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यूजीसी-नेट में भी आईएएस रिजल्ट का असर
Allahabad
Updated Sat, 25 May 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। 30 जून को प्रस्तावित यूजीसी-नेट में भी आईएएस-2012 के फाइनल रिजल्ट का असर दिख रहा है। इस बार हिन्दी और संस्कृत विषय से नेट के लिए आवेदन करने वालाें की संख्या में खासी बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे आईएएस के रिजल्ट को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
इस दफे आईएएस में तकनीकी विषयों के बाद साहित्य का विशेष दबदबा रहा। इलाहाबाद में ही नहीं, टॉपर की सूची में भी अधिकतर प्रतियोगियों ने मुख्य परीक्षा में हिंदी साहित्य या अन्य साहित्यिक विषयों को चुना। इस परीक्षा की टॉपर ने मलयालम साहित्य को एक वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था। वहीं इलाहाबाद के चयनितों में से एक दर्जन से अधिक मेधावियों ने हिन्दी साहित्य को एक वैकल्पिक विषय चुना। नए परीक्षा प्रारूप के तहत तारे मुख्य परीक्षा में अब सिर्फ एक ही वैकल्पिक विषय रखना है। इसलिए स्नातक में हिदी लेने वाले अधिकतर छात्र-छात्राएं आईएएस में भी एक वैकल्पिक विषय के रूप में चुनना चाहते हैं। आशीष त्रिपाठी, रुचिका माथुर आदि का कहना है कि आईएएस और पीसीएस में हिन्दी तथा संस्कृत विषय से सफलता का ग्राफ बढ़ा है। इसलिए उन्होंने स्नातक में भी इसे एक विषय के रूप मेें चुना। प्रतियोगियों के इस सोच का असर यूजीसी में भी दिख रहा है। इस बार हिन्दी से नेट के लिए 4048 आवेदन पहुंचे है। इसके विपरीत पिछले साल जून में हुई परीक्षा में 3103 आवेदन ही हुए थे। संस्कृत में भी 1287 की तुलना में 1687 आवदेन हुए हैं। हालांकि इस बार कुल अभ्यर्थियों की संख्या में भी 3908 की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल 21903 आवेदन पहुंचे थे। इसके विपरीत इस बार आवेदकाें की संख्या 25811 है। इनके लिए यहां 40 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 16 केंद्र विश्वविद्यालय परिसर तथा 24 बाहर के कालेजों में बनाए गए हैं।
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इस दफे आईएएस में तकनीकी विषयों के बाद साहित्य का विशेष दबदबा रहा। इलाहाबाद में ही नहीं, टॉपर की सूची में भी अधिकतर प्रतियोगियों ने मुख्य परीक्षा में हिंदी साहित्य या अन्य साहित्यिक विषयों को चुना। इस परीक्षा की टॉपर ने मलयालम साहित्य को एक वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था। वहीं इलाहाबाद के चयनितों में से एक दर्जन से अधिक मेधावियों ने हिन्दी साहित्य को एक वैकल्पिक विषय चुना। नए परीक्षा प्रारूप के तहत तारे मुख्य परीक्षा में अब सिर्फ एक ही वैकल्पिक विषय रखना है। इसलिए स्नातक में हिदी लेने वाले अधिकतर छात्र-छात्राएं आईएएस में भी एक वैकल्पिक विषय के रूप में चुनना चाहते हैं। आशीष त्रिपाठी, रुचिका माथुर आदि का कहना है कि आईएएस और पीसीएस में हिन्दी तथा संस्कृत विषय से सफलता का ग्राफ बढ़ा है। इसलिए उन्होंने स्नातक में भी इसे एक विषय के रूप मेें चुना। प्रतियोगियों के इस सोच का असर यूजीसी में भी दिख रहा है। इस बार हिन्दी से नेट के लिए 4048 आवेदन पहुंचे है। इसके विपरीत पिछले साल जून में हुई परीक्षा में 3103 आवेदन ही हुए थे। संस्कृत में भी 1287 की तुलना में 1687 आवदेन हुए हैं। हालांकि इस बार कुल अभ्यर्थियों की संख्या में भी 3908 की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल 21903 आवेदन पहुंचे थे। इसके विपरीत इस बार आवेदकाें की संख्या 25811 है। इनके लिए यहां 40 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 16 केंद्र विश्वविद्यालय परिसर तथा 24 बाहर के कालेजों में बनाए गए हैं।
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