख्यालय पर प्रदर्शन को पहुंचे परीक्षार्थियों के बीच परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि परीक्षा छात्रों की गलती से छूटी है, लिहाजा इस बारे में आयोग कोई मदद नहीं कर सकता।
लोक सेवा आयोग के गेट पर सड़क जाम कर रहे परीक्षार्थियों ने सपा पिछड़ा प्रकोष्ठ की रैली में शािमल होने जा रहे सपा नेताओं से मिलकर अपनी समस्या सुनाई। इन नेताओं ने परीक्षार्थियों को सपा की रैली में ले जाकर बड़े नेताओं से मुलाकात कराई।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में शहर से जुड़े परीक्षार्थियों का केन्द्र बाहर बना देने से अधिकांश परीक्षा केन्द्रों पर बड़ी कम संख्या में परीक्षार्थियों की उपस्थिति रही। केन्द्र व्यवस्थापकों की मानें तो हर केन्द्र पर 30 से 50 फीसदी के बीच ही उपस्थिति रही। परीक्षा के बाद सड़क पर दिखने वाला परीक्षार्थियों का हुजूम भी स्थानीय छात्रों के बाहर चले जाने से नहीं दिखाई पड़ा।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में आधे से अधिक परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। प्रदेश के 24 जिलों में 558 केन्द्रों पर हुई परीक्षा में मात्र 46 फीसदी उपस्थिति रही। इलाहाबाद में 80 केन्द्रों पर हुई परीक्षा में 44 हजार परीक्षार्थियों में से मात्र 40 फीसदी ही शामिल हुए।
परीक्षा नियंत्रक पीएन दुबे ने बताया कि पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में कुल 440500 परीक्षार्थियों ने आवेदन किया था। इसमें से 202200 ही परीक्षा में शामिल हुए। जो कुल संख्या का मात्र 46 फीसदी है। परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि आयोग के इतिहास में पहली बार किसी परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या चार लाख के पार पहुंची। आयोग ने पहली बार प्रवेश पत्र सीधे परीक्षार्थी को न भेजकर डाउनलोड करने को कहा था।
परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि 4.40 लाख परीक्षार्थियों में से मात्र 2.50 लाख ने ही प्रवेश पत्र वेबसाइट से डाउनलोड किए। मानना है कि ऐसे में लगता है कि कुछ परीक्षार्थियों ने गलत सूचना देकर आवेदन किया था। परीक्षा केन्द्र दूर बनाने के कारण उन्होंने परीक्षा छोड़ दी।
केपी कॉलेज में पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा का केन्द्र बनाया गया था। इस दौरान कालेज के लगे मैदान में सपा पिछड़ा प्रकोष्ठ का सम्मेलन चल रहा था। मैदान में चल रहे भाषण के कारण परीक्षार्थियों को परेशानी हुई। मैदान के चारों ओर लगे बड़े-बडे लाउड स्पीकर और पार्टी कार्यकर्ताओं के नारे से पूरी परीक्षा के दौरान हंगामे जैसी स्थिति रही। प्रशासन ने पीसीएस जैसी परीक्षा के दौरान कालेज में पार्टी के सम्मेलन की इजाजत कैसे दी, यह पूरे समय चर्चा का विषय रहा।
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बड़े प्रयास के बाद भी परीक्षार्थी समय से झूंसी, बमरौली, फाफामऊ जैसे दूर-दराज के क्षेत्र में परीक्षा केन्द्रों पर नहीं पहुंच सके। परीक्षा से वंचित छात्रों ने आयोग पर प्रदर्शन भी किया। इधर ट्रेन के देर से स्टेशन पहुंचने पर बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने स्टेशन मास्टर का उनके कार्यालय का घेराव भी किया। लोक सेवा आयोग की ओर से पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा प्रदेश के 24 जिलों में 558 केन्द्रों पर हुई। इलाहाबाद में 44 हजार परीक्षार्थियों के लिए 80 परीक्षा केन्द्र बनाए गए थे
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परीक्षा से वंचित होने वाले सैकड़ों की संख्या में परीक्षार्थियों ने आयोग मुख्यालय पहुंचकर चक्काजाम करने की कोशिश की। परीक्षार्थियों का कहना था कि केन्द्रों पर तैनात व्यवस्थापक और परीक्षा से जुड़े लोगों ने 10 मिनट देरी से पहुंचने पर भी केन्द्र के अंदर नहीं जाने दिया।
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परीक्षा से वंचित छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि केन्द्र व्यवस्थापकों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। रेलवे स्टेशन पर ही देरी से पहुंचने के कारण बड़ी संख्या में परीक्षार्थी केन्द्रों तक गए ही नहीं। इन परीक्षार्थियों ने रेल प्रशासन को कोसने के साथ ही आयोग की ओर से मूल निवास से दूर परीक्षा केन्द्र बनाने को दोषी ठहराया। परीक्षा छूटने वाले अभ्यर्थियों में अधिकांश दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा और बिहार के कुछ जिलों से थे।
इन परीक्षार्थियों का कहना था कि आयोग ने इलाहाबाद के छात्रों का केन्द्र गाजियाबाद, मेरठ सहित दिल्ली के पास वाले शहरों में कर दिया जबकि मेरठ, नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद के छात्रों का केन्द्र इलाहाबाद बना दिया। बड़ी संख्या में परीक्षार्थी ट्रेन लेट होने से परीक्षा केन्द्रों तक नहीं पहुंच सके। इलाहाबाद स्टेशन पर मंगलवार देर रात से ही अभ्यर्थियों का हुजूम उमड़ने लगा था।
लोक सेवा आयोग मुख्यालय पर प्रदर्शन को पहुंचे परीक्षार्थियों के बीच परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि परीक्षा छात्रों की गलती से छूटी है, लिहाजा इस बारे में आयोग कोई मदद नहीं कर सकता।
लोक सेवा आयोग के गेट पर सड़क जाम कर रहे परीक्षार्थियों ने सपा पिछड़ा प्रकोष्ठ की रैली में शािमल होने जा रहे सपा नेताओं से मिलकर अपनी समस्या सुनाई। इन नेताओं ने परीक्षार्थियों को सपा की रैली में ले जाकर बड़े नेताओं से मुलाकात कराई।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में शहर से जुड़े परीक्षार्थियों का केन्द्र बाहर बना देने से अधिकांश परीक्षा केन्द्रों पर बड़ी कम संख्या में परीक्षार्थियों की उपस्थिति रही। केन्द्र व्यवस्थापकों की मानें तो हर केन्द्र पर 30 से 50 फीसदी के बीच ही उपस्थिति रही। परीक्षा के बाद सड़क पर दिखने वाला परीक्षार्थियों का हुजूम भी स्थानीय छात्रों के बाहर चले जाने से नहीं दिखाई पड़ा।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में आधे से अधिक परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। प्रदेश के 24 जिलों में 558 केन्द्रों पर हुई परीक्षा में मात्र 46 फीसदी उपस्थिति रही। इलाहाबाद में 80 केन्द्रों पर हुई परीक्षा में 44 हजार परीक्षार्थियों में से मात्र 40 फीसदी ही शामिल हुए।
परीक्षा नियंत्रक पीएन दुबे ने बताया कि पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में कुल 440500 परीक्षार्थियों ने आवेदन किया था। इसमें से 202200 ही परीक्षा में शामिल हुए। जो कुल संख्या का मात्र 46 फीसदी है। परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि आयोग के इतिहास में पहली बार किसी परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या चार लाख के पार पहुंची। आयोग ने पहली बार प्रवेश पत्र सीधे परीक्षार्थी को न भेजकर डाउनलोड करने को कहा था।
परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि 4.40 लाख परीक्षार्थियों में से मात्र 2.50 लाख ने ही प्रवेश पत्र वेबसाइट से डाउनलोड किए। मानना है कि ऐसे में लगता है कि कुछ परीक्षार्थियों ने गलत सूचना देकर आवेदन किया था। परीक्षा केन्द्र दूर बनाने के कारण उन्होंने परीक्षा छोड़ दी।
केपी कॉलेज में पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा का केन्द्र बनाया गया था। इस दौरान कालेज के लगे मैदान में सपा पिछड़ा प्रकोष्ठ का सम्मेलन चल रहा था। मैदान में चल रहे भाषण के कारण परीक्षार्थियों को परेशानी हुई। मैदान के चारों ओर लगे बड़े-बडे लाउड स्पीकर और पार्टी कार्यकर्ताओं के नारे से पूरी परीक्षा के दौरान हंगामे जैसी स्थिति रही। प्रशासन ने पीसीएस जैसी परीक्षा के दौरान कालेज में पार्टी के सम्मेलन की इजाजत कैसे दी, यह पूरे समय चर्चा का विषय रहा।