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बाग बंटवाने में खप गई एक परिवार की तीन पीढ़ियां
Allahabad
Updated Wed, 06 Mar 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। एक बाग के बंटवारे में एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां खप गई। बाग फि र भी नहीं बंटा। तारीख पर तारीख का सिलसिला आज भी जारी है। कानूनी पेचदगियों में उलझे मुकदमे को लटकाने में पक्षकारों की हीलाहवाली भी जिम्मेदार है। बाग के बंटवारे का आदेश हाईकोर्ट 11 अक्तूबर 1966 को दे चुका है पर बंटवारे को अंतिम रूप देने का मामला अभी भी अवर न्यायालय में लंबित है।
हंडिया के सराय आलम गांव में शीतला प्रसाद की बाग के बंटवारे को लेकर उनके पुत्रों में मुकदमे बाजी चल रही है। 1958 में सबसे पहले शीतला के तीन पुत्र भगवती प्रसाद, मोतीलाल और मुन्नी लाल ने सिविल न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया। अवर न्यायालय से यह खारिज हो गया। इसकी प्रथम अपील भी खारिज हो गई तो मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने भी अक्तूबर 66 में अपील खारिज करते हुए बाग के बंटवारे का आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने विवादित बाग में वादीगण और प्रतिवादी गण का आधा-आधा भाग निश्चित किया। अंतिम आज्ञिप्त तैयार करने के लिए मामला फिर अवर न्यायालय पहुंचा और कानूनी पेंचदगियों में फंसा रहा। एक पक्षकार के वकील यतींद्र मिश्र बताते हैं कि न्यायालय अपर जनपद न्यायाधीश श्याम बिहारी शर्मा ने उनकी निगरानी को स्वीकार करते हुए अवर न्यायालय के नौ नवंबर 2005 को पारित एक पक्षीय आदेश को समाप्त कर दिया है। अंतिम आज्ञाप्ति तैयार करने 25 अक्तूबर 2007 को दिया है। मुकदमा अभी लंबित है इसमें अगली तारीख चार मई नियत है।
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हंडिया के सराय आलम गांव में शीतला प्रसाद की बाग के बंटवारे को लेकर उनके पुत्रों में मुकदमे बाजी चल रही है। 1958 में सबसे पहले शीतला के तीन पुत्र भगवती प्रसाद, मोतीलाल और मुन्नी लाल ने सिविल न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया। अवर न्यायालय से यह खारिज हो गया। इसकी प्रथम अपील भी खारिज हो गई तो मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने भी अक्तूबर 66 में अपील खारिज करते हुए बाग के बंटवारे का आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने विवादित बाग में वादीगण और प्रतिवादी गण का आधा-आधा भाग निश्चित किया। अंतिम आज्ञिप्त तैयार करने के लिए मामला फिर अवर न्यायालय पहुंचा और कानूनी पेंचदगियों में फंसा रहा। एक पक्षकार के वकील यतींद्र मिश्र बताते हैं कि न्यायालय अपर जनपद न्यायाधीश श्याम बिहारी शर्मा ने उनकी निगरानी को स्वीकार करते हुए अवर न्यायालय के नौ नवंबर 2005 को पारित एक पक्षीय आदेश को समाप्त कर दिया है। अंतिम आज्ञाप्ति तैयार करने 25 अक्तूबर 2007 को दिया है। मुकदमा अभी लंबित है इसमें अगली तारीख चार मई नियत है।
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