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सारे जतन के बाद भी कट गई जेब
Allahabad
Updated Sat, 23 Feb 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। टैक्स बचाने के लिए कर्मचारियों ने पूरे साल तमाम जतन किए लेकिन अपनी जेब कटने से बचा नहीं सके। जिस अनुपात में वेतन बढ़ा, उस अनुपात में आयकर छूट की सीमा नहीं बढ़ी जबकि महंगाई कई गुना बढ़ गई। थोड़ी बहुत बचत के बाद वेतन का बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में गंवाना पड़ा और जो बचा, उसे महंगाई खा गई। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार के बजट में उन्हें राहत दी जाएगी और आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर कम से कम चार लाख तक की जाएगी।
कर्मचारियों को साल में दो बार सात-सात फीसदी डीए वृद्धि और जुलाई में तीन फीसदी सालाना इंक्रीमेंट का लाभ मिला। ऐसे में कुल 17 फीसदी वेतन बढ़ा जबकि वित्तीय वर्ष 2012-13 में पुरुष कर्मचारियों के लिए आयकर छूट की सीमा एक लाख 80 हजार से बढ़ाकर दो लाख और महिला कर्मचारियों के लिए एक लाख 90 हजार से बढ़ाकर दो लाख रुपए की गई लेकिन धारा-80 सीसीएफ के तहत 20 हजार रुपए की बचत पर मिलने वाली आयकर छूट को समाप्त कर दिया गया और सिर्फ धारा-80 सी के तहत एक लाख रुपए की बचत पर मिलने वाली छूट को मंजूरी दी गई। ऐसे में एक तरफ आयकर छूट की सीमा में 20 हजार रुपए की वृद्धि की गई तो दूसरी ओर 20 हजार रुपए की बचत पर मिलने वाली छूट खत्म कर दी गई जबकि कर्मचारियों का वेतन 17 फीसदी बढ़ गया। कर एवं वित्त सलाहकार पवन जायसवाल ने डीए वृद्धि एवं सालाना इंक्रीमेंट, आयकर में मिलने वाली छूट की सीमा और बचत पर मिलने वाली आयकर छूट की गणना एवं तीनों के बीच तुलनात्मक अध्ययन के बाद बताया कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर दो लाख रुपए किए जाने के बावजूद कर्मचारियों कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि बढ़े हुए वेतन का दस फीसदी टैक्स के रूप में देना पड़ा। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि बढ़े हुए वेतन का 10 फीसदी हिस्सा टैक्स में चला गया और बाकी महंगाई खा गई। कर्मचारियों को फायदा तो हुआ नहीं, उल्टे नुकसान हो गया। उनकी मांग है कि आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर कम से कम चार लाख रुपए की जाए।
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कर्मचारियों को साल में दो बार सात-सात फीसदी डीए वृद्धि और जुलाई में तीन फीसदी सालाना इंक्रीमेंट का लाभ मिला। ऐसे में कुल 17 फीसदी वेतन बढ़ा जबकि वित्तीय वर्ष 2012-13 में पुरुष कर्मचारियों के लिए आयकर छूट की सीमा एक लाख 80 हजार से बढ़ाकर दो लाख और महिला कर्मचारियों के लिए एक लाख 90 हजार से बढ़ाकर दो लाख रुपए की गई लेकिन धारा-80 सीसीएफ के तहत 20 हजार रुपए की बचत पर मिलने वाली आयकर छूट को समाप्त कर दिया गया और सिर्फ धारा-80 सी के तहत एक लाख रुपए की बचत पर मिलने वाली छूट को मंजूरी दी गई। ऐसे में एक तरफ आयकर छूट की सीमा में 20 हजार रुपए की वृद्धि की गई तो दूसरी ओर 20 हजार रुपए की बचत पर मिलने वाली छूट खत्म कर दी गई जबकि कर्मचारियों का वेतन 17 फीसदी बढ़ गया। कर एवं वित्त सलाहकार पवन जायसवाल ने डीए वृद्धि एवं सालाना इंक्रीमेंट, आयकर में मिलने वाली छूट की सीमा और बचत पर मिलने वाली आयकर छूट की गणना एवं तीनों के बीच तुलनात्मक अध्ययन के बाद बताया कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर दो लाख रुपए किए जाने के बावजूद कर्मचारियों कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि बढ़े हुए वेतन का दस फीसदी टैक्स के रूप में देना पड़ा। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि बढ़े हुए वेतन का 10 फीसदी हिस्सा टैक्स में चला गया और बाकी महंगाई खा गई। कर्मचारियों को फायदा तो हुआ नहीं, उल्टे नुकसान हो गया। उनकी मांग है कि आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर कम से कम चार लाख रुपए की जाए।
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