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कमिश्नर की रिपोर्ट से हाईकोर्ट नाखुश
Allahabad
Updated Tue, 23 Apr 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा किनारे दो सौ मीटर की परिधि में हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर कमिश्नर की रिपोर्ट पर नाखुशी जाहिर की है। दो बार अलग-अलग रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट ने कमिश्नर चंचल तिवारी को आड़े हाथों लिया। न्यायालय ने पूछा कि किस प्रकार से यह रिपोर्ट दी गई कि कोई निर्माण नहीं हो रहा है और मात्र कांच लगाया गया है। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति अरुण टंडन की खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि भविष्य में ऐसी गलती न हो यह सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट में उपस्थित कमिश्नर ने बताया कि उन्होंने इस बार स्वयं स्थलीय निरीक्षण करके 57 अवैध निर्माण चिह्नित किए हैं। कुछ के ध्वस्तीकरण के आदेश दे दिए गए हैं। गलत निर्माण को सीज कर दिया गया है। वीडीए के उपाध्यक्ष को भी निर्देश दिया गया है कि वह सप्ताह में कम से कम एक बार स्थलीय निरीक्षण करें। न्यायालय ने जानना चाहा कि जिन इंजीनियर्स ने गलत रिपोर्ट दी थी उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। अगली तारीख पर अवैध निर्माण रोकने की योजना और की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है। कमिश्नर ने बताया कि प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण और मरम्मत के संबंध में गाइड लाइन तय कर ली गई है। स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है। कोर्ट ने कहा कि इसे शीघ्र तय कर लिया जाए। याची संस्था कौटिल्य सोसाइटी की ओर से कहा गया कि वीडीए मात्र कुछ गरीब लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। बड़े लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सोसाइटी ने वीडीए पर दस्तावेज उपलब्ध न कराने का भी आरोप लगाया। इस पर कोर्ट ने आश्वासन दिया कि जरूरत होने पर मूल दस्तावेज मंगा लिए जाएंगे।
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