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इलाहाबादियों ने पीपीएफ के रूप में बचाए एक अरब
Allahabad
Updated Wed, 22 May 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। सरकारी बचत योजनाओं ने इस बार सभी रिकार्ड तोड़ दिए। वित्तीय वर्ष 2012-13 के दौरान इलाहाबाद जिले में अकेले पीपीएफ एकाउंट में ही लोगों ने एक अरब रुपये जमा किए। सहायक निदेशक बचत कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार इस बार इलाहाबाद मंडल ने लक्ष्य के मुकाबले 108 फीसदी की बचत कराई जबकि पिछले चार सालों में लक्ष्य का 50 फीसदी भी प्राप्त नहीं किया जा सका। अफसरों का मानना है कि लोगों का सरकारी बचत योजनाओं में विश्वास बढ़ा है। बाजार में उथल-पुथल से निजी सेक्टर में पैसा लगाने वालों को पिछले कुछ वर्षों में लंबा नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में लोग सरकारी बचत योजनाओं में ही पैसा लगाना सुरक्षित मान रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान इलाहाबाद मंडल का लक्ष्य चार अरब छह करोड़ 74 लाख रुपये था जबकि वर्ष के अंत में डाक विभाग की विभिन्न बचत योजनाओं के तहत जमा की गई कुल रकम में महज दो अरब 23 करोड़ 17 लाख 31 हजार 700 रुपये ही शेष बचे। बचत योजनाओं का यही हाल इससे पहले के वर्षों में भी रहा। अंतत: शासन ने इलाहाबाद मंडल का लक्ष्य घटा दिया और वित्तीय वर्ष 2012-13 में दो अरब 95 करोड़ 82 लाख रुपये का लक्ष्य दिया। अफसरों को भी उम्मीद नहीं थी कि साल के अंत में लक्ष्य तक पहुंच पाएंगे लेकिन इस बार तो लक्ष्य भी पार हो गया। साल के अंत में विभिन्न बचत योजनाओं के तहत जमा कुल रकम में तीन अरब 46 करोड़ 45 लाख 33 हजार 400 रुपये बचत खाते में शेष रह गए और विभाग ने लक्ष्य से ज्यादा 117.12 फीसदी की बचत कराई। हालांकि मंडल में एकमात्र कौशाम्बी जिले ने लक्ष्य से कम 78.08 फीसदी की बचत कराई जबकि बाकी के जिले इलाहाबाद, प्रतापगढ़ और फतेहपुर लक्ष्य से आगे निकल गए। वित्तीय वर्ष 2011-12 में भी कौशाम्बी ने सबसे ज्यादा निराश किया था और लक्ष्य के मुकाबले बचत शून्य से भी नीचे चली गई थी थी। यहां कि पहले से बचत खाते में पड़े 86 लाख 68 हजार 900 रुपये भी अभिदाताओं ने निकाल लिए थे और लक्ष्य माइनस 10.15 फीसदी हो गया था। बचत कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि पिछले चार साल से लक्ष्य तक पहुंचना तो दूर आधा लक्ष्य भी प्राप्त कर पाना मुश्किल हो गया था लेकिन बाजार में जिस तरह से उथल-पुथल चल रही है, उसे देखते हुए लोग अब सरकारी बचत योजनाओं में निवेश करना सुरक्षित मान रहे हैं और इसी का नतीजा है कि इस बार लक्ष्य से ज्यादा की प्राप्ति हुई।
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वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान इलाहाबाद मंडल का लक्ष्य चार अरब छह करोड़ 74 लाख रुपये था जबकि वर्ष के अंत में डाक विभाग की विभिन्न बचत योजनाओं के तहत जमा की गई कुल रकम में महज दो अरब 23 करोड़ 17 लाख 31 हजार 700 रुपये ही शेष बचे। बचत योजनाओं का यही हाल इससे पहले के वर्षों में भी रहा। अंतत: शासन ने इलाहाबाद मंडल का लक्ष्य घटा दिया और वित्तीय वर्ष 2012-13 में दो अरब 95 करोड़ 82 लाख रुपये का लक्ष्य दिया। अफसरों को भी उम्मीद नहीं थी कि साल के अंत में लक्ष्य तक पहुंच पाएंगे लेकिन इस बार तो लक्ष्य भी पार हो गया। साल के अंत में विभिन्न बचत योजनाओं के तहत जमा कुल रकम में तीन अरब 46 करोड़ 45 लाख 33 हजार 400 रुपये बचत खाते में शेष रह गए और विभाग ने लक्ष्य से ज्यादा 117.12 फीसदी की बचत कराई। हालांकि मंडल में एकमात्र कौशाम्बी जिले ने लक्ष्य से कम 78.08 फीसदी की बचत कराई जबकि बाकी के जिले इलाहाबाद, प्रतापगढ़ और फतेहपुर लक्ष्य से आगे निकल गए। वित्तीय वर्ष 2011-12 में भी कौशाम्बी ने सबसे ज्यादा निराश किया था और लक्ष्य के मुकाबले बचत शून्य से भी नीचे चली गई थी थी। यहां कि पहले से बचत खाते में पड़े 86 लाख 68 हजार 900 रुपये भी अभिदाताओं ने निकाल लिए थे और लक्ष्य माइनस 10.15 फीसदी हो गया था। बचत कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि पिछले चार साल से लक्ष्य तक पहुंचना तो दूर आधा लक्ष्य भी प्राप्त कर पाना मुश्किल हो गया था लेकिन बाजार में जिस तरह से उथल-पुथल चल रही है, उसे देखते हुए लोग अब सरकारी बचत योजनाओं में निवेश करना सुरक्षित मान रहे हैं और इसी का नतीजा है कि इस बार लक्ष्य से ज्यादा की प्राप्ति हुई।
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