{"_id":"8-25974","slug":"Allahabad-25974-8","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीता महाकुंभ, नहीं बदला दारागंज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीता महाकुंभ, नहीं बदला दारागंज
Allahabad
Updated Wed, 06 Mar 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। महाकुंभ बीत गया! उम्मीद थी कि इस महा आयोजन में शहर का कायाकल्प हो जाएगा। पूरा शहर और खासतौर पर महाकुंभ क्षेत्र में आ रहे मोहल्लों में विशेष काम होंगे, लेकिन सारी उम्मीदें धरी की धरी रह गईं। कुंभ के लिए मिली रकम से कुछ सड़कें बनीं, चौराहे जगमग हुए लेकिन मुख्य महाकुंभ क्षेत्र में बसे दारागंज की हालत नहीं सुधरी। महाकुंभ क्षेत्र में करोड़ों रुपये केवल बिजली पर खर्च हो गए लेकिन स्थिति यह है कि दारागंज की गलियों में अभी भी अंधेरा है।
दारागंज शहर का ऐतिहासिक मोहल्ला है। इसकी अलग सांस्कृतिक पहचान है लेकिन सफाई, सड़क और विकास के मानक पर यह शहर के ज्यादातर मोहल्लों की तुलना में उपेक्षित है। मोहल्ले की गलियां कूड़े से पटी पड़ी हैं, नालियां बजबजा रही हैं। गलियों में दुर्गंध इस कदर की उधर से गुजरना मुश्किल। रात में गलियां अंधेरे में डूबी रहती हैं। पूरे इलाके में दूषित जलापूर्ति की भी समस्या है। अब जबकि कुछ दिनों में भीषण गर्मी पड़ने लगेगी, गलियों वाले दारागंज मोहल्ले में समस्याएं बढ़ना तय हैं।
पूरा दारागंज क्षेत्र दो वार्डों में बंटा है। वार्ड नंबर 56 बक्शी खुर्द और वार्ड नंबर 59 दारागंज। पुरानी जीटी रोड से लगे वार्ड 59 की सभी गलियां महाकुंभ के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। कच्ची सड़क, मीरा गली, गंगा भवन गली, कुमकुम शिवाला गली, फुलवरिया रोड, गणेश मंदिर गली, गणेश माधव रोड, मिर्जा का हाता, देवराहा बाबा की गली, समेत सभी गलियां सीधे मेला क्षेत्र से जुड़ी हैं। महाकुंभ के दौरान इन गलियों से लाखों श्रद्धालु गुजरे। यहां तीर्थ पुरोहितों की बड़ी संख्या होने के कारण महाकुंभ के दौरान हजारों यजमान भी आकर उनके आवासों में ठहरे लेकिन सभी को भीषण गंदगी और दुर्गंध वाली गलियों से गुजरना पड़ा।
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ऐसा नहीं है कि नगर निगम के अफसरों को दारागंज की अहमियत नहीं पता या यहां की सड़क, गलियों, नालियों को दुरुस्त करने के लिए योजना नहीं बनी। सब हुआ लेकिन मौके पर समय से काम ही नहीं शुरू हो सका। वार्ड में सफाई के लिए पांच गैंग अतिरिक्त कर्मचारियों के लगाए गए। इसके अलावा 24 नियमित और संविदा कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन उन्होंने पूरे दो माह सफाई कहां की, यह सवाल दारागंज की गलियों को देखकर अपने आप खड़ा हो जाता है। यहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। गलियों में शायद ही कोई ऐसा घर हो, जिसके सामने कूड़े का अंबार न लगा हो। दशाश्वमेघ मंदिर से सटी गली में सीढ़ियों वाला रास्ता है, जो पूरी तरह कूड़े से पटा होने के कारण बंद हो गया है।
महापौर, अफसरों के निरीक्षण के बाद भी काम नहीं
इलाहाबाद। महाकुंभ शुरू होने के काफी पहले महापौर अभिलाषा गुप्ता ने दारागंज का निरीक्षण किया। उस वक्त भी यहां हर तरफ भीषण गंदगी का अंबार था, जो आज भी है। मंडलायुक्त देवेश चतुर्वेदी, मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र, नगर आयुक्त आर विक्रम सिंह ने भी यहां की गलियां देखीं। सड़क, गलियां, नालियां और स्ट्रीट लाइट के सुधार तथा सफाई व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए गए लेकिन हुआ कुछ नहीं।
सिर्फ पुरानी जीटी रोड पर लगी लाइट
इलाहाबाद। पूरा मेला बीत गया लेकिन दारागंज की गलियां रोशन नहीं हो सकीं। अलोपीबाग से होकर दशाश्वमेघ घाट को जाने वाली पुरानी जीटी रोड को छोड़ दें तो यहां किसी भी गली में स्ट्रीट लाइट तक नहीं लगाई गई। गलियों में खराब पड़ी पुरानी लाइटों को भी दुरुस्त नहीं किया गया।
दशाश्वमेघ मार्ग पर नाली नहीं
इलाहाबाद। मेला क्षेत्र में जाने वाले दशाश्वमेघ मार्ग पर नाली नहीं हैं। शास्त्री पुल के नीचे से यह सड़क नागवासुकि होकर बक्शी बांध से मिलती है। महाकुंभ के पहले सिंचाई विभाग ने इस सड़क का निर्माण कराया, जबकि नाली का निर्माण नगर निगम को कराना था। इसके लिए निगम को रकम भी दी जा चुकी हैं लेकिन मेला बीतने के बाद भी नाली नहीं बन सकी।
वेणी माघव की गली में 15 दिन से सफाई नहीं
इलाहाबाद। वेणी माधव की गली में पिछले 15 दिन से सफाई नहीं हुई है। गली में जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा है तो कूड़े से पट चुकी नालियां बजबजा रही है। इससे वहां बीमारी फैलने का भी खतरा है।
दूषित पानी की हो रही आपूर्ति
इलाहाबाद। दारागंज के बड़े इलाके में दूषित जलापूर्ति हो रही है। यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। क्षेत्र में जलापूर्ति राधा रमण इंटर कॉलेज के पास स्थित भूमिगत जलाशय से होती है। जलाशय की आखिरी बार कब सफाई हुई यहां किसी को नहीं पता। बालू और दुर्गंधयुक्त पानी की आपूर्ति पूरे मेला अवधि में जारी रही।
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‘सड़क, गली, नाली और स्ट्रीट लाइट के सुधार के लिए अफसरों से कई बार कहा गया। सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की भी मांग की गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.पीके सिंह से इस संबंध में कई बार कहा गया लेकिन वह क्षेत्र में नहीं आते। नियमित कर्मचारियों से काम न लेकर धनउगाही की जाती है।’ राजेश निषाद, पार्षद वार्ड नंबर 59
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‘निराला मार्ग नगर महापालिका जूनियर हाईस्कूल की गली का हाल यह है कि बच्चे गंदगी के बीच होकर जाते हैं। सफाई व्यवस्था पूरी तरह ढर्रे से उतर गई है।’
अंबर त्रिपाठी ‘अच्चू’
‘फुलवरिया रोड का निर्माण जल निगम ने कराया। सीवर लाइन बिछाने के महीनों बाद सड़क बनाई और मेला शुरू होने के पहले यह कई जगह से धंस गई।’ अनिल कुमार
‘घर से सामने हर समय कूड़े का ढेर लगा रहता है। दूर तक फैला कूड़ा और दुर्गंध के कारण घर के बाहर तक निकलना मुश्किल है।’ सोना देवी
‘बंबा के पानी मा अइसन बदबू आवत हय के ओका छुअए कय मन नाहीं करत। राजू (पार्षद) से कहा तव ऊ अफसरन से बात किहिन लेकिन कउनो देखय, पूछय तक नय आवा।’ विमला देवी
‘वेणी माधव मंदिर के सामने गली में गंदगी इस कदर है कि उधर से गुजरना मुश्किल है। यही हाल गणेश मंदिर गली का है। शिकायत के बावजूद अफसरों पर कोई असर नहीं है।’ मोनू शर्मा
‘राकेट साबुन वाली गली, गणेश मंदिर गली सहित कई गलियों में सुबह-शाम नाली का गंदा बाहर निकलकर बहता है लेकिन सफाई कर्मचारी या सफाई निरीक्षकों को यह नहीं दिखता।’ विश्वनाथ श्रीवास्तव
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दारागंज शहर का ऐतिहासिक मोहल्ला है। इसकी अलग सांस्कृतिक पहचान है लेकिन सफाई, सड़क और विकास के मानक पर यह शहर के ज्यादातर मोहल्लों की तुलना में उपेक्षित है। मोहल्ले की गलियां कूड़े से पटी पड़ी हैं, नालियां बजबजा रही हैं। गलियों में दुर्गंध इस कदर की उधर से गुजरना मुश्किल। रात में गलियां अंधेरे में डूबी रहती हैं। पूरे इलाके में दूषित जलापूर्ति की भी समस्या है। अब जबकि कुछ दिनों में भीषण गर्मी पड़ने लगेगी, गलियों वाले दारागंज मोहल्ले में समस्याएं बढ़ना तय हैं।
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पूरा दारागंज क्षेत्र दो वार्डों में बंटा है। वार्ड नंबर 56 बक्शी खुर्द और वार्ड नंबर 59 दारागंज। पुरानी जीटी रोड से लगे वार्ड 59 की सभी गलियां महाकुंभ के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। कच्ची सड़क, मीरा गली, गंगा भवन गली, कुमकुम शिवाला गली, फुलवरिया रोड, गणेश मंदिर गली, गणेश माधव रोड, मिर्जा का हाता, देवराहा बाबा की गली, समेत सभी गलियां सीधे मेला क्षेत्र से जुड़ी हैं। महाकुंभ के दौरान इन गलियों से लाखों श्रद्धालु गुजरे। यहां तीर्थ पुरोहितों की बड़ी संख्या होने के कारण महाकुंभ के दौरान हजारों यजमान भी आकर उनके आवासों में ठहरे लेकिन सभी को भीषण गंदगी और दुर्गंध वाली गलियों से गुजरना पड़ा।
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महापौर, अफसरों के निरीक्षण के बाद भी काम नहीं
इलाहाबाद। महाकुंभ शुरू होने के काफी पहले महापौर अभिलाषा गुप्ता ने दारागंज का निरीक्षण किया। उस वक्त भी यहां हर तरफ भीषण गंदगी का अंबार था, जो आज भी है। मंडलायुक्त देवेश चतुर्वेदी, मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र, नगर आयुक्त आर विक्रम सिंह ने भी यहां की गलियां देखीं। सड़क, गलियां, नालियां और स्ट्रीट लाइट के सुधार तथा सफाई व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए गए लेकिन हुआ कुछ नहीं।
सिर्फ पुरानी जीटी रोड पर लगी लाइट
इलाहाबाद। पूरा मेला बीत गया लेकिन दारागंज की गलियां रोशन नहीं हो सकीं। अलोपीबाग से होकर दशाश्वमेघ घाट को जाने वाली पुरानी जीटी रोड को छोड़ दें तो यहां किसी भी गली में स्ट्रीट लाइट तक नहीं लगाई गई। गलियों में खराब पड़ी पुरानी लाइटों को भी दुरुस्त नहीं किया गया।
दशाश्वमेघ मार्ग पर नाली नहीं
इलाहाबाद। मेला क्षेत्र में जाने वाले दशाश्वमेघ मार्ग पर नाली नहीं हैं। शास्त्री पुल के नीचे से यह सड़क नागवासुकि होकर बक्शी बांध से मिलती है। महाकुंभ के पहले सिंचाई विभाग ने इस सड़क का निर्माण कराया, जबकि नाली का निर्माण नगर निगम को कराना था। इसके लिए निगम को रकम भी दी जा चुकी हैं लेकिन मेला बीतने के बाद भी नाली नहीं बन सकी।
वेणी माघव की गली में 15 दिन से सफाई नहीं
इलाहाबाद। वेणी माधव की गली में पिछले 15 दिन से सफाई नहीं हुई है। गली में जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा है तो कूड़े से पट चुकी नालियां बजबजा रही है। इससे वहां बीमारी फैलने का भी खतरा है।
दूषित पानी की हो रही आपूर्ति
इलाहाबाद। दारागंज के बड़े इलाके में दूषित जलापूर्ति हो रही है। यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। क्षेत्र में जलापूर्ति राधा रमण इंटर कॉलेज के पास स्थित भूमिगत जलाशय से होती है। जलाशय की आखिरी बार कब सफाई हुई यहां किसी को नहीं पता। बालू और दुर्गंधयुक्त पानी की आपूर्ति पूरे मेला अवधि में जारी रही।
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‘सड़क, गली, नाली और स्ट्रीट लाइट के सुधार के लिए अफसरों से कई बार कहा गया। सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की भी मांग की गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.पीके सिंह से इस संबंध में कई बार कहा गया लेकिन वह क्षेत्र में नहीं आते। नियमित कर्मचारियों से काम न लेकर धनउगाही की जाती है।’ राजेश निषाद, पार्षद वार्ड नंबर 59
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‘निराला मार्ग नगर महापालिका जूनियर हाईस्कूल की गली का हाल यह है कि बच्चे गंदगी के बीच होकर जाते हैं। सफाई व्यवस्था पूरी तरह ढर्रे से उतर गई है।’
अंबर त्रिपाठी ‘अच्चू’
‘फुलवरिया रोड का निर्माण जल निगम ने कराया। सीवर लाइन बिछाने के महीनों बाद सड़क बनाई और मेला शुरू होने के पहले यह कई जगह से धंस गई।’ अनिल कुमार
‘घर से सामने हर समय कूड़े का ढेर लगा रहता है। दूर तक फैला कूड़ा और दुर्गंध के कारण घर के बाहर तक निकलना मुश्किल है।’ सोना देवी
‘बंबा के पानी मा अइसन बदबू आवत हय के ओका छुअए कय मन नाहीं करत। राजू (पार्षद) से कहा तव ऊ अफसरन से बात किहिन लेकिन कउनो देखय, पूछय तक नय आवा।’ विमला देवी
‘वेणी माधव मंदिर के सामने गली में गंदगी इस कदर है कि उधर से गुजरना मुश्किल है। यही हाल गणेश मंदिर गली का है। शिकायत के बावजूद अफसरों पर कोई असर नहीं है।’ मोनू शर्मा
‘राकेट साबुन वाली गली, गणेश मंदिर गली सहित कई गलियों में सुबह-शाम नाली का गंदा बाहर निकलकर बहता है लेकिन सफाई कर्मचारी या सफाई निरीक्षकों को यह नहीं दिखता।’ विश्वनाथ श्रीवास्तव