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रेमंड पॉल लखनऊ डायोसिस के नए बिशप
Allahabad
Updated Fri, 03 May 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया की लखनऊ डायोसिस को नया बिशप मिल गया। संपत्ति के एक विवाद में आरोप के बाद सीनेट की ओर से मौजूदा बिशप मॉरिस एडगर दान को निलंबित करके लखनऊ के एपी फनी चर्च के पादरी रेमंड पॉल को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीते चार वर्षों से वह एपी फनी चर्च के पादरी हैं।
इससे पहले नई दिल्ली में चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया की सीनेट के अधिकारियों की मुख्य धर्माध्यक्ष डॉ.पीपी मरांडी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। बैठक में जनरल सेक्रेटरी ऑल्विन मसीह, डिप्टी मॉडरेटर पीके सोमंत राय, कोषाध्यक्ष प्रेम मसीह आदि मौजूद थे। उधर, ‘अमर उजाला’ से बातचीत में पादरी रेमंड पॉल ने नई जिम्मेदारी के बारे में स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि आधिकारिक तौर पर सीनेट से पत्र मिलते ही इलाहाबाद के लिए रवाना हूंगा और वहां की स्थितियों को बारीकी से जानने-समझने के बाद ही डायोसिस के बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि दान को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। इस बारे में आठ मई को बिशपों की बैठक में अगला निर्णय लिया जाएगा।
बिशप मॉरिस एडगर दान ने छह सितंबर 2010 को चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया की लखनऊ डायोसिस के बिशप की जिम्मेदारी संभाली थी। ऑल सेंट्स कैथिड्रल में पादरी गैब्रियल दाऊद, डीन ऑफ लखनऊ रेमण्ड पॉल, मुगलसराय के शशिप्रकाश और एग्रीकल्चरल इंस्टीट्यूट के निदेशक-प्रशासन बिनोद बी लाल सहित डायोसिस के अन्य पादरियों तथा प्रतिनिधियों की ओर से उनसे बिशप का पदभार ग्रहण करने का अनुरोध किया था। डायोसिस के सचिव राजेश जोसेफ ने अशा (छड़ी) देकर जिम्मेदारी सौंपी थी। इससे पहले मॉडरेटर्स कमिशरी तथा बिशप ऑफ आगरा एसआर कटिंग ने बिशप हाउस में उन्हें पदभार सौंपा था।
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विभिन्न मत के चर्चों के संघ के रूप में नागपुर में 29 नवंबर 1970 को चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया की स्थापना के बाद लखनऊ डायोसिस के पहले बिशप दीनदयाल बने और बीस वर्षों तक पद पर बने रहे। इसके बाद एआर यूसुफ और एआर स्टीफेन बिशप बने जिन्होंने क्रमश: चार और तेरह वर्षों तक पद संभाला। पादरी पॉल डायोसिस के पांचवें बिशप होंगे। मॉरिस दान ने चौथे बिशप के रूप में कार्यभार संभाला था। यदि उन्हें निलंबित नहीं किया जाता तो वह तकरीबन पंद्रह वर्षों तक इस पद पर बने रहते।
बिशप के चुनाव में डायोसिसन काउंसिल से चुने गए दस वोटर ‘डायोसिसन टेन’ के अतिरिक्त नई दिल्ली सीनेट की कार्यसमिति से दस वोटर यानी ‘सीनेट टेन’ शामिल होता है। बिशप बनने को कुल बीस में से कम से कम 11 वोट चाहिए और मॉरिस एडगर दान को बारह वोट मिले थे। दान के अतिरिक्त बिशप पद के लिए आगरा डायोसिस के बलदेव मसीह, कैथिड्रल के पादरी गैब्रियल दाऊद, डायोसिस के सचिव राजेश जोसेफ, झांसी के पादरी जॉन स्टीफेन और गोरखपुर के पादरी विन्सेंट भी दावेदार थे।
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इससे पहले नई दिल्ली में चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया की सीनेट के अधिकारियों की मुख्य धर्माध्यक्ष डॉ.पीपी मरांडी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। बैठक में जनरल सेक्रेटरी ऑल्विन मसीह, डिप्टी मॉडरेटर पीके सोमंत राय, कोषाध्यक्ष प्रेम मसीह आदि मौजूद थे। उधर, ‘अमर उजाला’ से बातचीत में पादरी रेमंड पॉल ने नई जिम्मेदारी के बारे में स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि आधिकारिक तौर पर सीनेट से पत्र मिलते ही इलाहाबाद के लिए रवाना हूंगा और वहां की स्थितियों को बारीकी से जानने-समझने के बाद ही डायोसिस के बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि दान को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। इस बारे में आठ मई को बिशपों की बैठक में अगला निर्णय लिया जाएगा।
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बिशप मॉरिस एडगर दान ने छह सितंबर 2010 को चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया की लखनऊ डायोसिस के बिशप की जिम्मेदारी संभाली थी। ऑल सेंट्स कैथिड्रल में पादरी गैब्रियल दाऊद, डीन ऑफ लखनऊ रेमण्ड पॉल, मुगलसराय के शशिप्रकाश और एग्रीकल्चरल इंस्टीट्यूट के निदेशक-प्रशासन बिनोद बी लाल सहित डायोसिस के अन्य पादरियों तथा प्रतिनिधियों की ओर से उनसे बिशप का पदभार ग्रहण करने का अनुरोध किया था। डायोसिस के सचिव राजेश जोसेफ ने अशा (छड़ी) देकर जिम्मेदारी सौंपी थी। इससे पहले मॉडरेटर्स कमिशरी तथा बिशप ऑफ आगरा एसआर कटिंग ने बिशप हाउस में उन्हें पदभार सौंपा था।
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विभिन्न मत के चर्चों के संघ के रूप में नागपुर में 29 नवंबर 1970 को चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया की स्थापना के बाद लखनऊ डायोसिस के पहले बिशप दीनदयाल बने और बीस वर्षों तक पद पर बने रहे। इसके बाद एआर यूसुफ और एआर स्टीफेन बिशप बने जिन्होंने क्रमश: चार और तेरह वर्षों तक पद संभाला। पादरी पॉल डायोसिस के पांचवें बिशप होंगे। मॉरिस दान ने चौथे बिशप के रूप में कार्यभार संभाला था। यदि उन्हें निलंबित नहीं किया जाता तो वह तकरीबन पंद्रह वर्षों तक इस पद पर बने रहते।
बिशप के चुनाव में डायोसिसन काउंसिल से चुने गए दस वोटर ‘डायोसिसन टेन’ के अतिरिक्त नई दिल्ली सीनेट की कार्यसमिति से दस वोटर यानी ‘सीनेट टेन’ शामिल होता है। बिशप बनने को कुल बीस में से कम से कम 11 वोट चाहिए और मॉरिस एडगर दान को बारह वोट मिले थे। दान के अतिरिक्त बिशप पद के लिए आगरा डायोसिस के बलदेव मसीह, कैथिड्रल के पादरी गैब्रियल दाऊद, डायोसिस के सचिव राजेश जोसेफ, झांसी के पादरी जॉन स्टीफेन और गोरखपुर के पादरी विन्सेंट भी दावेदार थे।